महाश्रमण प्रवर्तक मदन मुनि की 61वीं दीक्षा जयंती आयोजित

जीवन एक यात्रा है। इस यात्रा में सज्जन व सहयोगी साथी मिल जाएं तो वह यात्रा सुखद हो जाती है। पारिवारिक जीवन में सज्जन और उपयोगी सहयोगी परिवारजन मिल जाते हैं, वह परिवार उन्नति के शिखर पर चढ़ जाता है।

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महाश्रमण प्रवर्तक मदन मुनि की 61वीं दीक्षा जयंती आयोजित

जीवन एक यात्रा है। इस यात्रा में सज्जन व सहयोगी साथी मिल जाएं तो वह यात्रा सुखद हो जाती है। पारिवारिक जीवन में सज्जन और उपयोगी सहयोगी परिवारजन मिल जाते हैं, वह परिवार उन्नति के शिखर पर चढ़ जाता है।

श्रमणसंघीय महामंत्री सौभाग्य मुनि महाराज ने आज पंचायती नोहरे में श्रमण प्रवर्तक मदन मुनि महाराज की 61 वीं दीक्षा जयन्ती के अवसर पर आयोजित धर्मसभा को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि इस स्वार्थपूर्ण संसार में सहयोगी धर्म को निभाना बहुत बड़ा दुर्लभ कार्य हो गया है। हमें हार्दिक प्रसन्नता है कि हमारी जीवन यात्रा में मदन मुनि पथिक जैसे सहयोगी संत उपलब्ध हुए।

इन्होंने अपने जीवन में सदा ही सेवा को महत्व दिया। गत 61 वर्षों से संयमित जीवन के अंतर्गत जिन शासन की सेवा कर रहे हैं और मानव मात्र के कल्याण के प्रति प्रेरित हैं। यह एक सफल व्यक्तित्व की निशानी है। इस अवसर पर सौभाग्य मुनि महाराज एवं अन्य मुनियों निर्मल मुनि, कोमल मुनि, मुक्तानंद मुनि,संभव मुनि सहित आदि मुनिजनों ने ने श्रमण संघ की ओर से सम्मान चादर ओढ़ाकर उनका गुणगानपूर्वक अभिनंदन किया।

यह भव्य कार्यक्रम जप, तप, सामायिक एवं गुणानुवाद सभा के रूप में सामूहिक रूप से तथा एकासन व्रत के साथ पूर्ण भक्तिभाव से संपन्न हुआ। इस अवसर पर श्रीसंघ के अध्यक्ष वीरेन्द्र डांगी, महामंत्री हिम्मत बड़ाला, ओंकारसिंह सिरोया, कन्हैयालाल मेहता, बलवंत हिंगड़, युवक परिषद एवं श्राविका संघ, शंकरलाल डांगी द्वारा गुरु के चरणों में उनके कृतित्व, व्यक्तित्व, दीर्घ संयमित जीवन पर विचार व्यक्त किए गए।

इस अभिनंदन के अवसर पर पर मदन मुनि ने कहा कि आज जो कुछ भी हूं, यह सब कुछ गुरुदेव की कृपा के कारण है। मैं तो गुरु चरणों में अपनी यात्रा आगे बढ़ा रहा हूं। संघ समाज ने जो मेरा अभिनंदन किया उसे गुरु चरणों में अर्पित करता हूं।

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