खेती से घर चलाने वाले किसान के 4 बेटे बने सरकारी अफसर, जाने कैसे हासिल की सफलता ?

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खेती से घर चलाने वाले किसान के 4 बेटे बने सरकारी अफसर, जाने कैसे हासिल की सफलता ? 

Udaipur Times, Success Story : बिहार के नवादा जिले के रोह प्रखंड स्थित भिखमपुर पंचायत के जैला गांव के किसान ईश्वरी यादव और उनकी पत्नी मंजू देवी ने यह साबित कर दिया कि सीमित संसाधन कभी भी सफलता की राह में बाधा नहीं बनते। खुद अधिक पढ़े-लिखे न होने के बावजूद उन्होंने अपने चारों बेटों की पढ़ाई कभी नहीं रुकने दी। आज उनके चारों बेटे अलग-अलग सरकारी विभागों में नौकरी कर रहे हैं, जबकि दोनों बेटियां भी शिक्षा के क्षेत्र में आगे बढ़ रही हैं।

ईश्वरी यादव ने कहा परिवार की आय का एकमात्र सहारा खेती थी। कभी अच्छी फसल होती तो घर चलता, लेकिन कई बार मौसम की मार से आर्थिक संकट भी झेलना पड़ता था। इसके बावजूद उन्होंने बच्चों की पढ़ाई से कभी समझौता नहीं किया। उन्होंने कहा, "हमारे पास जमीन भले ही कम थी, लेकिन बच्चों के सपने बहुत बड़े थे। मेरा हमेशा मानना रहा कि खेती एक पीढ़ी का सहारा बन सकती है, लेकिन शिक्षा कई पीढ़ियों का भविष्य बदल देती है।"

वहीं, उनकी पत्नी मंजू देवी ने घर की जिम्मेदारियां संभालते हुए बच्चों में अनुशासन, मेहनत और अच्छे संस्कार विकसित किए। आज उसी मेहनत का परिणाम पूरे परिवार को मिला है।

चारों बेटों ने हासिल की सरकारी नौकरी...

राजीव कुमार बने पंचायत सचिव

परिवार के सबसे बड़े बेटे राजीव कुमार (34) का चयन साल 2022 में बिहार सरकार में पंचायत सचिव के पद पर हुआ। वर्तमान में उनकी तैनाती डेहरी में है। स्नातक की पढ़ाई पूरी करने के बाद उन्होंने प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी की और सफलता हासिल की। वे पंचायत प्रशासन और ग्रामीण विकास से जुड़े कार्यों का जिम्मा संभाल रहे हैं।

सतीश कुमार भारतीय रेलवे में तकनीशियन

दूसरे बेटे सतीश कुमार (30) को साल 2014 में भारतीय रेलवे में टेक्नीशियन के पद पर नौकरी मिली। वर्तमान में वे भुसावल रेलवे मंडल में कार्यरत हैं। सरकारी नौकरी मिलने के बाद उन्होंने परिवार की आर्थिक स्थिति मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

रविंदर कुमार बने बीएसएफ में जूनियर इंजीनियर

तीसरे बेटे रविंदर कुमार (28) ने पॉलिटेक्निक और स्नातक की पढ़ाई पूरी करने के बाद 2024 में सीमा सुरक्षा बल (BSF) में जूनियर इंजीनियर के पद पर सफलता हासिल की। उनकी वर्तमान तैनाती जबलपुर में है। रविंदर का कहना है कि प्रतियोगी परीक्षाओं में सफलता के लिए निरंतर अभ्यास और धैर्य सबसे जरूरी है।

सबसे छोटे बेटे सिंटू कुमार बने डिप्टी मैनेजर

परिवार के सबसे छोटे बेटे सिंटू कुमार (24) ने सिविल इंजीनियरिंग में बीटेक करने के बाद 7 जून 2026 को पेट्रोलियम मंत्रालय में डिप्टी मैनेजर के पद पर चयनित होकर परिवार की उपलब्धियों में एक और नया अध्याय जोड़ दिया। उनकी सफलता से पूरे गांव में खुशी का माहौल है।

गांव के युवाओं के लिए बने प्रेरणा

ईश्वरी यादव के परिवार की यह कहानी आज पूरे इलाके के युवाओं के लिए प्रेरणा बन गई है। सीमित आय, कठिन परिस्थितियों और संसाधनों की कमी के बावजूद उन्होंने अपने बच्चों को अच्छी शिक्षा दिलाई और मेहनत का महत्व सिखाया। आज उनके चारों बेटे सरकारी सेवा में हैं और यह परिवार इस बात का उदाहरण बन गया है कि दृढ़ संकल्प, शिक्षा और निरंतर मेहनत से किसी भी लक्ष्य को हासिल किया जा सकता है।

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