उदयपुर के सिटी पैलेस म्यूजियम मे 19वीं सदी की दुर्लभ तस्वीरों की अंतरराष्ट्रीय प्रदर्शनी

 | 
Exhibition at City Palace Museum Udaipur

 

Udaipur Times, Exhibition: मेवाड़ की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत, ऐतिहासिक स्थापत्य और फोटोग्राफी के पुराने इतिहास को एक साथ प्रस्तुत करने वाली अंतरराष्ट्रीय प्रदर्शनी ‘अर्ली फोटोग्राफी एंड आर्कियोलॉजी इन वेस्टर्न इंडिया: द उदयपुर चैप्टर’ का आज सिटी पैलेस म्यूज़ियम, उदयपुर में शुभारंभ हुआ।

ज़नाना महल स्थित फतेह निवास गैलरी में आयोजित यह प्रदर्शनी ब्रिटिश लाइब्रेरी, लंदन; छत्रपति शिवाजी महाराज वास्तु संग्रहालय (सी.एस.एम.वी.एस.), मुंबई तथा महाराणा मेवाड़ चैरिटेबल फाउण्डेशन के सिटी पैलेस संग्रहालय, उदयपुर के संयुक्त प्रयासों का परिणाम है।

इस अवसर पर डॉ. लक्ष्यराज सिंह मेवाड़ ने कहा, “यह प्रदर्शनी मेवाड़ की उस परंपरा की निरंतरता है, जिसमें पीढ़ियों से इतिहास, संस्कृति और धरोहर को संजोने का कार्य किया जाता रहा है। इन तस्वीरों में केवल बीते समय की छवियाँ नहीं, बल्कि हमारी सामूहिक स्मृतियाँ समाहित हैं। ये हमें उन लोगों, स्थानों, परंपराओं और जीवन के क्षणों से जोड़ती हैं, जिन्होंने मेवाड़ की सांस्कृतिक पहचान को आकार दिया है। हमारा फोटोग्राफिक अभिलेख अतीत का दस्तावेज़ मात्र नहीं, बल्कि हमारी जीवंत विरासत का महत्वपूर्ण हिस्सा है।”

ब्रिटिश लाइब्रेरी के अंतरिम मुख्य कार्यकारी डॉ. जेरेमी सिल्वर ने कहा कि यह सहयोग ऐतिहासिक संग्रहों को व्यापक दर्शक वर्ग तक पहुँचाने और सांस्कृतिक विरासत के महत्व के प्रति जागरूकता बढ़ाने का अवसर प्रदान करता है।

वहीं, सी.एस.एम.वी.एस., मुंबई के महानिदेशक सब्यसाची मुखर्जी ने इस पहल को संस्थागत सहयोग का सशक्त उदाहरण बताते हुए कहा कि ऐतिहासिक तस्वीरें साझा करना इतिहास को समझने और विभिन्न संस्थानों के बीच सांस्कृतिक संबंधों को मजबूत करने का माध्यम हैं।

फाउण्डेशन के मुख्य कार्यकारी अधिकारी ने बताया कि 15 अक्टूबर 2026 से 31 मार्च 2027 तक दर्शकों के लिए खुली रहने वाली इस प्रदर्शनी में ब्रिटिश लाइब्रेरी और सिटी पैलेस म्यूज़ियम के संग्रहों से चयनित दुर्लभ ऐतिहासिक तस्वीरें प्रदर्शित की गई हैं। ब्रिटिश लाइब्रेरी की ओर से इसके उद्घाटन अवसर पर संग्रह निदेशक डॉ. लुइसा एलेना मेंगोनी तथा दृश्य कला अनुभाग की प्रमुख डॉ. मालिनी रॉय उपस्थित रहीं। प्रदर्शनी में 1850 से 1890 के दशक के बीच खींचे गए चित्र शामिल हैं, जो अजंता, एलोरा, नासिक, हम्पी, सोमनाथ सहित पश्चिमी भारत के अनेक महत्वपूर्ण ऐतिहासिक एवं पुरातात्त्विक स्थलों की तत्कालीन स्थिति को दर्शाते हैं।

इन तस्वीरों के विशेष प्रिंट शांतिनिकेतन के स्टूडियो गोप्पो द्वारा 19वीं शताब्दी की सॉल्टेड पेपर और एल्ब्यूमेन प्रिंटिंग प्रक्रियाओं का उपयोग करके तैयार किए गए हैं, जिससे दर्शक इन ऐतिहासिक छवियों को उनके मूल काल के निकट अनुभव कर सकेंगे।

मेवाड़ और फोटोग्राफी की ऐतिहासिक परंपरा: उदयपुर संस्करण की विशिष्टता इसमें निहित है कि यह मेवाड़ को अपनी कथा के केंद्र में रखता है। प्रदर्शनी में सिटी पैलेस, झीलों, मंदिरों, उद्यानों, प्रवेश द्वारों, गलियों और स्थापत्य स्मारकों के साथ-साथ मेवाड़ राजदरबार के लोगों, समारोहों और सांस्कृतिक जीवन की दुर्लभ तस्वीरें भी शामिल हैं।

मेवाड़ में फोटोग्राफी का इतिहास कैमरे के भारत आगमन से भी पहले की एक रोचक परंपरा से जुड़ा है। ऐतिहासिक अभिलेखों के अनुसार, वर्ष 1818 में मेवाड़ दरबार में कैमरा ऑब्स्क्यूरा जैसे प्रकाशीय उपकरण का उपयोग किया जाता था। कर्नल जेम्स टॉड ने अपनी पुस्तक ट्रैवल्स इन वेस्टर्न इंडिया में महाराणा भीम सिंह के शासनकाल के दौरान कुँवर अमर सिंह को इस उपकरण के बारे में जानकारी देने का उल्लेख किया है।

महाराणा स्वरूप सिंह और महाराणा सज्जन सिंह के शासनकाल में फोटोग्राफी ने मेवाड़ के राजदरबार के जीवन में महत्वपूर्ण स्थान प्राप्त किया। विभिन्न भारतीय, स्थानीय और अन्य फोटोग्राफरों के माध्यम से राजपरिवार, स्थापत्य, समारोहों तथा सांस्कृतिक परंपराओं का दस्तावेज़ीकरण हुआ। पीढ़ियों से संरक्षित इन तस्वीरों ने आज मेवाड़ के इतिहास और बदलते शहरी परिदृश्य का अमूल्य दृश्य अभिलेख तैयार किया है।

Follow UdaipurTimes on Facebook , Instagram , and Google News