पारंपरिक गुजराती गरबा के रंग में रंगा उदयपुर, सीख रहे ऑथेंटिक गरबा की बारीकियां
Udaipur Times, Garba Event: झीलों की नगरी उदयपुर में इन दिनों धवल वस्त्र, एक लय के साथ उठते कदम, हाथों की सटीक मुद्राएं और संगीत की ताल पर झूमते गरबा प्रेमी पारंपरिक गुजराती गरबा का एक अद्भुत दृश्य देखने को मिल रहा है।
बॉलीवुड कोरियोग्राफी के शोर-शराबे से इतर, गरबा के मूल और सांस्कृतिक स्वरूप को पुनर्जीवित करने के उद्देश्य से ‘रास रसिया’ के बैनर तले एक विशेष प्रशिक्षण शिविर का आयोजन किया जा रहा है। उदयपुर में पहली बार लगभग 200 प्रतिभागी एक साथ ऑथेंटिक गुजराती गरबा की बारीकियां सीख रहे हैं।
इस सांस्कृतिक पहल की कमान उदयपुर की कत्थक नृत्यांगना निमिषा भाटी, प्रियांशी जोशी और निखिल सावरिया ने संभाली है। तीनों की टीम ने उदयपुर में गरबा को महज फिल्मी गानों पर आधारित मनोरंजन से आगे ले जाकर उसकी पौराणिक शैली, लयबद्धता और पारंपरिक भाव से लोगों को जोड़ने का सार्थक प्रयास किया है। यहाँ गुजराती गरबा सीखने का क्रेज इतना जबरदस्त है कि हर उम्र के लोग पूरे उत्साह के साथ इसका हिस्सा बन रहे हैं।
दो ताली से लेकर डोडिया और हींच तक: सीख रहे पारंपरिक विधाएं
इस विशेष प्रशिक्षण में प्रतिभागियों को केवल स्टेप्स नहीं, बल्कि गरबा के वास्तविक फ्लो और तकनीक से परिचित कराया जा रहा है। शिविर में पारंपरिक गुजराती गरबा के विभिन्न स्वरूपों जैसे दो ताली, तीन ताली, डोडिया और हींच का सघन अभ्यास कराया जा रहा है।
इसके साथ ही गरबा की गरिमा को बनाए रखते हुए विभिन्न ट्रांजिशन्स, बारीक फुटवर्क, समूह पैटर्न्स और कंपोजिशन्स पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। कभी दो कदम आगे तो कभी दो कदम पीछे हटते कदमों की तालमेल से गरबा की वास्तविक खूबसूरती साकार हो रही है।
आयोजकों का कहना है कि गरबा केवल शारीरिक संचालन या नृत्य नहीं, बल्कि यह संगीत, लय, परंपरा और सामूहिक उत्सव का प्रतीक है। इस पहल का मुख्य ध्येय युवा पीढ़ी को बॉलीवुड स्टाइल के प्रभाव से निकालकर गरबा के मूल और शुद्ध स्वरूप से जोड़ना है।
'नवरंग नवरात्रि' में दिखेगा सीखा हुआ हुनर
'रास रसिया' का यह प्रशिक्षण केवल कक्षाओं तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि नवरात्रि के पावन पर्व पर इसका भव्य रूप देखने को मिलेगा। इस प्रशिक्षण के बाद प्रतिभागियों के इसी अनुभव को नौ दिनों तक चलने वाले 'नवरंग नवरात्रि' उत्सव के रूप में आगे बढ़ाया जाएगा।
ट्रेनिंग का हिस्सा बने सभी 200 प्रतिभागियों को 'नवरंग नवरात्रि' के पास निःशुल्क उपलब्ध कराए जाएंगे, ताकि वे नवरात्रि के नौ दिनों के दौरान अपनी सीखी हुई पारंपरिक कला और लयबद्धता का जीवंत प्रदर्शन कर सकें। उदयपुर के सांस्कृतिक परिदृश्य में ऑथेंटिक गुजराती गरबा को इस स्तर पर स्थापित करने की यह पहल शहर के कला और संस्कृति प्रेमियों के बीच खासी चर्चा का केंद्र बनी हुई है।