GMCH द्वारा आयोजित ‘कार्डियोनेक्स्ट–2026’ कॉन्फ्रेंस का सफल आयोजन

350 से अधिक चिकित्सकों और प्रतिभागियों ने लिया भाग 
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उदयपुर 13 अप्रैल 2026। गीतांजली मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल, कार्डियक साइंस सोसाइटी एवं API द्वारा आयोजित ‘कार्डियोनेक्स्ट–2026’ कॉन्फ्रेंस का सफल आयोजन, उदयपुर में संपन्न हुआ, जिसके अंतर्गत 350 से अधिक चिकित्सकों और प्रतिभागियों ने भाग लिया।

कार्यक्रम का शुभारंभ दीप प्रज्वलन के साथ किया गया, जिसमें अंकित अग्रवाल (एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर, गीतांजलि ग्रुप) के साथ IMA उदयपुर के अध्यक्ष डॉ. आनंद गुप्ता,हृदय रोग विभाग के HOD डॉ. रमेश पटेल प्रमुख रूप से उपस्थित रहे। उनके साथ हार्ट सर्जरी विभाग के HOD डॉ. संजय गांधी, डॉ. बी.एस. बॉम्ब, डॉ. डी.सी. कुमावत, डॉ. दिलीप जैन, डॉ. रोहित सैनी एवं डॉ. गौरव मित्तल भी मौजूद रहे।

इसके पश्चात अंकित अग्रवाल ने अपने संबोधन में बताया कि इस प्रकार की कॉन्फ्रेंस के माध्यम से कार्डियोलॉजी विभाग को नई दिशा और मजबूती मिलेगी तथा आधुनिक तकनीकों और विशेषज्ञता के साथ इसे और आगे बढ़ाया जाएगा।

कॉन्फ्रेंस के दौरान विभिन्न महत्वपूर्ण विषयों पर विस्तृत चर्चा की गई। प्रमुख आकर्षणों में डॉ. रोहित सैनी एवं डॉ. गौरव मित्तल द्वारा इको सिम्पोजियम, “लिपिड-हार्ट फेल्योर कंटिन्युअम” तथा “जटिल टैकीअरिदमिया के प्रबंधन” जैसे सत्र एवं जन्मजात हृदय रोगों के उपचार में आधुनिक इंटरवेंशनल तकनीकों की विस्तृत जानकारी दी गई।

कार्यक्रम के दौरान हृदय की संरचना (एनाटॉमी) को समझाने के लिए हार्ट स्पेसिमेन का लाइव प्रेजेंटेशन भी किया गया, जिसने उपस्थित चिकित्सकों और प्रतिभागियों को विषय की गहराई को व्यावहारिक रूप से समझने में महत्वपूर्ण मदद की।

कार्यक्रम का सबसे महत्वपूर्ण आकर्षण लीडलेस पेसमेकर पर विशेष सत्र रहा, जिसने उपस्थित चिकित्सकों के बीच खास रुचि उत्पन्न की। इसके पश्चात ईसीजी क्विज़ का आयोजन भी किया गया, जिसमें प्रतिभागियों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया।

डॉ. रमेश पटेल ने TAVI (ट्रांसकैथेटर एओर्टिक वाल्व इम्प्लांटेशन) के इंडिकेशन्स एवं आधुनिक उपचार पद्धतियों पर विशेष रूप से प्रकाश डाला। साथ ही कॉन्फ्रेंस में इस बात पर भी चर्चा हुई कि क्या चिकित्सक सामान्य जनसंख्या की तुलना में अधिक जोखिम में हैं और नियमित स्क्रीनिंग की आवश्यकता पर जोर दिया गया। वहीं “मेटाबॉलिक डिजीज को मोटापे के दृष्टिकोण से पुनर्विचार” विषय पर भी महत्वपूर्ण विचार प्रस्तुत किए गए।

डॉ. संजय गांधी (हार्ट सर्जरी विभाग के HOD)  ने एओर्टिक वाल्व रिप्लेसमेंट (AVR) मरीजों के लाइफटाइम मैनेजमेंट एवं नई तकनीकों के प्रभाव पर प्रकाश डाला।

डॉ. दिलीप जैन द्वारा “सर्जिकल स्किल और तकनीक का समन्वय” विषय पर चर्चा करते हुए एक रोचक डिबेट भी आयोजित की गई, जिसमें एक्यूट मायोकार्डियल इंफार्क्शन (हार्ट अटैक) के प्रबंधन में मेडिकल एवं इंटरवेंशनल तरीको पर विचार-विमर्श हुआ। यह कॉन्फ्रेंस न केवल चिकित्सकों के लिए ज्ञानवर्धक सिद्ध हुई, बल्कि हृदय रोगों के बेहतर प्रबंधन और जागरूकता की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम भी साबित हुई।

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