Udaipur Times, Diwali Mela 2026: उदयपुर नगर निगम द्वारा आयोजित विश्वप्रसिद्ध दीपावली मेला 2026 का सातवां दिन काव्य रसिकों के नाम रहा। नगर निगम प्रांगण में आयोजित भव्य कवि सम्मेलन में देश के ख्यातनाम कवियों ने अपनी ओजस्वी, हास्य और श्रृंगार रस से ओतप्रोत रचनाओं के माध्यम से ऐसा समां बांधा कि श्रोता ढलती शाम से लेकर देर रात तक अपनी जगह पर जमे रहे। कवियों की शब्दों की फुलझड़ियों ने दीपावली मेले की रौनक में चार चांद लगा दिए। कभी ठहाकों से पूरा पांडाल गूंजा तो कभी वीर रस की कविताओं ने दर्शकों में देशभक्ति का जज्बा भर दिया।
शैलेश लोढ़ा की हास्य रचनाओं पर गूंजे ठहाके
मेला संयोजक प्रमोद सामर ने बताया कि कवि सम्मेलन का मुख्य आकर्षण देश-विदेश में ख्यातनाम कवि एवं टीवी कलाकार शैलेश लोढ़ा रहे। उन्हें सुनने और देखने के लिए बड़ी संख्या में शहरवासी मेला प्रांगण पहुंचे। मंच पर लोढ़ा के आते ही तालियों की गड़गड़ाहट से उनका स्वागत किया गया। उन्होंने भी अपने चिर-परिचित अंदाज में उदयपुर की जनता का अभिवादन किया। उनकी प्रत्येक रचना और व्यंग्यात्मक पंक्तियों पर दर्शक ठहाके लगाने लगे। लोढ़ा ने अपनी कविताओं के माध्यम से संस्कृति, इतिहास और दैनिक जीवन के विभिन्न पहलुओं को जीवंत किया। हास्य और व्यंग्य के अनूठे अंदाज ने श्रोताओं को देर तक बांधे रखा।
संजय झाला ने पारिवारिक रिश्तों पर खूब बटोरी तालियां
काव्य पाठ का आगाज दौसा के कवि संजय झाला ने अपने अनूठे अंदाज में किया। उन्होंने परिवार के विभिन्न रिश्तों और उनकी अहमियत को हास्य के पुट के साथ प्रस्तुत करते हुए कहा भाई की हंसी ताकत सवाई है, बहन की हंसी मजबूत कलाई है, पिता की हंसी बच्चों की कमाई है, मां की हंसी प्रभु की प्रभुताई है, बच्चों की हंसी पीर की भुलाई है, बेटी की हंसी बाप की दवाई है, प्रेमिका की हंसी हवा हवाई है, लुगाई की हंसी जेब की सफाई है। इन पंक्तियों पर दर्शकों ने जमकर ठहाके लगाए और तालियों से कवि का उत्साहवर्धन किया।
विष्णु सक्सेना की प्रेम कविताओं ने बांधा समां
हाथरस के प्रसिद्ध कवि डॉ. विष्णु सक्सेना ने अपनी भावपूर्ण रचनाओं से श्रोताओं के दिलों को छुआ। उन्होंने प्रेम और रिश्तों की गहराई को अभिव्यक्त करते हुए कहा जो हाथ थाम लो वो फिर न छूटने पाए, प्यार की दौलतें कोई न लूटने पाए, जब भी छुओ बुलंदियां तो ध्यान ये रखना, जमीं से पांव का रिश्ता न टूटने पाए। उनकी रचनाओं पर श्रोताओं ने खूब दाद दी। उन्होंने बेटियों के महत्व और समाज में उनके सम्मान को भी अपनी कविताओं के माध्यम से प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत किया।
शशि श्रेया के श्रृंगार रस ने दर्शकों को किया मंत्रमुग्ध
लखनऊ से आई श्रृंगार रस की कवयित्री शशि श्रेया ने अपनी भावपूर्ण और प्रभावशाली प्रस्तुतियों से मंच पर अलग ही रंग जमाया। उन्होंने प्रेम की संवेदनाओं को शब्दों में पिरोते हुए कहा रेत पर नाम लिखने से क्या फायदा, एक आई लहर, कुछ बचेगा नहीं। तुमने पत्थर का दिल हमको कह तो दिया, पत्थरों पर लिखोगे, मिटेगा नहीं। उनकी एक के बाद एक प्रस्तुतियों ने दर्शकों को भावनाओं के विभिन्न रंगों से रूबरू कराया और खूब तालियां बटोरीं।
जगदीश सोलंकी की वीर रस की कविताओं ने जगाया देशभक्ति का जज्बा।
कोटा के वीर रस के कवि जगदीश सोलंकी ने अपनी ओजस्वी रचनाओं से पूरे पांडाल में देशभक्ति का माहौल बना दिया। उन्होंने मां की ममता और भारतीय सैनिकों के अदम्य साहस को शब्दों में पिरोते हुए कहा मां तेरी दुआ के दम से, आंचल की हवा के हृदय से, बर्फीली चट्टानों पर बारूद को उगाया है। परिंदा भी जहां पर नहीं मार सके, उस जगह जाकर भी तिरंगा फहराया है। इन पंक्तियों ने श्रोताओं को भावुक कर दिया। दर्शक अपनी जगह पर खड़े होकर भारत माता की जय के उद्घोष करने लगे। पूरा पांडाल देशभक्ति के नारों से गूंज उठा।
राव अजातशत्रु ने मेवाड़ की गौरवगाथा को किया जीवंत
मेवाड़ के सपूत और सूत्रधार कवि राव अजातशत्रु ने अपनी रचनाओं के माध्यम से मेवाड़ के गौरवशाली इतिहास, वीरता और स्वाभिमान को प्रभावशाली अंदाज में प्रस्तुत किया। उनकी ओजपूर्ण पंक्तियों ने श्रोताओं में मेवाड़ी होने का गर्व और गौरव का भाव भर दिया। उन्होंने मेवाड़ की अस्मिता और वीरांगना पद्मिनी के जौहर की परंपरा का उल्लेख करते हुए अपनी कविता से दर्शकों को भावविभोर किया। उनकी प्रस्तुति पर पांडाल तालियों से गूंज उठा।
चेतन चर्चित की हास्य कविताओं ने लगाए ठहाके।
नई दिल्ली से आए हास्य कवि चेतन चर्चित ने अपनी हास्य रचनाओं से दीपावली मेले में हंसी की फुलझड़ियां छोड़ दीं। उन्होंने जीवन की चुनौतियों और सकारात्मक सोच को अपनी कविता में पिरोते हुए कहा हर महफिल में हंसते गाते रहना है, हमको अपना दर्द छुपाते रहना है। अंधियारे के पांव नहीं टिकने देना, सबके दर पे दीप जलाते रहना है। उनकी हास्यपूर्ण और व्यंग्यात्मक प्रस्तुति पर दर्शक देर तक हंसते रहे। तालियों की गड़गड़ाहट से पूरा निगम प्रांगण गूंजायमान हो उठा।
कवि सम्मेलन में कवि शैलेश लोढ़ा, जगदीश सोलंकी, विष्णु सक्सेना, राव अजातशत्रु, संजय झाला, शशि श्रेया एवं चेतन चर्चित ने अपनी शानदार प्रस्तुतियों से श्रोताओं को मंत्रमुग्ध किया। हास्य, वीर रस, श्रृंगार और साहित्य के विविध रंगों से सजी इस काव्य संध्या ने दीपावली मेले की सातवीं शाम को यादगार बना दिया।