129 गांवों की होगी बल्ले-बल्ले ! यहां से होकर गुजरेगा 114 KM लंबा 4-लेन वाला हाई-स्पीड कॉरिडोर, पलक झपकते ही पूरा होगा सफर
Udaipur Times, Moradabad Aligarh Greenfield Highway : नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ़ इंडिया (NHAI) ने पश्चिमी उत्तर प्रदेश के इंफ्रास्ट्रक्चर को बेहतर बनाने और प्रमुख औद्योगिक शहरों के बीच यात्रा को आसान, सुरक्षित और तेज़ बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाया है। प्रस्तावित 'मुरादाबाद-अलीगढ़ ग्रीनफील्ड एक्सेस-कंट्रोल्ड हाईवे' का काम ज़मीन पर तेज़ी से आगे बढ़ रहा है।
इसकी शुरुआत दिल्ली-लखनऊ एशियन हाईवे के 'ज़ीरो पॉइंट' पर स्थित गजगोला नानकबारी गांव से हो रही है। यह आधुनिक, 114.950 किलोमीटर लंबा, 4-लेन वाला हाई-स्पीड कॉरिडोर मुरादाबाद, अमरोहा, संभल और बुलंदशहर से होकर गुज़रेगा और अंत में अलीगढ़ में बन रहे रिंग रोड से जुड़ेगा।
इस बड़े प्रोजेक्ट के पूरा होने पर, अलीगढ़ और मुरादाबाद जो अपने तालों और मूर्तियों के लिए मशहूर ऐतिहासिक शहर के बीच यात्रा का समय घटकर सिर्फ़ डेढ़ से दो घंटे रह जाएगा, जबकि आगरा (ताज का शहर) तक की यात्रा में केवल तीन घंटे लगेंगे। NHAI ने इस प्रोजेक्ट के लिए जमीन अधिग्रहण और प्रशासनिक औपचारिकताओं की गति बढ़ा दी है।
ट्रैफ़िक जाम और मुश्किल सफ़र से बड़ी राहत
अभी, मुरादाबाद और अलीगढ़ के बीच 130 से 150 किलोमीटर की यात्रा में यात्रियों, निजी वाहनों और माल ढोने वाले ट्रकों को 3.5 से 4.5 घंटे का समय लगता है। रास्ते में पड़ने वाले घनी आबादी वाले कस्बों जैसे चंदौसी, बहजोई और बबराला में भारी ट्रैफ़िक के साथ-साथ संकरी सड़कें, अतिक्रमण और व्यस्त रेलवे क्रॉसिंग अक्सर वाहनों की गति को धीमा कर देते हैं।
नया कॉरिडोर पूरी तरह से 'एक्सेस-कंट्रोल्ड' होगा
प्रस्तावित नया कॉरिडोर पूरी तरह से 'एक्सेस-कंट्रोल्ड' होगा। इसका मतलब है कि यह स्थानीय भीड़-भाड़, ग्रामीण चौराहों और आवारा मवेशियों के दखल से पूरी तरह मुक्त होगा। वाहन 100 किमी/घंटा की स्थिर और तेज़ गति से चल सकेंगे, जिससे ट्रैफ़िक जाम और ईंधन की बर्बादी पूरी तरह खत्म हो जाएगी। 129 ग्राम सभाओं की जमीन का अधिग्रहण किया जाएगा; अक्टूबर के आखिर तक प्लॉट की फ़ाइनल लिस्ट जारी की जाएगी
31 गांवों से जमीन का अधिग्रहण किया जाएगा
NHAI के प्लान के मुताबिक, 114.950 किलोमीटर लंबे इस प्रोजेक्ट के लिए कुल 129 ग्राम सभाओं की जमीन का अधिग्रहण किया जाएगा। हाईवे की कुल लंबाई में से 15.60 किलोमीटर का हिस्सा मुरादाबाद जिले में, 56.75 किलोमीटर संभल ज़िले में और लगभग 100 मीटर अमरोहा जिले में आता है। अमरोहा ज़िले के हसनपुर इलाके का सिर्फ एक गांव इमरतपुर इस प्रोजेक्ट के दायरे में आता है। संभल इलाके की 38 ग्राम सभाओं और गुन्नौर तहसील के 31 गांवों से जमीन का अधिग्रहण किया जाएगा।
NHAI के प्रोजेक्ट डायरेक्टर (PD) अरविंद कुमार के मुताबिक, अक्टूबर के आखिर तक प्लॉट नंबरों (गाटा नंबरों) के आधार पर एक पब्लिक नोटिस जारी किया जाएगा। उस समय प्लॉट की फाइनल लिस्ट भी सार्वजनिक कर दी जाएगी। ठीक दो महीने बाद, जमीन अधिग्रहण और सेल डीड/मुआवजा बांटने की औपचारिक प्रक्रिया शुरू हो जाएगी। फ़ाइनल सर्वे के बाद प्लॉट की जानकारी पब्लिश होते ही सीधे जमीन की खरीद शुरू हो जाएगी।
मुरादाबाद और संभल इलाकों के इन गांवों से होकर गुजरेगा फोर-लेन हाईवे
प्रोजेक्ट सर्वे और रूट मैप के अनुसार, फोर-लेन हाईवे मुरादाबाद और संभल इलाकों के कई अहम गांवों और इलाकों से होकर गुजरेगा। इनमें गजगोला नानकबाड़ी, उमरी, गिन्नौर देह माफी, कस्बा मुरादाबाद, रतनपुर कलां, मालीपुर, करीमपुर जब्ती, रसूलपुर हमीर, जाफरपुर, लालपुर गंगवारी, फतेहपुर खास, मलिकपुर, अजमतपुर, लालवाड़ा, कुतबपुर रयाब, खुर्रम नगर बिचोला, मदारपुरा, नौसाना शेखूपुर, अल्लापुर भीकन, कलालखेड़ा (उर्फ शहजाद खेड़ा), नगलीया मशमुला, महमूदपुर माफी, असलातनगर बागा और बहादुरपुर राजपूत शामिल हैं।
NHAI, स्पेशल लैंड एक्विजिशन ऑफिसर (SLO) के ज़रिए ज़मीन अधिग्रहण का नोटिफिकेशन जारी होने के बाद ज़मीन की पहचान करने का काम करेगा। ज़मीन के मालिकाना हक के कागज़ात की जांच करने और ज़मीन मालिकों की पहचान पक्की करने के लिए लेखपाल (रेवेन्यू अधिकारी) और रेवेन्यू स्टाफ की संयुक्त टीमें मौके पर तैनात की जाएंगी। पारदर्शी तरीके से सही मुआवज़ा बांटकर निर्माण कार्य में तेज़ी लाई जाएगी।
भविष्य की ज़रूरतों को देखते हुए डिज़ाइन को 6 लेन तक अपग्रेड किया जा सकेगा
NHAI के टेक्निकल ब्लूप्रिंट के अनुसार, हाईवे मुरादाबाद के बिलारी इलाके से शुरू होगा। इसके बाद यह अलीगढ़ पहुंचने से पहले चंदौसी, बहजोई, बबराला और डिबाई से होकर गुज़रेगा। हाईवे को दूर की सोच के साथ डिज़ाइन किया जा रहा है, ताकि भविष्य में ट्रैफिक बढ़ने पर इसे आसानी से छह लेन में अपग्रेड किया जा सके बिना ज़्यादा तोड़-फोड़ या स्ट्रक्चर में बड़े बदलाव किए।
यह कॉरिडोर पोटा और धुरा गांवों के पास संभल ज़िले में दाखिल होगा। संभल तहसील के लगभग 40 गांव इसके दायरे में आएंगे; वहां से, यह कैलादेवी इलाके से गुज़रते हुए गुन्नौर तहसील (जिसमें 29 और गांव शामिल होंगे) तक पहुंचेगा। संभल और गुन्नौर के कुल 69 गांवों से गुजरते हुए, यह रास्ता जिजोडा डांडा गांव के पास पवित्र गंगा नदी को पार करेगा और बुलंदशहर बॉर्डर के किनारे-किनारे चलते हुए सीधे अलीगढ़ रिंग रोड में मिल जाएगा।
बदायूं लिंक के जरिए गंगा एक्सप्रेसवे से सीधा कनेक्शन
इस नए चार-लेन हाईवे का सबसे बड़ा रणनीतिक और लॉजिस्टिकल फ़ायदा गंगा एक्सप्रेसवे से इसका कनेक्शन है। मुरादाबाद-अलीगढ़ हाईवे एक खास बदायूं लिंक के ज़रिए सीधे गंगा एक्सप्रेसवे से जुड़ेगा। एक बार यह कनेक्शन बन जाने के बाद, मुरादाबाद, अलीगढ़ और आस-पास के इलाकों से यात्री एक्सप्रेसवे के ज़रिए बहुत कम समय में सीधे प्रयागराज (इलाहाबाद) और पूरे पूर्वांचल इलाके तक पहुंच सकेंगे।
स्थानीय गाड़ियों, भारी ट्रकों और खेती की मशीनों (जैसे ट्रैक्टर-ट्रॉली) की सुरक्षित आवाजाही पक्की करने के लिए, इस प्रोजेक्ट में कई अंडरपास, बड़े चौराहों पर एलिवेटेड बाईपास और ग्रामीणों की सुविधा के लिए फुट-ओवर-ब्रिज (FOB) बनाना शामिल है। इसके अलावा, रास्ते में पड़ने वाले मोहम्मद इब्राहिमपुर टोल प्लाज़ा पर टोल की नई दरें लागू कर दी गई हैं। वहीं, निर्माण कार्य में तेज़ी लाने के लिए, अलीगढ़-मुरादाबाद सेक्शन पर एक बड़े पुल के लिए टेंडर जिसकी अनुमानित लागत ₹12.5 करोड़ है जून 2026 में जारी किया गया था।
रियल एस्टेट और लॉजिस्टिक्स में तेजी
यह रास्ता न सिर्फ़ मुरादाबाद से अलीगढ़ तक, बल्कि 'ताज के शहर' आगरा तक भी बहुत आसान हो जाएगा। आगरा-अलीगढ़ चार-लेन हाईवे (आगरा से अलीगढ़, 28 किमी 'पैकेज 1') के दूसरे सेक्शन को चौड़ा करने का काम मार्च में शुरू हुआ था, और इसे पूरा करने का लक्ष्य 2028 रखा गया है। इसके पूरा होने पर, मुरादाबाद को अलीगढ़ होते हुए आगरा से जोड़ने वाला एक शानदार चार-लेन नेटवर्क पूरी तरह से तैयार हो जाएगा।
अलीगढ़ में हरदुआगंज, पनेठी और गभाना के बाहरी इलाकों में हाईवे सर्वे, ज़मीन के नोटिफिकेशन और प्रशासनिक गतिविधियों के बीच रियल एस्टेट, खेती की ज़मीन के लेन-देन और लॉजिस्टिक्स ऑपरेशन्स में ज़बरदस्त तेज़ी देखी जा रही है। एक्सप्रेसवे और रिंग रोड कनेक्टिविटी की संभावनाओं को देखते हुए, बड़ी कंपनियाँ वेयरहाउस और आधुनिक इंडस्ट्रियल यूनिट्स लगाने के लिए ज़मीन की तलाश कर रही हैं, जिससे स्थानीय रोज़गार और व्यापार को बहुत बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।