बुजुर्गों पर कोरोना की मार पर आधारित नाटक 'ये रास्ते हैं प्यार के' का हुआ मंचन


बुजुर्गों पर कोरोना की मार पर आधारित नाटक 'ये रास्ते हैं प्यार के' का हुआ मंचन

इला अरुण और केके रैना के अभिनय ने दर्शकों का जीता मन

 
yeh raste hai pyar ke

लेकसिटी में थियेटर फेस्टिवल का अंतिम दिन

उदयपुर 7 मार्च 2022 । प्रभा खेतान फाउंडेशन के अहसास महिला समूह की ओर से आयोजित तीन दिवसीय थियेटर फेस्टिवल के अंतिम दिन सोमवार को केके रैना द्वारा निर्देशित और इला अरुण द्वारा रचित ये  रास्ते है प्यार के नाटक का मंचन किया गया। 

अहसास महिला समूह की श्रद्धा मुर्डिया ने बताया नाटक  गहरी अंतर्दृष्टि और परिपक्वता से परिपूर्ण है। यह नाटक बुजुर्ग पीढ़ी पर कोरोना महामारी के प्रभाव को दर्शाता है। बुढ़ापे में व्यक्ति अपने जीवन के सबसे सर्वश्रेष्ठ समय को बिताने तथा अपनी सभी इच्छाओं को पूरी करने की कल्पना करता है। जो कोरोना महामारी के द्वारा छिन्न-भिन्न कर दी गई है। महामारी के जोखिम ने उन्हें दोहरा एहसास करा दिया है कि उनकी दौड़ समय के विरुद्ध है।  

यह कहानी एक वृद्ध महिला एवं वृद्ध पुरुष की है जो महामारी के चलते बाहरी दुनिया से कट गए हैं तथा जो फोन कॉल के माध्यम से ही लोगों के संपर्क में रह रहे है। इन दोनों व्यक्तियों ने एक दूसरे को ढूंढा और पाया कि कोरोना महामारी के समय प्रतिबंधों में ढील के दौरान पार्क में घूमना अपनी नीरस एवं  अकेलेपन से भरी जिंदगी से बाहर आना है। पार्क में घूमना उनके लिए नई संभावनाएं लेकर आया जिससे उन शारीरिक और मानसिक समस्याओं से बाहर आए जिनसे वो गुजर रहे थे। इस सफर में इन दोनों ने एक दूसरे को जाना जिसे वो 'ये रास्ते हैं प्यार के' कहते हैं। 

नाटक में मशहूर अभिनेता इला अरुण, के के रैना एवं विक्रांत मिश्रा ने अपनी भूमिका निभाई है। उदयपुर की अहसास महिलाएं स्वाति अग्रवाल, श्रद्धा मुर्डिया, मूमल भंडारी, कनिका अग्रवाल, रिद्धिमा दोशी और शुभ सिंघवी उदयपुर में इस उत्सव की मेजबानी की।

संभागीय आयुक्त ने भी तल्लीनता से देखा नाटक

संभागीय आयुक्त राजेंद्र भट्ट ने थियेटर फेस्टिवल के अंतिम दिन नाटक का मंचन तल्लीनता से देखा। इसके साथ ही उदयपुर एसीबी के डीआईजी राजेन्द्र प्रसाद गोयल भी थियेटर उत्सव पहुंचे और उन्होंने भी नाटक का मंचन देख प्रसन्नता जताई।

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