हरियाणा के 5 जिले निकल सकते है NCR से बाहर ! कई जिलों की बदलेगी तस्वीर, यहां पड़ेगा ज्यादा असर ?

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 हरियाणा के 5 जिले निकल सकते है NCR से बाहर ! कई जिलों की बदलेगी तस्वीर, यहां पड़ेगा ज्यादा असर ?

Udaipur Times, Haryana News : हरियाणा से बड़ी खबर सामने आ रही है। NCR (राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र) की सीमा के प्रस्तावित रीशेड्यूलिंग से हरियाणा के 60% NCR क्षेत्र बाहर हो सकते हैं। जानकारी के अनुसार दिल्ली में आज NCR प्लानिंग बोर्ड की बैठक होगी, जिसकी हरियाणा के पूर्व CM मनोहर लाल खट्टर करेंगे।

मिली जानकारी के मुताबिक अगर बैठक में NCR क्षेत्र की रीशेड्यूलिंग में समहति बनी तो प्रदेश के कई जिलों और अर्बन प्लानिंग की तस्वीर बदल सकती है। हरियाणा के पांच जिले बाहर होने की संभावना है। इस प्रस्ताव में दिल्ली के राजघाट से 100 KM की रेडियस तक NCR क्षेत्र को सीमित करने का सुझाव है। Haryana News

NCR में प्रदेश के 14 जिले शामिल है। इसका कुल क्षेत्रफल 25,327 वर्ग KM है। अगर, नया फार्मूला लागू हुआ तो यह घटकर 10,546 वर्ग KM रह सकता है। इसका सबसे अधिक असर पानीपत, करनाल, जींद, महेंद्रगढ़ और भिवानी पर पड़ेगा। ये सभी जिले 100 KM की रेडियस के आसपास रहेंगे।

सीमा बदली तो क्या होगा…

जानकारी के अनुसार NCR की सीमा में बदलाव से महेंद्रगढ़ पर सबसे अधिक प्रभाव पड़ेगा। जिले का अधिकांश क्षेत्र 100 KM की सीमा से बाहर है। जींद भी सीमा रेखा पर होने के कारण बड़े पैमाने पर प्रभावित हो सकता है। करनाल और पानीपत के शहरी क्षेत्र राष्ट्रीय राजमार्ग कॉरिडोर के कारण कुछ हद तक सुरक्षित रह सकते हैं, लेकिन पूरे जिले का NCR में बने रहना मुश्किल दिख रहा है। भिवानी और चरखी दादरी के कुछ हिस्सों पर भी इसका असर पड़ेगा। Haryana News

मिली जानकारी के मुताबिक हरियाणा सरकार ने NCR में समावेश बनाए रखने के लिए 11 राष्ट्रीय राजमार्गों के दोनों ओर एक-एक KM चौड़ा कॉरिडोर बनाए रखने का प्रस्ताव दिया है। इससे NH-44 पर स्थित करनाल और पानीपत को राहत मिल सकती है। भिवानी और चरखी दादरी को भी संबंधित राष्ट्रीय राजमार्गों के माध्यम से आंशिक लाभ मिलने की संभावना है। Haryana News

बैठक में क्या हो सकता है…

दिल्ली में होने वाली NCR प्लानिंग बोर्ड की बैठक में सीमा पुनर्निर्धारण का मुद्दा शामिल है। यदि राज्यों के बीच इसकी सहमति बनती है तो हरियाणा के कई जिलों की विकास रणनीति, निवेश आकर्षण और भविष्य की शहरी योजना पर असर पड़ सकता है। Haryana News

जानकारी के अनुसार सीनियर एडवोकेट अमित राठी का कहना है कि NCR से बाहर होने वाले जिलों के लिए राज्य सरकार को समानांतर औद्योगिक और इंफ्रास्ट्रक्चर विकास मॉडल तैयार करना होगा, ताकि निवेश और रोजगार पर किसी संभावित गलत प्रभाव को कम कर सके।

2 पार रुख बदला

मिली जानकारी के मुताबिक 2015 में CM बनने के कुछ ही समय बाद मनोहर लाल खट्टर ने करनाल और जींद को NCR में शामिल करवाने को बड़ी उपलब्धि बताया था। NCR प्लानिंग बोर्ड की बैठक में दोनों जिलों को शामिल किए जाने के बाद हरियाणा का करीब 57 प्रतिशत क्षेत्र NCR का हिस्सा बन गया था, लेकिन दिसंबर 2021 में खट्टर ने सार्वजनिक रूप से कहा कि दिल्ली से 100 KM से अधिक दूर के जिलों को NCR में रखने का कोई विशेष लाभ नहीं मिल रहा है। Haryana News

जानकारी के अनुसार खट्टर ने केंद्र सरकार को सुझाव दिया था कि केवल 100 KM के दायरे वाले क्षेत्र को ही NCR में रखा जाए और बाकी क्षेत्रों को बाहर किया जाए। Haryana News उस समय खट्टर का तर्क था कि दूरस्थ जिलों को NCR के प्रतिबंध तो झेलने पड़ते हैं, लेकिन अपेक्षित विकास लाभ नहीं मिलते।

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