उदयपुर के MB हॉस्पिटल का कमाल: 5 साल की मासूम ने GBS जैसी खतरनाक बीमारी को दी मात

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Udaipur Times, Rajasthan Healthcare Update: 2 जून 2026। रवीन्द्रनाथ टैगोर मेडिकल कॉलेज से संबद्ध महाराणा भूपाल राजकीय चिकित्सालय के बाल चिकित्सालय ने चिकित्सा जगत में एक और बड़ी और ऐतिहासिक सफलता हासिल की है। राजसमंद जिले के निवासी ने बेहद गंभीर और दुर्लभ बीमारी गुलियन बेरी सिंड्रोम (GBS) से करीब 90 दिनों के लंबे और कड़े संघर्ष के बाद पूरी तरह स्वस्थ होकर नया जीवन प्राप्त किया है। बालिका को दोनों पैरों में कमजोरी की शिकायत के साथ अस्पताल लाया गया था, जहां डॉक्टरों ने तुरंत हरकत में आते हुए गुलियन-बैरी सिंड्रोम (GBS) का सटीक निदान किया। Guillain-Barré Syndrome (GBS)

बालिका की नाजुक हालत को देखते हुए उसे तत्काल बाल चिकित्सालय के पीडियाट्रिक इंटेंसिव केयर यूनिट (PICU) में भर्ती किया गया। बीमारी की गंभीरता के कारण मासूम को लंबे समय तक वेंटिलेटर सपोर्ट पर रखना पड़ा। दीर्घकालीन श्वसन सहायता की आवश्यकता को देखते हुए ENT विभाग द्वारा ट्रेकियोस्टॉमी (गले में श्वास नली बनाना) की गई। लगभग 80 दिनों तक PICU में चले सघन इलाज और नियमित फिजियोथेरेपी के साथ-साथ मांसपेशियों की रिकवरी के लिए अंडा, दूध एवं अन्य प्रोटीन युक्त पौष्टिक आहार भी निःशुल्क उपलब्ध कराया गया, जिसने इस रिकवरी में अत्यंत महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। Rajasthan Healthcare Update

मुख्यमंत्री आयुष्मान आरोग्य योजना के तहत 5.31 लाख रुपये का इलाज मुफ्त

उपचार के दौरान मुख्यमंत्री आयुष्मान आरोग्य (MAA) योजना के अंतर्गत लगभग 40 हजार रुपये प्रति वायल मूल्य की 5 डोज IVIG दवा (कुल कीमत लगभग 2 लाख रुपये) मरीजों को बिना किसी वित्तीय भार के पूरी तरह निःशुल्क दी गई। इस प्रकार पूरे उपचार के दौरान कुल 5 लाख 31 हजार 900 रुपये का पूरा खर्च सरकार और चिकित्सालय प्रशासन द्वारा माँ योजना के अंतर्गत वहन किया गया। Mukhyamantri Ayushman Arogya Yojana

रवीन्द्रनाथ टैगोर मेडिकल कॉलेज के प्रधानाचार्य एवं नियंत्रक डॉ. राहुल जैन ने कहा कि गुलियन बेरी सिंड्रोम (GBS) जैसी गंभीर न्यूरोलॉजिकल बीमारी से एक 5 साल की बच्ची को पूरी तरह सुरक्षित बाहर निकालना हमारी एडवांस क्रिटिकल केयर यूनिट की वैश्विक स्तर की क्षमताओं को दर्शाता है। यह सफलता केवल दवाओं की नहीं, बल्कि हमारे डॉक्टरों की निरंतर प्रतिबद्धता और मुख्यमंत्री आयुष्मान आरोग्य योजना की ताकत का प्रमाण है, जिसने इतने खर्चीले इलाज को एक गरीब परिवार के लिए पूरी तरह सुलभ बना दिया। RNT प्रशासन संभाग के हर नागरिक को ऐसी उच्च स्तरीय स्वास्थ्य सेवाएं देने के लिए निरंतर कार्य कर रहा है। Rajasthan Healthcare Update

महाराणा भूपाल राजकीय चिकित्सालय के अधीक्षक डॉ. आर. एल. सुमन ने चिकित्सालय प्रबंधन की सराहना करते हुए कहा कि अस्पताल का मुख्य उद्देश्य हर क्रिटिकल मरीज को बिना किसी रुकावट के त्वरित और निर्बाध इलाज देना है। इस केस में 116 दिनों के लंबे ट्रीटमेंट कोर्स के दौरान वेंटिलेटर सपोर्ट, सर्जरी (ट्रेकियोस्टॉमी) से लेकर दवाओं और मुफ्त पौष्टिक आहार की व्यवस्था को हमारे स्टाफ ने पूरी मुस्तैदी से संभाला। मुख्यमंत्री आयुष्मान आरोग्य योजना के प्रभावी क्रियान्वयन से हम 5 लाख 31 हजार रुपये से अधिक का यह जटिल उपचार पूरी तरह कैशलेस और निःशुल्क प्रदान करने में सफल रहे, जो पूरे अस्पताल प्रशासन के लिए गर्व की बात है। Rajasthan Healthcare Update

बाल रोग विभाग के प्रोफेसर एवं विभागाध्यक्ष डॉ. विवेक अरोड़ा ने विभाग की इस बड़ी कामयाबी पर कहा कि जीबीएस बच्चों में होने वाली एक बेहद तीव्र और खतरनाक स्थिति है, जिसमें समय पर डायग्नोसिस और इम्यूनोग्लोबुलिन थेरेपी की उपलब्धता सबसे महत्वपूर्ण होती है। हमारे विभाग के पीआईसीयू में उपलब्ध अत्याधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर और नर्सिंग केयर की बदौलत ही हम बच्ची को इतने लंबे समय तक सुरक्षित वेंटिलेटर पर रख पाए और अंततः उसे पूरी तरह रिकवर कर वार्ड में शिफ्ट किया। आज बच्ची मुस्कुराते हुए डिस्चार्ज हो रही है, जो हमारी पूरी पीडियाट्रिक्स टीम के लिए सबसे बड़ा पुरस्कार है।

यूनिट हेड एवं प्रोफेसर डॉ. मोहम्मद आसिफ ने तकनीकी जानकारी साझा करते हुए कहा कि जब बच्ची हमारे पास 4 फरवरी को आई थी, तो उसके दोनों पैरों की ताकत पूरी तरह खत्म हो चुकी थी और श्वसन तंत्र भी प्रभावित हो रहा था। हमारी टीम ने बिना समय गंवाए आईवीआईजी की 5 डोज शुरू कीं। Rajasthan Healthcare Update

ट्रेकियोस्टॉमी और लंबे वेंटिलेटर सपोर्ट के दौरान इन्फेक्शन से बचाना और साथ ही फिजियोथेरेपी व हाई-प्रोटीन न्यूट्रिशन के जरिए मांसपेशियों की रिकवरी को गति देना एक बड़ा टास्क था। चिकित्सकों के सतत प्रयास, नर्सिंग स्टाफ की चैबीसों घंटे की देखभाल तथा परिवार के दृढ़ सहयोग से पूरी तरह स्वस्थ होकर अब 31 मई को अपने घर लौट रही है।

इस ऐतिहासिक सफलता में यूनिट हेड डॉ. मोहम्मद आसिफ के नेतृत्व में प्रोफेसर डॉ. भूपेश जैन, सहायक प्रोफेसर डॉ. सुरेश चौहान तथा रेजिडेंट डॉक्टर्स- डॉ. राहुल, डॉ. शिंतु, डॉ. निधि, डॉ. आयुष, डॉ. मुकेश, डॉ. होजेफा एवं डॉ. अनामिका सहित पूरी मेडिकल और पैरामेडिकल टीम ने अपनी अत्यंत महत्वपूर्ण और सराहनीय भूमिका निभाई।
 

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