दिल्ली से कटरा के लिए 670 KM नया एक्सप्रेसवे सफर बना देगा आसान ! जाने किन-किन राज्यों को मिलेगा फायदा ?
Udaipur Times, Delhi–Amritsar–Katra Expressway : देशभर में एक दूसरे राज्यों की कनेक्टिविटी को बढ़ाने के लिए और वाहन चालकों के सफर को बिल्कुल आसान बनाने के लिए आए दिन कहीं ना कहीं सड़कों का विस्तार सरकार द्वारा किया जा रहा है, इसी बीच दिल्ली–अमृतसर–कटरा एक्सप्रेसवे से जुड़ी नई उप्पड़ते सामने आ रही है।
दिल्ली–अमृतसर–कटरा एक्सप्रेसवे उत्तर भारत के सबसे महत्वपूर्ण और बड़े आर्थिक कॉरिडोर (Economic Corridor) में से एक है। यह परियोजना देश की राजधानी को पंजाब और जम्मू-कश्मीर के प्रमुख धार्मिक व व्यावसायिक केंद्रों से जोड़ती है।
इस महामार्ग से जुड़ी मुख्य बातें और ताज़ा अपडेट निम्नलिखित हैं:
मुख्य विशेषताएँ और आंकड़े
कुल लंबाई: लगभग 670 किलोमीटर।
अनुमानित लागत: लगभग ₹38,000 से ₹40,000 करोड़।
यात्रा समय में भारी कमी:
दिल्ली से अमृतसर की यात्रा अब महज़ 4 घंटे में पूरी हो सकेगी (जो पहले करीब 8 घंटे लगती थी)।
दिल्ली से कटरा (वैष्णो देवी) का सफर घटकर केवल 6 घंटे रह जाएगा (जो पहले लगभग 12 से 14 घंटे का होता था)।
दूरी में बचत: इस नए एलाइनमेंट से दिल्ली और अमृतसर/कटरा के बीच की कुल सड़क दूरी भी करीब 40 किलोमीटर तक कम हो जाएगी।
गति सीमा (Speed Limit): इस हाई-स्पीड कॉरिडोर पर हल्के मोटर वाहनों (LMV) के लिए गति सीमा 120 किमी/घंटा तय की गई है।
रूट और गुजरने वाले राज्य
यह एक्सप्रेसवे कुल 4 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों से होकर गुजरता है:
दिल्ली
हरियाणा (खरखौदा, गोहाना, कैथल आदि)
पंजाब (मलेरकोटला, लुधियाना/मुल्लांपुर, जालंधर, गुरदासपुर आदि)
जम्मू और कश्मीर (कटरा)
अपडेट और स्थिति (Status Update)
आंशिक संचालन: इस प्रोजेक्ट के तहत हरियाणा और कुछ अन्य हिस्सों (जैसे जससौर खीरी से कैथल तक का हिस्सा) को यातायात के लिए पहले ही खोला जा चुका है, जहाँ वाहन चालक इसका लाभ उठा रहे हैं।
निर्माण और संशोधित रूट: मुख्य कैरिजवे के अधिकांश हिस्सों पर निर्माण कार्य तेज़ी से जारी है। पंजाब में नकोदर से अमृतसर वाले 99 किमी संशोधित रूट के लिए भूमि अधिग्रहण और मुआवजे की प्रक्रिया को आगे बढ़ाया गया है।
समयसीमा: अधिकांश मुख्य मार्गों का काम अंतिम चरण में है, जबकि कुछ अंतिम स्पूर और हिस्सों को पूरी तरह से मुकम्मल होने में वर्ष 2027-28 तक का लक्ष्य रखा गया है, ताकि स्वर्ण मंदिर और माता वैष्णो देवी जाने वाले श्रद्धालुओं व ट्रांसपोर्ट व्यापार को पूरी तरह से निर्बाध कनेक्टिविटी मिल सके।