3 हजार करोड़ रुपये की लागत से जल्द 340 सड़कें होंगी चकाचक ! लोगों को मिलेगा बड़ा फायदा
Udaipur Times, Himachal news : हिमाचल प्रदेश के लोगों के लिए अच्छी खबर सामने आई है। हिमाचल सरकार ने ग्रामीण सड़क नेटवर्क को मजबूत करने और दूरदराज के क्षेत्रों को बेहतर सड़क सुविधा से जोड़ने के लिए प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना (PMGSY) के चौथे चरण के दूसरे फेज में बड़ी सौगात मिलने की उम्मीद है। लोक निर्माण मंत्री विक्रमादित्य सिंह के अनुसार, प्रदेश को करीब 3,000 करोड़ रुपये की लागत से 1,659 किलोमीटर लंबी 340 सड़कों की स्वीकृति मिलने जा रही है।
मिली जानकारी के अनुसार, विक्रमादित्य सिंह ने कहा कि पिछले करीब चार वर्षों के दौरान उनके विभागों को केंद्र सरकार की विभिन्न योजनाओं के तहत 9,500 करोड़ से 10,000 करोड़ रुपये तक की राशि की मदद मिली है। इसमें सड़क निर्माण, अमृत योजना, स्वच्छता, सीवरेज और पेयजल जैसी योजनाओं से संबंधित सहायता शामिल हैं।
जानकारी के मुताबिक, लोक निर्माण मंत्री ने बताया कि प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के चौथे चरण के पहले फेज में इस साल की शुरुआत में करीब 2,300 करोड़ रुपये की लागत से 1,500 किलोमीटर लंबी 294 सड़कों को मंजूरी मिली थी। इनमें से 17 सड़कें न्यायालय में विचाराधीन मामलों के कारण शुरू नहीं हो पाई हैं, जबकि शेष सड़कों पर काम शुरू हो चुका है।
मिली जानकरी के अनुसार, PMGSY-4 के दूसरे चरण में प्रस्तावित 340 सड़कों से प्रदेश के विभिन्न विधानसभा क्षेत्रों को लाभ मिलने की उम्मीद है। विक्रमादित्य सिंह के अनुसार, इस योजना में आनी, अर्की, बैजनाथ, बल्ह, बंजार, भटियात, भरमौर, चंबा, चौपाल, चुराह, डलहौजी, जुब्बल-कोटखाई, कुल्लू, मंडी सदर, पच्छाद, रामपुर, रोहड़ू, सराज, सोलन और ठियोग विधानसभा क्षेत्रों की सड़कें शामिल हैं। उन्होंने बताया कि सड़कों की स्वीकृति मिलने के बाद टेंडर प्रक्रिया पूरी करने का लक्ष्य रखा गया है, ताकि जनवरी से इन सड़कों का निर्माण कार्य धरातल पर शुरू किया जा सके।
जैसा की मंत्री ने बताया कि PMGSY-4 के तहत लगभग 128 करोड़ रुपये की लागत से 23 पुलों को भी जल्द स्वीकृति मिलने की उम्मीद है। इन पुलों के निर्माण से उन क्षेत्रों को राहत मिल सकती है, जहां बरसात के दौरान नदी-नालों के कारण आवागमन प्रभावित होता है और लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ता है।
जानकारी के मुताबिक, प्रदेश में सड़कों की मरम्मत और रखरखाव के लिए करीब 800 करोड़ रुपये की वार्षिक योजना पर काम किया जा रहा है। इस योजना के तहत लगभग 800 किलोमीटर सड़कों के रखरखाव का लक्ष्य रखा गया है। हालांकि, अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बिटुमेन यानी सड़क निर्माण में इस्तेमाल होने वाले तारकोल की आपूर्ति में आ रही दिक्कतों के कारण काम प्रभावित होने की आशंका है।