पीले रंग में रचा उम्मीदों का उत्सव

गणपति स्थापना संग शुरू हुआ 45वां दिव्यांग सामूहिक विवाह

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Narayan Seva Sansthan
हर जोड़े की अपनी कहानी, संघर्ष से संवरते सपनों का संगम बना सेवा महातीर्थ

उदयपुर, 14 मार्च 2026। मानवता, करुणा और नए जीवन के सपनों से सराबोर वातावरण में नारायण सेवा संस्थान के सेवा महातीर्थ, लियों का गुड़ा परिसर में शनिवार को दो दिवसीय 45वां नि:शुल्क दिव्यांग एवं निर्धन युवक-युवतियों का सामूहिक विवाह समारोह श्रद्धा और उल्लास के साथ आरंभ हुआ। इस समारोह में 51 जोड़े सात फेरों के पवित्र बंधन में बंधेंगे, जिनमें 25 दिव्यांग और 26 सकलांग जोड़े शामिल हैं। देश के विभिन्न राज्यों से आए 700 से अधिक मेहमान इस मानवीय उत्सव के साक्षी बन रहे हैं।

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विवाह समारोह का शुभारंभ प्रातः शुभ मुहूर्त में गणपति स्थापना और गणपति वंदन नृत्य “घर में पधारो गजानंद जी” के साथ हुआ। इसके बाद हल्दी और मेहंदी की पारंपरिक रस्मों ने पूरे परिसर को उत्साह और मंगल भाव से भर दिया।

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प्रातः 11:15 बजे सभी 51 जोड़े पीले परिधान में पीले फूलों से सुसज्जित हाड़ा सभागार के मंच पर अपने निर्धारित स्थानों पर आसीन हुए। संस्थान के संस्थापक-चेयरमैन पद्मश्री कैलाश ‘मानव’, सहसंस्थापिका कमला देवी, अध्यक्ष प्रशांत अग्रवाल, निदेशक वंदना अग्रवाल और पलक अग्रवाल ने विशिष्ट अतिथियों के साथ गणपति स्थापना कर विवाह समारोह का विधिवत शुभारंभ किया।

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निदेशक वंदना अग्रवाल और पलक अग्रवाल के निर्देशन में अतिथियों ने जोड़ों को हल्दी और उसके बाद मेहंदी लगाने की रस्म निभाई। इस दौरान “आए है मेरी जिंदगी में बहार…, हल्दी लगाओ तेल चढ़ाओ री…, म्हारी मेहंदी को रंग…, श्याम नाम की मेहंदी…” जैसे गीतों पर अतिथियों ने उत्साह के साथ ठुमके लगाए और पूरा माहौल उत्सवमय हो उठा।

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समारोह में मुख्य अतिथि विजया कुमारी (दिल्ली), त्रिशाल शर्मा (साउथ अफ्रीका), महिराज (मॉरीशस) और प्रसन्न कुमार राउत (उड़ीसा) सहित सेवा मनीषियों का कैलाश ‘मानव’, प्रशांत अग्रवाल, जगदीश आर्य और देवेंद्र चौबीसा ने पगड़ी-उपरना और स्मृति चिन्ह भेंट कर सम्मान किया।

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पहले दिन की शाम महिला संगीत और नृत्य संध्या के नाम रही। वैवाहिक गीतों की मधुर धुनों के बीच राधा-कृष्ण रास नृत्य, रुद्रावतार हनुमान, दुर्गा के नव स्वरूप और अयोध्यापति श्रीराम पर आधारित नृत्य-नाटिकाओं ने उपस्थित जनों को भावविभोर कर दिया।

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संस्थान अध्यक्ष प्रशांत अग्रवाल ने बताया कि रविवार को प्रातः 11:15 बजे सभी जोड़े वैदिक विधि-विधान के साथ पवित्र अग्नि के सात फेरे लेकर दांपत्य जीवन में प्रवेश करेंगे। संस्थान की ओर से प्रत्येक जोड़े को गृहस्थ जीवन के लिए आवश्यक सामग्री उपहार स्वरूप प्रदान की जाएगी।

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हर जोड़ा एक कहानी, हर कहानी एक प्रेरणा

इस सामूहिक विवाह की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि यहां शामिल हर जोड़ा अपने साथ संघर्ष, साहस और उम्मीद की एक अलग कहानी लेकर आया है। किसी ने शारीरिक चुनौतियों के बावजूद जीवन से हार नहीं मानी, तो किसी ने सामाजिक और आर्थिक कठिनाइयों के बीच भी अपने सपनों को जिंदा रखा। इन जोड़ों की कहानियां केवल विवाह की रस्म नहीं, बल्कि समाज को यह संदेश देती हैं कि जीवन की सीमाएं नहीं, बल्कि हौसला इंसान की असली पहचान होता है। यही कारण है कि यह सामूहिक विवाह समारोह केवल एक आयोजन नहीं, बल्कि मानवता, आत्मविश्वास और नए जीवन की शुरुआत का उत्सव बन जाता है।

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