इलाज से मिले कदम, अब उन्हीं कदमों से मंडप तक पहुंचेंगे 51 जोड़े

नारायण सेवा संस्थान में 47वां दिव्यांग एवं निर्धन सामूहिक विवाह समारोह
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Narayan Seva Sansthan Mass Wedding

 

Udaipur Times, Narayan Seva Sansthan, Mass Wedding:  कभी किसी ने चलने का सपना देखा था, किसी ने अपने हाथों से काम करने का। किसी के लिए जीवनसाथी मिलना सबसे बड़ा सपना था, तो किसी के लिए अपना घर बसाना। उपचार, कृत्रिम अंग और आत्मनिर्भरता की राह से गुजरने के बाद अब 51 दिव्यांग एवं निर्धन जोड़े विवाह मंडप तक पहुंचेंगे।

नारायण सेवा संस्थान के सेवा महातीर्थ, बड़ी परिसर में 19 और 20 सितंबर को 47वां दिव्यांग एवं निर्धन सामूहिक विवाह समारोह आयोजित होगा। देश के विभिन्न राज्यों से चयनित 102 युवक-युवतियां 51 जोड़ों के रूप में वैदिक मंत्रोच्चार के बीच सात फेरे लेकर गृहस्थ जीवन की शुरुआत करेंगे। शुक्रवार को विवाह समारोह का लोगो संस्थान अध्यक्ष प्रशांत अग्रवाल, निदेशक पलक अग्रवाल, मीडिया प्रभारी विष्णु शर्मा हितैषी और जनसम्पर्क प्रमुख भगवान प्रसाद गौड़ ने जारी किया।

कोई हाथों से वंचित है, कोई पैरों से, कोई दृष्टिबाधित तो कोई श्रवण-वाक् बाधित। लेकिन इनकी कहानी दिव्यांगता पर खत्म नहीं होती। अनेक वर-वधू ऐसे हैं, जिनका निःशुल्क ऑपरेशन, कृत्रिम अंग अथवा सहायक उपकरण और कौशल प्रशिक्षण नारायण सेवा संस्थान में हुआ। अब उसी संस्थान में उनके जीवन का एक नया अध्याय शुरू होगा।

पहले पुनर्वास, फिर रोजगार और अब परिवार

दिव्यांगता के साथ आर्थिक अभाव और सामाजिक पूर्वाग्रह जुड़ जाएं तो विवाह की राह और कठिन हो जाती है। परिवारों के सामने आर्थिक बोझ, समाज की झिझक, उपयुक्त जीवनसाथी की तलाश और विवाह के बाद जीवन चलाने की चिंता जैसे सवाल खड़े रहते हैं।

नारायण सेवा संस्थान ने सामूहिक विवाह को केवल विवाह आयोजन तक सीमित नहीं रखा, बल्कि इसे पुनर्वास से परिवार निर्माण तक की सामाजिक पहल के रूप में विकसित किया है। उपचार और कृत्रिम अंगों के साथ कौशल प्रशिक्षण, आजीविका मार्गदर्शन, उपयुक्त जोड़ी का चयन, विवाह की व्यवस्था और विवाह के बाद गृहस्थी बसाने में सहयोग दिया जाता है।

संस्थान के अध्यक्ष प्रशांत अग्रवाल के अनुसार, पिछले 22 वर्षों में 2,582 दिव्यांग युवक-युवतियों के विवाह संपन्न कराए जा चुके हैं। उनका कहना है कि दिव्यांगजनों को दया का पात्र नहीं, बल्कि सम्मान और अवसर का अधिकारी मानना इस पहल का मूल उद्देश्य है।

सात फेरों के साथ मिलेगी नई गृहस्थी

नवदंपतियों को विवाह के बाद किसी तरह की आर्थिक कठिनाई न हो, इसके लिए संस्थान की ओर से आवश्यक गृहस्थी सामग्री भी उपलब्ध कराई जाएगी। इसमें पलंग, गद्दा, तकिए, कंबल, चादर, अलमारी, गैस चूल्हा-सिलेंडर, किचन सेट, प्रेशर कुकर, तवा-कढ़ाई, पंखा, सिलाई मशीन, ट्रॉली बैग सहित दैनिक उपयोग की सामग्री शामिल है। जरूरत के अनुसार व्हीलचेयर और अन्य सहायक उपकरण भी दिए जाएंगे।

यह पहल इस सोच पर आधारित है कि विवाह के सात फेरे तभी सार्थक हैं, जब उनके बाद जीवन को अपने पैरों पर खड़ा होने का अवसर भी मिले।

दिव्यांगता से पहचान नहीं, संभावनाओं से पहचान

दो दिवसीय समारोह वैदिक परंपरा, मंत्रोच्चार, भजन-कीर्तन और सांस्कृतिक कार्यक्रमों के साथ होगा। देश-विदेश से अतिथि, संत-महात्मा, समाजसेवी, जनप्रतिनिधि और दानदाता नवदंपतियों को आशीर्वाद देने पहुंचेंगे। कई अतिथि कन्यादान में सहभागी बनेंगे।

नारायण सेवा संस्थान का यह आयोजन इसी व्यापक सोच को सामने रखता हैदिव्यांगता किसी व्यक्ति की मंजिल नहीं, जीवन की एक परिस्थिति है। सही अवसर मिले तो इलाज से मिले कदम रोजगार तक, रोजगार से आत्मनिर्भरता तक और आत्मनिर्भरता से अपने परिवार की जिम्मेदारी तक पहुंच सकते हैं।

19 सितंबर को जब इन 51 जोड़ों की हल्दी और मेहंदी की रस्में होगी, और 20 सितंबर को विवाह मंडप में सात फेरे होंगे, तो यह केवल 51 परिवारों के जुड़ने का अवसर नहीं होगा; यह उन सामाजिक दीवारों को भी चुनौती देगा, जो दिव्यांगता को अक्सर व्यक्ति की क्षमता से बड़ी मान लेती हैं।

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