हरियाणा में 5 लाख युवाओं को मिलेगा रोजगार ! जाने सरकार का नया प्लान ?

 | 
हरियाणा में 5 लाख युवाओं को मिलेगा रोजगार ! जाने सरकार का नया प्लान ?

Udaipur Times, Haryana News, चंडीगढ़ : हरियाणा के सातवें दशक में प्रवेश के साथ मुख्यमंत्री श्री नायब सिंह सैनी ने राज्य के 15 लाख एमएसएमई (सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों) को आर्थिक विकास के अगले चरण का प्रमुख आधार बनाने का लक्ष्य रखा है। सरकार ने इसके लिए हरियाणा प्रगतिशील एमएसएमई एवं निर्यात प्रोत्साहन नीति-2026 के तहत पांच वर्ष का रोडमैप तैयार किया है। मुख्यमंत्री श्री नायब सिंह सैनी ने सोमवार को करनाल में हरियाणा प्रगतिशील एमएसएमई एवं निर्यात प्रोत्साहन नीति-2026 नीति को लॉन्च किया। इसका लक्ष्य 55,000 करोड़ रुपये से अधिक का विनिर्माण निवेश आकर्षित करना, 5 लाख से अधिक नए रोजगार पैदा करना और वर्ष 2031 तक हरियाणा के निर्यात को दोगुना करना है।

नीति में वित्त, औद्योगिक ढांचा, तकनीक, नवाचार, निर्यात, स्थिरता और कौशल विकास सहित 60 महत्वपूर्ण पहल शामिल की गई हैं। सरकार का जोर केवल नए उद्योग लगाने पर नहीं, बल्कि पहले से चल रहे उद्योगों को बढ़ाने, आधुनिक बनाने और देश-विदेश के बाजारों में प्रतिस्पर्धी बनाने पर भी है।

एमएसएमई के लिए बनेगा अलग निदेशालय:

नीति के तहत समर्पित एमएसएमई निदेशालय स्थापित किया जाएगा। इसका उद्देश्य राज्य के विशाल एमएसएमई क्षेत्र को एक जगह से संस्थागत सहायता देना और उद्योगों के विकास के लिए मजबूत व्यवस्था तैयार करना है। यह निदेशालय निवेश, नई तकनीक अपनाने, वित्त तक पहुंच, बुनियादी ढांचे और बाजार उपलब्ध कराने में एमएसएमई की मदद करेगा।

नए उद्योगों के साथ पुराने उद्योगों के विस्तार पर जोर:

नई नीति का फोकस केवल नए उद्योग शुरू कराने तक सीमित नहीं है। मौजूदा उद्योगों के विस्तार, आधुनिकीकरण और मूल्य श्रृंखला में ऊपर उठने के लिए भी सहायता दी जाएगी। हरियाणा उद्यम विकास मिशन के तहत प्राथमिकता वाले क्षेत्रों में एमएसएमई को पूंजी निवेश सब्सिडी, ब्याज सब्सिडी, स्टांप ड्यूटी की प्रतिपूर्ति, रोजगार सृजन सहायता, बीमा सहायता तथा परीक्षण, स्वचालन, कृत्रिम बुद्धिमत्ता और अनुसंधान एवं विकास के लिए प्रोत्साहन दिया जाएगा। वित्त तक पहुंच आसान बनाने और बिना जमानत ऋण को बढ़ावा देने के लिए राज्य वेंचर कैपिटल फंड और सेक्टोरल क्रेडिट गारंटी फंड भी प्रस्तावित किए गए हैं।

2031 तक निर्यात दोगुना करने का लक्ष्य:

हरियाणा के सातवें दशक में प्रवेश के साथ शुरू किया गया यह 60 पहलों वाला पांच वर्षीय रोडमैप राज्य में वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी उद्योगों की नई पीढ़ी तैयार करने की दिशा में बड़ा कदम है। सरकार का लक्ष्य अगले पांच वर्षों में 55,000 करोड़ रुपये से अधिक का विनिर्माण निवेश, 5 लाख से अधिक नए रोजगार और 2031 तक निर्यात को दोगुना करना है। इसके माध्यम से हरियाणा को एक मजबूत विनिर्माण और निर्यात केंद्र के रूप में विकसित करने तथा विकसित भारत-2047 के राष्ट्रीय लक्ष्य में राज्य की भूमिका को और मजबूत करने का प्रयास किया जाएगा।

मजबूत औद्योगिक ढांचा और आसान कारोबार:

नीति के तहत बड़े क्लस्टर, प्लग एंड प्ले औद्योगिक एस्टेट और कॉमन फैसिलिटी सेंटर विकसित किए जाएंगे। सिंगल विंडो सिस्टम को और मजबूत किया जाएगा ताकि उद्योग लगाने में लगने वाला समय, लागत और सरकारी प्रक्रियाओं की जटिलता कम हो। इसके साथ एमएसएमई राइट टू बिजनेस फ्रेमवर्क लागू किया जाएगा। इसका उद्देश्य कारोबार शुरू करने और चलाने की प्रक्रिया को और सरल बनाना है।

हरियाणा के उद्योगों को भविष्य की जरूरतों के लिए तैयार करने के लिए स्वचालन, इंडस्ट्री 4.0, एआई, उन्नत विनिर्माण, गुणवत्ता प्रमाणन तथा अनुसंधान एवं विकास को बढ़ावा दिया जाएगा। इसके लिए नए उत्कृष्टता केंद्र बनाए जाएंगे और उद्योग तथा शिक्षण संस्थानों के बीच मजबूत साझेदारी विकसित की जाएगी। भारत सरकार के आरएएमपी कार्यक्रम के साथ भी बेहतर समन्वय किया जाएगा।

स्थानीय बाजार से वैश्विक बाजार तक पहुंचेगा हरियाणा का एमएसएमई:

नई नीति का एक बड़ा लक्ष्य हरियाणा के एमएसएमई को स्थानीय बाजार से निकालकर वैश्विक मूल्य श्रृंखलाओं से जोड़ना है। इसके लिए अंतरराष्ट्रीय गुणवत्ता प्रमाणन, निर्यात ऋण और बीमा, माल ढुलाई सहायता, ई-कॉमर्स पंजीकरण और अंतरराष्ट्रीय व्यापार मेलों में भागीदारी के लिए सहायता दी जाएगी। मुख्यमंत्री प्रथम निर्यातक प्रोत्साहन योजना के तहत पहली बार निर्यात करने वाले उद्यमियों को उनके पहले अंतरराष्ट्रीय खरीदार को सुरक्षित करने की लागत में सहायता दी जाएगी।

हरियाणा निर्यात केंद्र निर्यात दस्तावेजीकरण, नियमों के पालन, लॉजिस्टिक्स, बाजार की जानकारी और विदेशी खरीदारों से संपर्क के लिए एकल मंच के रूप में काम करेगा। वहीं उड़ान द्वार के माध्यम से निर्यात के लिए कारोबारी संपर्क, तकनीकी साझेदारी, अंतरराष्ट्रीय संयुक्त उपक्रम और निवेशकों से जुड़ने की प्रक्रिया आसान की जाएगी। रिवर्स बायर-सेलर मीट, अंतरराष्ट्रीय रोड शो, डिजिटल एमएसएमई पवेलियन और विक्रेता विकास कार्यक्रमों के माध्यम से हरियाणा के उद्यमों को घरेलू और वैश्विक मूल्य श्रृंखलाओं से जोड़ा जाएगा।

एआई आधारित ‘हरियाणा उद्योग साथी’ लॉन्च:

मुख्यमंत्री श्री नायब सिंह सैनी ने उद्योगों को सरकारी योजनाओं और प्रोत्साहनों की जानकारी आसानी से उपलब्ध कराने के लिए एआई आधारित बहुभाषी ‘हरियाणा उद्योग साथी’ भी लॉन्च किया है।

इस माध्यम से उद्यमी प्रोत्साहनों, पात्रता, जरूरी दस्तावेजों और आवेदन प्रक्रिया से जुड़ी जानकारी आवाज या टेक्स्ट के माध्यम से प्राप्त कर सकेंगे। यह प्लेटफॉर्म हिंदी, अंग्रेजी, हिंग्लिश, हरियाणवी और पंजाबी में सहायता देगा। ‘हरियाणा उद्योग साथी’ के दायरे में हरियाणा प्रगतिशील एमएसएमई एवं निर्यात प्रोत्साहन नीति-2026 तथा हरियाणा कृषि-व्यवसाय एवं खाद्य प्रसंस्करण नीति-2026 भी शामिल हैं।

हरित और समावेशी विकास पर विशेष जोर:

हरियाणा के अगले औद्योगिक चरण में हरित और समावेशी विकास को भी महत्वपूर्ण स्थान दिया गया है। नीति के तहत स्वच्छ उत्पादन, नवीकरणीय ऊर्जा, संसाधन दक्षता और चक्रिय अर्थव्यवस्था को बढ़ावा दिया जाएगा। इसके लिए एफ्लुएंट ट्रीटमेंट प्लांट और जीरो लिक्विड डिस्चार्ज सिस्टम लगाने में सहायता देने का प्रावधान है। साथ ही एक समर्पित ग्रीन इन्वेस्टमेंट फंड भी प्रस्तावित किया गया है।

महिलाओं, अनुसूचित जातियों, दिव्यांगजनों, ट्रांसजेंडर उद्यमियों, पूर्व सैनिकों, अग्निवीरों और पहली पीढ़ी के उद्यमियों के बीच उद्यमिता को बढ़ावा देने के लिए विशेष पहल की जाएंगी। कौशल विकास, रोजगार सृजन और संतुलित क्षेत्रीय औद्योगिक विकास के लिए भी विभिन्न कदम उठाए जाएंगे।

Follow UdaipurTimes on Facebook , Instagram , and Google News