श्रीनाथजी मंदिर में धुलंडी पर निकली ‘बादशाह की सवारी’

यह परंपरा मुगल बादशाह औरंगज़ेब से जुड़ी एक लोककथा पर आधारित मानी जाती है
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Badshah ki savari

राजसमंद 4 मार्च 2026। नाथद्वारा स्थित श्रीनाथजी मंदिर में धुलंडी के अवसर पर वर्षों पुरानी परंपरा के तहत सोमवार को “बादशाह की सवारी” हर्षोल्लास के साथ निकाली गई। 

परंपरा के अनुसार एक व्यक्ति को मुगल वेशभूषा पहनाकर, नकली दाढ़ी-मूंछ और आंखों में काजल लगाकर पालकी में विराजित किया गया। मंदिर मंडल ने बैंड-बाजों के साथ सवारी की अगवानी की। सवारी मंदिर की परिक्रमा करती हुई मुख्य द्वार तक पहुंची, जहां श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ पड़ी।

मंदिर पहुंचने पर सूरजपोल की नौ सीढ़ियों को दाढ़ी से साफ करने की रस्म अदा की गई। इसके पश्चात मंदिर मंडल की ओर से ‘बादशाह’ को वस्त्र एवं आभूषण भेंट किए गए, जबकि उपस्थित श्रद्धालुओं ने प्रतीकात्मक रूप से उसे खरी-खोटी सुनाकर परंपरा का निर्वहन किया।

यह परंपरा मुगल बादशाह औरंगज़ेब से जुड़ी एक लोककथा पर आधारित मानी जाती है। मान्यता है कि मंदिर में प्रवेश करते ही उसकी दृष्टि चली गई थी और क्षमायाचना के बाद ही वापस लौटी। पश्चाताप स्वरूप उसने मंदिर की सीढ़ियां साफ की थीं। बाद में उसकी माता द्वारा ठाकुरजी को बहुमूल्य रत्न भेंट किए जाने की भी लोकश्रुति प्रचलित है।

धुलंडी के दिन यह अनूठी परंपरा आज भी उसी श्रद्धा और उत्साह के साथ निभाई जाती है, जिसे देखने देशभर से श्रद्धालु नाथद्वारा पहुंचते हैं।

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