मेट्रो स्टेशनों के पास यहां बनेंगे 40 मंजिला अपार्टमेंट ! जाने क्या है DDA का नया मेगा प्लान ?
Udaipur Times, Delhi Master Plan 2047 : राजधानी दिल्ली में जमीन की सीमित उपलब्धता और तेजी से बढ़ती आबादी को देखते हुए अब शहर के विकास का तरीका बदलने की तैयारी है। दिल्ली की करीब 1,483 वर्ग किलोमीटर की सीमा में विस्तार की गुंजाइश बेहद सीमित है। ऐसे में मास्टर प्लान-2047 के तहत दिल्ली को चौड़ाई में फैलाने के बजाय ऊंचाई की ओर विकसित करने यानी Vertical Development पर जोर दिया जा रहा है।
आने वाले वर्षों में दिल्ली की आबादी में करीब 80 लाख लोगों के जुड़ने का अनुमान है। इतनी बड़ी आबादी के लिए आवास, रोजगार और परिवहन की व्यवस्था करना बड़ी चुनौती है। इसी को देखते हुए मेट्रो स्टेशनों, प्रमुख ट्रांसपोर्ट हब और हाई-डेंसिटी कॉरिडोर के आसपास ऊंची इमारतों के विकास को बढ़ावा देने की योजना है।
500 तक FAR से बढ़ेगी निर्माण की क्षमता
इस योजना में Floor Area Ratio (FAR) को महत्वपूर्ण भूमिका दी गई है। FAR यह तय करता है कि किसी प्लॉट पर उसके क्षेत्रफल के मुकाबले कितना कुल निर्माण किया जा सकता है। FAR जितना अधिक होगा, उतनी अधिक फ्लोर एरिया वाली इमारत बनाई जा सकती है।
मास्टर प्लान-2047 के तहत Transit Oriented Development (TOD) और झुग्गी पुनर्वास से जुड़े क्षेत्रों में FAR को बढ़ाकर 500 तक करने का प्रावधान किया गया है। इससे चुनिंदा क्षेत्रों में जमीन का बेहतर इस्तेमाल करते हुए ऊंची इमारतों के निर्माण का रास्ता खुल सकता है।
मेट्रो के आसपास बनेंगे हाईराइज अपार्टमेंट
नई योजना का सबसे बड़ा फोकस मेट्रो और सार्वजनिक परिवहन के आसपास विकास पर है। इसके तहत मेट्रो स्टेशन, प्रमुख बस टर्मिनल और हाई-डेंसिटी कॉरिडोर के आसपास आवासीय और व्यावसायिक परियोजनाओं को बढ़ावा दिया जाएगा।
इन क्षेत्रों में भविष्य में 30 से 40 मंजिल तक की ऊंची इमारतों के प्रोजेक्ट देखने को मिल सकते हैं। हालांकि किसी भी प्रोजेक्ट की वास्तविक ऊंचाई स्थानीय नियमों, प्लॉट, फायर सेफ्टी, एयरपोर्ट और अन्य आवश्यक मंजूरियों पर निर्भर करेगी।
एक ही जगह घर, ऑफिस और बाजार का होगा निर्माण
वर्टिकल डेवलपमेंट का फायदा सिर्फ आवास उपलब्ध कराने तक सीमित नहीं रहेगा। Mixed-Use Development के तहत एक ही परिसर में अलग-अलग सुविधाएं विकसित करने की योजना है।
इमारत के निचले हिस्से में दुकानें, ऑफिस, रेस्टोरेंट और अन्य सुविधाएं हो सकती हैं, जबकि ऊपर के हिस्से में आवासीय फ्लैट बनाए जा सकते हैं। इससे लोगों को रोजमर्रा की जरूरतों के लिए लंबी दूरी तय करने की जरूरत कम होगी।
मेट्रो से जुड़ेंगे घर, कम हो सकता है ट्रैफिक
TOD का एक प्रमुख उद्देश्य लोगों को सार्वजनिक परिवहन के करीब बसाना है। अगर लोग मेट्रो स्टेशन या बस टर्मिनल के आसपास रहते और काम करते हैं, तो निजी वाहनों पर उनकी निर्भरता कम हो सकती है।
इससे दिल्ली की सड़कों पर ट्रैफिक का दबाव कम करने और सार्वजनिक परिवहन के इस्तेमाल को बढ़ाने में मदद मिल सकती है। हालांकि इसका वास्तविक असर इस बात पर निर्भर करेगा कि नए इलाकों में सड़क, पार्किंग, सार्वजनिक परिवहन और अन्य बुनियादी सुविधाएं कितनी अच्छी तरह विकसित होती हैं। ऊंची इमारतों के जरिए कम जमीन पर अधिक लोगों के लिए आवास उपलब्ध कराने की कोशिश होगी। इससे शहर को हर दिशा में फैलाने के बजाय मौजूदा शहरी क्षेत्र का अधिक प्रभावी इस्तेमाल किया जा सकता है।
योजना के तहत बची हुई जमीन का इस्तेमाल पार्क, हरित क्षेत्र, सड़क, पैदल मार्ग और अन्य सार्वजनिक सुविधाओं के लिए किया जा सकता है।
80 लाख नई आबादी के लिए बड़ी चुनौती
दिल्ली के सामने आने वाले वर्षों में सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक बढ़ती आबादी के लिए किफायती आवास और बेहतर बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध कराना है। यही वजह है कि मास्टर प्लान-2047 में आवासीय विकास को ट्रांसपोर्ट और रोजगार केंद्रों के साथ जोड़ने पर जोर दिया जा रहा है।
हालांकि सिर्फ ऊंची इमारतें बना देना पर्याप्त नहीं होगा। पानी, सीवेज, बिजली, पार्किंग, स्कूल, अस्पताल, सड़क, फायर सेफ्टी और सार्वजनिक परिवहन जैसी सुविधाओं को भी उसी अनुपात में विकसित करना जरूरी होगा।
दिल्ली का बदल सकता है पूरा स्काईलाइन
अगर प्रस्तावित योजनाएं बड़े स्तर पर लागू होती हैं तो आने वाले वर्षों में दिल्ली के कई हिस्सों का स्वरूप बदल सकता है। मेट्रो कॉरिडोर और प्रमुख ट्रांसपोर्ट हब के आसपास ऊंची इमारतों के साथ घर, ऑफिस, बाजार और सार्वजनिक सुविधाओं का एकीकृत विकास देखने को मिल सकता है।
यानी आने वाले समय में दिल्ली के विकास का मॉडल जमीन पर फैलने के बजाय ऊंचाई की ओर बढ़ने वाला 'वर्टिकल दिल्ली' हो सकता है।