RNT मेडिकल कॉलेज में शुरू होगा अंतर्राष्ट्रीय हिबिस्कस ड्रग ट्रायल
उदयपुर 5 मई 2026 । सिकल सेल रोग से जूझ रहे मरीजों के लिए उदयपुर के रवींद्रनाथ टैगोर मेडिकल कॉलेज मे संचालित स्थित सेंटर ऑफ कॉम्पिटेंस फॉर सिकल सेल डिजीज से एक अच्छी खबर सामने आई है। संस्थान के बाल चिकित्सालय विभाग में जल्द ही ‘हिबिस्कस’ नामक एक अंतर्राष्ट्रीय क्लीनिकल ड्रग ट्रायल शुरू किया जा रहा है। इस शोध के तहत एटावोपिवेट नामक दवा की प्रभावशीलता का मूल्यांकन किया जाएगा। भारत के चुनिंदा 14 केंद्रों में आरएनटी मेडिकल कॉलेज शामिल हुआ है जो कि राजस्थान से एकमात्र चयनित मेडिकल कॉलेज है। इससे जनजातीय बाहुल्य क्षेत्र के मरीजों को मिलेगा सीधा लाभ मिलेगा।
संस्थान की सिकल सेल रोग के विरुद्ध उपलब्धियां
RNT मेडिकल कॉलेज के प्रधानाचार्य एवं नियंत्रक डॉ. राहुल जैन ने बताया कि यह केंद्र राजस्थान सरकार द्वारा 10 फरवरी 2023 को सेंटर ऑफ एक्सीलेंस घोषित किया गया था, जिसे बाद में भारत सरकार के जनजातीय कार्य मंत्रालय ने देश के दूसरे सेंटर ऑफ कॉम्पिटेंस के रूप में मान्यता दी। केंद्र की अब तक की उपलब्धियां बेमिसाल हैं। जसमें अब तक 30,235 नवजात शिशुओं और 6,703 गर्भवती महिलाअ (एएनसी) की स्क्रीनिंग की जा चुकी है।570 सिकल सेल रोगियों और 1,720 वाहकों का पंजीकरण कर उन्हें नियमित सेवाएं दी जा रही हैं। 240 चिकित्सा अधिकारियों, 600 एएनएम और 200 काउंसलर्स सहित 10 जिलों के 52 मास्टर ट्रेनर्स को प्रशिक्षित किया गया है। देश का पहला सिकल सेल वेलनेस हब भी इसी मेडिकल कॉलेज में स्थापित है।
डॉ. जैन ने इस उपलब्धि पर कहा कि यह ट्रायल हमारे केंद्र की विशेषज्ञता पर अंतर्राष्ट्रीय मुहर है। उदयपुर संभाग एक जनजातीय बाहुल्य क्षेत्र है, जहाँ सिकल सेल रोग की व्यापकता राष्ट्रीय औसत से अधिक देखी जाती है। इस ट्रायल के उदयपुर में शुरू होने से संभाग के समस्त जनजातीय क्षेत्रों (जैसे झाड़ोल, कोटड़ा, सलूंबर, डूंगरपुर, बांसवाड़ा आदि) के लोगों को सीधा लाभ मिलेगा। उन्हें अब इस उन्नत उपचार और शोध का हिस्सा बनने के लिए महानगरों की ओर नहीं जाना पड़ेगा। हिबिस्कस ट्रायल के माध्यम से हम एटावोपिवेट दवा की सुरक्षा और प्रभावशीलता का मूल्यांकन करेंगे, जो भविष्य में मरीजों को अत्याधुनिक और सुरक्षित उपचार विकल्प प्रदान करेगा। यह राष्ट्रीय सिकल सेल उन्मूलन मिशन को साकार करने की दिशा में एक बड़ा मील का पत्थर है।
महाराणा भूपाल चिकित्सालय के अधीक्षक डॉ. आर.एल. सुमन ने बताया कि चूंकि यह ट्रायल बाल चिकित्सालय के अधीन संचालित होगा, इसलिए इसका सीधा लाभ क्षेत्र के बच्चों और किशोरों को मिलेगा। यहाँ डेडिकेटेड निशुल्क आईपीडी वार्ड, रक्त और काउंसलिंग की सुविधाएं पहले से ही सुचारू हैं। अब विश्वस्तरीय शोध जुड़ने से मरीजों की जीवन गुणवत्ता में क्रांतिकारी सुधार आएगा।
बाल चिकित्सालय और विशेषज्ञ टीम का नेतृत्व
यह ट्रायल महाराणा भूपाल चिकित्सालय मे बाल चिकित्सालय के शिशु रोग विभाग ( डिपार्टमेंन्ट ऑफ़ पेडिएट्रिक) के अधीन संचालित होगा। इस महत्वपूर्ण शोध के प्रिंसिपल इन्वेस्टिगेटर शिशु रोग विभाग के प्रोफेसर डॉ. भूपेश जैन होंगे, जबकि वरिष्ठ प्रोफेसर डॉ. लखन पोसवाल को-प्रिंसिपल इन्वेस्टिगेटर के रूप में सहयोग करेंगे। ट्रायल के समन्वय की जिम्मेदारी स्टडी कोऑर्डिनेटर ललित किशोर पारगी संभालेंगे।
जनजातीय बाहुल्य क्षेत्र के लिए वरदान
उदयपुर संभाग एक जनजातीय बाहुल्य क्षेत्र है, जहाँ सिकल सेल रोग की व्यापकता राष्ट्रीय औसत से अधिक देखी जाती है। इस ट्रायल के उदयपुर में शुरू होने से संभाग के समस्त जनजातीय क्षेत्रों (जैसे झाड़ोल, कोटड़ा, सलूंबर, डूंगरपुर, बांसवाड़ा आदि) के लोगों को सीधा लाभ मिलेगा। उन्हें अब इस उन्नत उपचार और शोध का हिस्सा बनने के लिए महानगरों की ओर नहीं जाना पड़ेगा।
यह महाविध्यालय भारत सरकार की ओर से पहले ही सेंटर आफ एक्सीलेंस के रूप मे कार्यरत है और अब अंतर्राष्ट्रीय क्लीनिकल ड्रग ट्रायल के लिए एम्स दिल्ली और एम्स रायपुर जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों के साथ रवींद्रनाथ टैगोर मेडिकल कॉलेज उदयपुर का चयन होना हमारे शोध मानकों की जीत है।
सिकल सेल एनीमिया के उपचार में यह ड्रग ट्रायल एक नई दिशा प्रदान करेगा। यह पहल न केवल जनजातीय समुदाय में जागरूकता बढ़ाएगी, बल्कि भविष्य में सिकल सेल के खिलाफ लड़ाई को वैश्विक स्तर पर मजबूती प्रदान करेगी।
#Udaipur #RajasthanNews #MedicalResearch #SickleCell #HealthcareIndia #TribalHealth #RNTMedicalCollege #UdaipurNews #ClinicalTrial #HealthInnovation #Etavopivat #AIIMS #SickleCellAwareness #RajasthanHealthcare #IndiaHealthMission
To join us on Facebook Click Here and Subscribe to UdaipurTimes Broadcast channels on GoogleNews | Telegram | Signal
