54 नए हाईवे एक्सप्रेसवे से बदलेगी देश की तस्वीर ! इन 13 राज्यों में बढ़ेगी जमीनों की कीमत
Udaipur Times, NHAI Plans 54 highway projects : भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) की ओर से देश में सड़क नेटवर्क को और मजबूत बनाने के लिए बड़ा कदम उठाया है। इलके लिए देश के 13 राज्यों में 54 नए हाईवे और एक्सप्रेसवे प्रोजेक्ट्स के लिए टेंडर जारी करने की तैयारी की जा रही है। इन परियोजनाओं की कुल लंबाई करीब 2,442 किलोमीटर होगी, जबकि इन पर लगभग 1.80 लाख करोड़ रुपये खर्च किए जायेंगे।
इन परियोजनाओं के पूरा होने से राज्यों के बीच बेहतर कनेक्टिविटी, तेज परिवहन, व्यापार को बढ़ावा और आर्थिक विकास को नई गति मिलने की उम्मीद है। इसके साथ ही यात्रियों के लिए सफर पहले से ज्यादा आसान और सुरक्षित होगा।
आंध्र प्रदेश, बिहार, दिल्ली, गुजरात, झारखंड, कर्नाटक, केरल समेत इन राज्यों में शुरू होंगे हाईवे प्रोजेक्ट्स
NHAI की ओर से दी गई जानकारी के मुताबिक, नए हाईवे और एक्सप्रेसवे प्रोजेक्ट्स देश के कई महत्वपूर्ण राज्यों में विकसित किए जाएंगे। इनमें आंध्र प्रदेश, बिहार, दिल्ली, गुजरात, झारखंड, कर्नाटक, केरल, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, ओडिशा, पंजाब, तमिलनाडु और तेलंगाना शामिल हैं। इन परियोजनाओं का उद्देश्य मात्र नई सड़कें ही बनाना नहीं बल्कि साथ ही साथ कई औद्योगिक क्षेत्रों, शहरों और आर्थिक कॉरिडोर को बेहतर तरीके से जोड़ना भी है।
देश के इंफ्रास्ट्रक्चर विकास के लिए महत्वपूर्ण
बेहतरीन सड़क नेटवर्क से माल परिवहन की लागत कम होगी, यात्रा का समय घटेगा और स्थानीय स्तर पर रोजगार के नए अवसर भी पैदा होंगे। ऐसे तो इस साल प्रस्तावित परियोजनाओं की संख्या बीते साल की तुलना में कम है। पहले लगभग 124 परियोजनाओं की पहचान की गई थी, जिनकी कुल लंबाई 6,376 किलोमीटर और अनुमानित लागत 3.45 लाख करोड़ रुपये थी। लेकिन इसके बावजूद मौजूदा परियोजनाओं को देश के इंफ्रास्ट्रक्चर विकास के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
तीन अलग-अलग निर्माण मॉडल के तहत होंगे विकसित
NHAI इन परियोजनाओं को तीन अलग-अलग निर्माण मॉडल के तहत विकसित करेगा। 26 परियोजनाएं EPC मॉडल पर बनाई जायेंगी। 21 परियोजनाएं HAM के तहत विकसित होंगी। इन 7 परियोजनाएं BOT मॉडल पर दी जायेंगी। इन तीनों मॉडल का उद्देश्य निजी और सरकारी भागीदारी के माध्यम से परियोजनाओं को समय पर पूरा करना और उनकी गुणवत्ता बनाए रखना है।
EPC मॉडल में निर्माण की पूरी जिम्मेदारी सरकार की
EPC मॉडल में निर्माण की पूरी जिम्मेदारी सरकार की होती है, जबकि ठेकेदार केवल तय समय में सड़क बनाकर सौंपता है। HAM मॉडल में सरकार और निजी कंपनी दोनों मिलकर परियोजना का वित्तीय भार शेयर करते हैं।
इससे परियोजना को समय पर पूरा करने में मदद मिलती है। वहीं BOT मॉडल में निजी कंपनी सड़क का निर्माण करती है, उसका संचालन और रखरखाव भी करती है तथा तय अवधि तक टोल वसूलकर अपनी लागत वसूलती है।
लॉजिस्टिक्स सेक्टर को बड़ा लाभ मिलेगा
इन परियोजनाओं के पूरा होने से कई राज्यों में यात्रा का समय कम होने के साथ-साथ लॉजिस्टिक्स सेक्टर को बड़ा लाभ मिलेगा। इसके साथ ही बेहतर हाईवे नेटवर्क से उद्योगों, कृषि क्षेत्र और व्यापारिक गतिविधियों को भी नई गति मिलेगी।
