₹17000 करोड़ की लागत से तैयार होगा 262 KM नया एक्सप्रेसवे, जाने किन-किन शहरों को मिलेगा फायदा ?
Udaipur Times, Bengaluru–Chennai Expressway, New Delhi : देशभर में आए दिन सरकार तेजी से सड़कों का विस्तार कर रही है ताकि लोगों को सफर करने में कोई दिक्कत ना हो और उन्हें किसी भी तरह के जाम का सामने ना करना पड़े। बेंगलुरु-चेन्नई एक्सप्रेसवे (Bengaluru–Chennai Expressway / NE-7) दक्षिण भारत की सबसे बहुप्रतीक्षित और महत्वाकांक्षी इंफ्रास्ट्रक्चर परियोजनाओं में से एक है। यह ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे कर्नाटक की राजधानी बेंगलुरु को तमिलनाडु की राजधानी चेन्नई से जोड़ता है।
इस एक्सप्रेसवे से जुड़ी मुख्य बातें और ताज़ा अपडेट निम्नलिखित हैं:
मुख्य विशेषताएँ और आंकड़े
कुल लंबाई: लगभग 262 किलोमीटर (मुख्य कैरिजवे ~258-262 किमी)।
अनुमानित लागत: लगभग ₹17,000 से ₹17,900 करोड़।
लेन क्षमता: शुरुआत में इसे 4-लेन एक्सेस-कंट्रोल एक्सप्रेसवे के रूप में बनाया गया है, जिसे भविष्य में 8-लेन तक चौड़ा करने का प्रावधान (21 मीटर डिप्रेस्ड मीडियन) रखा गया है।
सफ़र के समय में भारी कमी: बेंगलुरु और चेन्नई के बीच वर्तमान सड़क मार्ग से 6 से 7 घंटे लगते हैं, लेकिन इस एक्सप्रेसवे के बनने के बाद यह सफर घटकर महज़ 2.5 से 3 घंटे रह जाएगा।
डिजाइन स्पीड: वाहनों के लिए 120 किमी/घंटा की अधिकतम गति सीमा तय की गई है।
रूट और गुजरने वाले राज्य
यह एक्सप्रेसवे कुल 3 राज्यों से होकर गुजरता है:
कर्नाटक: होसकोटे (बेंगलुरु ईस्ट), मालूर, बांगरपेट
आंध्र प्रदेश: चित्तूर, पलामनेर, बंगारुपलेम
तमिलनाडु: वेल्लोर, रानीपेट, कांचीपुरम, श्रीपेरंबदूर (चेन्नई)
ताज़ा अपडेट और स्थिति (Status Update)
कर्नाटक सेक्शन पूरी तरह चालू: कर्नाटक के हिस्से (होसकोटे से बेथमंगला तक ~71 किमी) का निर्माण कार्य पूरा हो चुका है और इस पर यातायात चालू है।
आंध्र प्रदेश और तमिलनाडु में प्रगति: आंध्र प्रदेश के 85 किमी और तमिलनाडु के 106 किमी में अधिकांश हिस्सों का निर्माण पूरा हो चुका है। आंध्र प्रदेश के बेथमंगला–बैरेड्डीपल्ले खंड को भी चालू कर दिया गया है।
पूरी परियोजना की समयसीमा: शेष बचे पैकेज (तमिलनाडु और आंध्र प्रदेश के कुछ हिस्से) पर काम अंतिम चरण में है। पूरी परियोजना को 2026 के अंत से शुरुआती 2027 तक पूरी तरह से चालू करने का लक्ष्य रखा गया है।
औद्योगिक कॉरिडोर: यह मार्ग होसुर, रानीपेट और श्रीपेरंबदूर के ऑटोमोबाइल और मैन्युफैक्चरिंग हब को सीधा जोड़ेगा, जिससे दक्षिण भारत के लॉजिस्टिक्स को भारी बढ़ावा मिलेगा।