40 हजार करोड़ की लागत से तैयार होगा 600 KM लंबा एक्सप्रेसवे, तीन राज्यों के लोगों की बदलेगी किस्मत
Udaipur Times, Raxaul–Haldia Expressway : तकरीबन 40,000 करोड़ रुपये की लागत वाली एक विशाल एक्सप्रेसवे परियोजना बिहार के सड़क बुनियादी ढांचे को पूरी तरह से बदल देगी। केंद्र सरकार की देखरेख में विकसित की जा रही इस परियोजना को साल 2028 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। कुछ हिस्सों में भूमि अधिग्रहण का काम चल रहा है, जबकि अन्य हिस्सों में निर्माण कार्य पहले ही शुरू हो चुका है।
रक्सौल-हल्दिया एक्सप्रेसवे (Raxaul–Haldia Expressway) नेपाल सीमा से सटे बिहार के रक्सौल शहर को बंगाल के प्रमुख समुद्री बंदरगाह हल्दिया पोर्ट तक कनेक्टिविटी देगा। आपको बता दें कि पहले यह एक्सप्रेसवे 4 लेन होगा। बाद में जिसे 6 लेन तक विस्तार दिया जा सकता है। भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) इस एक्सप्रेसवे का निर्माण कर रहा है। इस एक्सप्रेसवे की लंबाई 695 से 700 किलोमीटर लंहोगी। 35 से 40,000 करोड़ रुपये लागत रुपये की लागत से बनने वाला यह एक्सप्रेसवे बिहार, झारखंड और पश्चिम बंगाल को सीधा एक दूसरे से जोड़ेगा।
यात्रा के समय में होगी बचत
वर्तमान में, रक्सौल से हल्दिया बंदरगाह तक की यात्रा में लगभग 20 घंटे लगते हैं। इस एक्सप्रेसवे के चालू होने के बाद, यह यात्रा मात्र 11 घंटे में पूरी हो जाएगी। यात्रा के समय में होने वाली इस महत्वपूर्ण कमी से परिवहन लागत कम होगी और व्यवसायों को समय और धन दोनों की बचत करने में मदद मिलेगी।
बिहार के किसानों को मिलेगा बड़ा फायदा
उत्तरी बिहार अपने मखाने, लीची, सब्जियों और अन्य कृषि उत्पादों के लिए प्रसिद्ध है। नया एक्सप्रेसवे इन उत्पादों को हल्दिया बंदरगाह तक तेजी से पहुंचाने में सहायक होगा, जिससे निर्यात के अवसर बढ़ेंगे। मुजफ्फरपुर की मशहूर लीची और मिथिला के मखाने जैसे उत्पादों को अंतरराष्ट्रीय बाजारों में बेहतर पहुंच मिलने की उम्मीद है।
औद्योगिक गतिविधि को मिलेगा बढ़ावा
यह एक्सप्रेसवे पूर्वी चंपारण, समस्तीपुर और बेगूसराय सहित कई महत्वपूर्ण जिलों से होकर गुजरेगा। विशेषज्ञों का मानना है कि इन क्षेत्रों में औद्योगिक गतिविधि बढ़ेगी और इस कॉरिडोर के किनारे नए व्यापारिक केंद्र, निवेश के अवसर और रोजगार की संभावनाएं विकसित होंगी।
पर्यटन और व्यावसायिक गतिविधियों दोनों को बढ़ावा मिलेगा
पूर्वी चंपारण और आसपास के इलाकों से कोलकाता जाने वाले यात्रियों को इस नई सड़क से काफी फायदा होगा। फिलहाल लंबी यात्रा और यातायात जाम के कारण सफर मुश्किल हो जाता है। यह एक्सप्रेसवे तेज, सुरक्षित और अधिक आरामदायक यात्रा का अनुभव प्रदान करेगा, जिससे पर्यटन और व्यावसायिक गतिविधियों दोनों को बढ़ावा मिलेगा।
रक्सौल–हल्दिया एक्सप्रेसवे की कनेक्टिविटी
पटना–पूर्णिया एक्सप्रेसवे से बिहार के कई राज्यों के एक्सप्रेसवे को इंटरचेंज मिलेगा। तीन अन्य एक्सप्रेसवे से कनेक्टिविटी होगी। वाराणसी–कोलकाता एक्सप्रेसवे से पश्चिम बंगाल और झारखंड में यह वाराणसी-कोलकाता एक्सप्रेसवे नेटवर्क से जुड़ेगा। इंडो-नेपाल बॉर्डर पर एकीकृत चेक पोस्ट रक्सौल से जुड़कर यह इंटरनेशनल इकोनॉमिक कॉरिडोर का हिस्सा बनेगा। गंगा एक्सप्रेसवे के एक्सटेंशन, पूर्वांचल एक्सप्रेसवे से भी क्रॉस करेगा और इससे उत्तर प्रदेश को भी फायदा होगा।
भूमि अधिग्रहण और निर्माण कार्य चरणबद्ध तरीके से जारी
भूमि अधिग्रहण और निर्माण कार्य चरणबद्ध तरीके से चल रहा है। अधिकारियों का कहना है कि परियोजना को निर्धारित समय सीमा के भीतर पूरा करने के लिए हर संभव प्रयास किया जा रहा है। यदि सब कुछ योजना के अनुरूप रहा, तो बिहार में 2028 तक एक आधुनिक एक्सप्रेसवे होगा जो राज्य की अर्थव्यवस्था और निर्यात क्षमता को महत्वपूर्ण रूप से बढ़ा सकता है। यह परियोजना बिहार के भविष्य के विकास और प्रगति का एक प्रमुख चालक बनने की उम्मीद है।
