रेपरिया बालम बैंड एवं फकीरा खान के मस्ती भरे नगमों ने बढ़ाई दीपावली मेले की रौनक
Udaipur Times, Event: उदयपुर नगर निगम द्वारा आयोजित दीपावली मेला 2026 की रंगत गुरुवार को और बढ़ गई। दीपावली मेला संयोजक प्रमोद सामर ने बताया कि टाउन हॉल में दीपावली मेले की दूसरी शाम मस्ती भरे नगमो के दीवानों के नाम रही।
रेपरिया बालम के राजस्थानी लोकगीतों और फ्यूजन ने बांधा समां।
मेला संयोजक प्रमोद सामर ने बताया कि नगर निगम उदयपुर द्वारा आयोजित विश्वप्रसिद्ध दीपावली मेले में गुरुवार को आयोजित सांस्कृतिक संध्या में प्रसिद्ध राजस्थानी गायक एवं शूरवीर फेम रेपरिया बालम ने अपनी शानदार प्रस्तुतियों से समां बांध दिया। देशभक्ति के हिंदी गीतों, राजस्थानी लोकगीतों और फ्यूजन संगीत के अनूठे संगम ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। उनकी प्रस्तुतियों पर मेलार्थियों ने जमकर तालियां बजाईं और उत्साह के साथ कलाकार का स्वागत किया।
रेपरिया बालम का वास्तविक नाम अशोक मंडा है। श्रीगंगानगर जिले के रायसिंहनगर क्षेत्र से जुड़े रेपरिया बालम राजस्थानी लोकसंगीत को आधुनिक फ्यूजन के साथ प्रस्तुत करने के लिए विशेष पहचान रखते हैं। युवा दिलों में लोकप्रिय रेपरिया बालम ने मंच पर आते ही अपने चर्चित गीत ‘मारो राजस्थान’ से अतिथियों एवं मेलार्थियों का स्वागत किया। इसके बाद ‘लाल पीली अखियां’, ‘बन्ना जी रॉबिन हुड’ और ‘इलायची’ सहित कई लोकप्रिय गीतों की प्रस्तुति देकर दर्शकों की खूब वाहवाही लूटी। रेपरिया बालम ने अपने गीतों के माध्यम से राजस्थान की संस्कृति, वीरता और गौरवशाली परंपराओं को भी प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत किया।
महाराणा प्रताप की शौर्यगाथा पर आधारित उनके गीत ने वीरता और स्वाभिमान की भावना को स्वर दिया। ‘शूरवीर’ श्रृंखला से जुड़ा उनका यह गीत महाराणा प्रताप के पराक्रम को समर्पित है। इस गीत को मिर्जापुर फिल्म में सम्मिलित कर दिए गया था जिसको लेकर फिल्म में इसके उपयोग के संबंध में कानूनी विवाद भी सामने आया ओर फिर इसे हटाना पड़ा। ‘काच केरी’, ‘बन्ना थे जयपुरियो ते जायजो जी’ जैसे गीतों से लोकप्रियता हासिल करने वाले रेपरिया बालम राजस्थानी लोकगीतों को नई पीढ़ी तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। पारंपरिक लोकधुनों में आधुनिक संगीत का समावेश कर वे राजस्थानी संगीत को व्यापक पहचान दिलाने का प्रयास कर रहे हैं।
दीपावली मेले की सांस्कृतिक संध्या में उनकी प्रस्तुतियों ने राजस्थान की लोकसंस्कृति, वीर परंपरा और संगीत की मिठास से वातावरण को सराबोर कर दिया।
मांगणियार ग्रुप ने छोड़ी दिलो में छाप
नगर निगम द्वारा आयोजित दीपावली मेले के सांस्कृतिक कार्यक्रमों में गुरुवार को एक से बढ़कर एक प्रस्तुतियां दी गई। कार्यक्रम में बाड़मेर राजस्थान के फकीरा खान मंगनियार कलाकारो ने राजस्थानी गानों में ऐसी प्रस्तुति दी की दर्शक भाव विभोर होकर झूमने लगे। 30 कलाकारों द्वारा एक से बढ़कर एक राजस्थानी गानों को गाकर मंत्र मुग्ध कर दिया। ग्रुप द्वारा मंच से शुरुवात मां करणी के गीत गाकर दी जिस पर दर्शकों ने तालियों से पूरे मेले को गुंजायमान कर दिया। फकीरा के मां करणी के भजन से मेले में भक्तिमय माहौल बन गया। भजन के बाद फकीरा ने उपस्थित दर्शकों का स्वागत वारी जाऊ रे बलिहारी जाऊ रे एवं केसरिया बालम आवो नि पधारो म्हारे देश आदि गीत गाकर किया। ग्रुप में उपस्थित कलाकारों ने आवो आवो आवो मेरे कृष्ण कन्हैया आवो, ठरकी छोकरा, बापू सेहत के लिए तू तो हरिकारक है आदि गीत गाकर दर्शकों को अचंभित कर दिया।
पीढ़ी दर पीढ़ी विरासत को लगातार आगे बढ़ा रहे है फकीरा
नगर निगम मेले में अपनी प्रस्तुति देने आए फकीरा खान ने अपनी बात करते हुए कहा है कि राजस्थानी संस्कृति को पीढ़ी दर पीढ़ी आगे बढ़ना ही हमारा मुख्य उद्देश्य है। हमारे परिवार के बच्चों को पढ़ाई के साथ-साथ राजस्थानी संस्कृति और पारंपरिक गीत सीखते है। इसी गीतों को हम जिंदा रखने के लिए गायकी का अध्ययन करवाते हैं जिससे हमारी पीढ़ियों की परंपरा जो चली आ रही है उसे हम हमेशा के लिए कायम रख सके। ग्रुप में लगभग 100 से भी अधिक सदस्य इस कला को जीवंत रखने के लिए प्रयासरत है। वही उदयपुर में अपने 30 सदस्यों के साथ फकीरा खान ने बेहतरीन प्रस्तुति देकर मेले में उपस्थित दर्शकों का मनोरंजन किया। राजस्थानी गीतों ने मेले को पूरी तरह मेवाड़ ओर मारवाड़ की हवाओं को एक कर दिया।
मांगणियार राजस्थान के जैसलमेर और बाड़मेर जिलों में रहने वाला एक मुस्लिम समुदाय है, जो पारंपरिक लोक संगीत के लिए प्रसिद्ध है। ये पेशेवर संगीतकार हैं जो पीढ़ियों से राजपूतों और धनी व्यापारियों के संरक्षण में रहे हैं, और उनके गीत मौखिक इतिहास के रूप में पीढ़ी दर पीढ़ी चले आ रहे हैं। मंगणियार अपनी वेशभूषा, वाद्ययंत्रों जैसे कमैचा और खरताल, और सूफी संगीत के लिए जाने जाते हैं।