अब बिना पंजीकरण नहीं बेच सकेंगे दूध
उदयपुर 29 अप्रैल 2026। दूध व्यवसाय में मिलावटखोरी रोकने के लिए भारतीय खाद्य संरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (FSSAI) ने शहर के सभी छोटे बड़े दूध विक्रेताओं, डेयरी यूनिट और उत्पादकों के लिए रजिस्ट्रेशन या लाइसेंस अनिवार्य कर दिया है। बिना पंजीकरण दूध बेचने पर कार्रवाई, जुर्माना और दुकान सील तक की जा सकती है।
विशेषज्ञों के अनुसार सबसे ज़्यादा जोखिम खुले दूध में होता है, जो बिना ब्रांडिंग और पैकेजिंग के सीधे उपभोक्ताओं तक पहुँचता है। शहर में हज़ारो लीटर खुला दूध सप्लाई होता है। नए नियमो के बाद हर सप्लायर की पहचान और रिकॉर्ड विभाग के पास रहेगा जिससे मिलावट करने वालो पर नियंत्रण संभव होगा। शहर में बड़ी संख्या में डेयरी व्यवसाय असंगठित है जिनमे से कई अब तक किसी भी पंजीकरण से बाहर है। नई व्यवस्था से मिलावट पर अंकुश लगेगा।
इस व्यवस्था के तहत छोटे और मध्यम डेयरी संचालको को बड़ी राहत मिली है। वहीँ 1.5 करोड़ रूपये तक के टर्नओवर वाले विक्रेताओं को 100 रूपये में रजिस्ट्रेशन कराना होगा। पहले यह रजिस्ट्रेशन सीमा करीब 12 लाख रूपये के टर्नओवर तक थी। 1.5 से 50 करोड़ तक स्टेट लाइसेंस और 50 करोड़ से अधिक पर सेंट्रल लाइसेंस अनिवार्य होगा।
वर्तमान में उदयपुर शहर में 400 से अधिक डेयरी संचालक और 700 से अधिक दूध विक्रेता सक्रीय रूप से कार्यरत है। इनमे से अधिकार छोटे और मध्यम स्तर के व्यवसायी है प्रतिदिन स्थानीय स्तर पर दूध सप्लाई करते है जिनका सालाना टर्नओवर 1.5 करोड़ से कम ही रहता है। नए नियमो के तहत यह कारोबारी केवल रजिस्ट्रेशन की श्रेणी में आते है। इससे उन्हें जटिल लाइसेंस प्रक्रिया से राहत मिलेगी।
अब लाइसेंस और रजिस्ट्रेशन की प्रक्रिया में निरंतर वैधता का प्रावधान लागू किया है। इसके तहत एक बार लाइसेंस प्रक्रिया पूरी होने के बाद यह 10 साल तक प्रभावी रहेगी बशर्ते व्यापारी सभी नियमो का पालन करे और हर साल आवश्यक जानकारी ऑनलाइन पोर्टल पर अपडेट करते रहे। इस बदलाव के बाद छोटे दूध व्यपारियो को हर साल रिन्युअल के लिए दफ्तरों के चक्कर नहीं काटने पड़ेंगे।
Source: Rajasthan Patrika
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