देशभर में 7 नए हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर विस्तार की योजना, RailTel समेत रेलवे शेयरों ने पकड़ी रफ्तार
Udaipur Times, Business News : देश में हाई-स्पीड रेल नेटवर्क के बड़े विस्तार की संभावनाओं ने रेलवे क्षेत्र की कंपनियों के शेयरों में जबरदस्त उत्साह पैदा कर दिया है। खबरों के अनुसार, रेल मंत्रालय करीब 16 लाख करोड़ रुपये के निवेश वाली महत्वाकांक्षी बुलेट ट्रेन परियोजना पर विचार कर रहा है, जिसके तहत देशभर में सात नए हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर विकसित किए जा सकते हैं।
इस खबर के बाद रेलवे से जुड़ी कंपनियों के शेयरों में व्यापक खरीदारी देखने को मिली। रेलटेल कॉर्पोरेशन के शेयर 3.82 प्रतिशत, रेल विकास निगम (RVNL) 3.62 प्रतिशत, इरकॉन इंटरनेशनल 2.82 प्रतिशत, कंटेनर कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया 2.22 प्रतिशत और इंडियन रेलवे फाइनेंस कॉर्पोरेशन (IRFC) 1.99 प्रतिशत तक चढ़ गए। इसके अलावा टेक्समैको रेल एंड इंजीनियरिंग, टिटागढ़ रेल सिस्टम्स और बीईएमएल के शेयरों में भी बढ़त दर्ज की गई।
दिल्ली से सिलीगुड़ी की दूरी होगी और कम
प्रस्तावित हाई-स्पीड रेल नेटवर्क में दिल्ली-वाराणसी और वाराणसी-सिलीगुड़ी कॉरिडोर को प्रमुख परियोजनाओं के रूप में देखा जा रहा है। इन कॉरिडोरों के शुरू होने से उत्तर भारत और पूर्वी भारत के बीच यात्रा का समय काफी कम हो जाएगा।
रिपोर्टों के मुताबिक, वर्तमान में दिल्ली से सिलीगुड़ी तक की यात्रा में जहां 20 घंटे से अधिक का समय लगता है, वहीं बुलेट ट्रेन शुरू होने के बाद यह सफर लगभग छह घंटे में पूरा किया जा सकेगा। प्रस्तावित मार्ग लखनऊ, वाराणसी और पटना जैसे प्रमुख शहरों से होकर गुजर सकता है, जिससे इन क्षेत्रों की कनेक्टिविटी को बड़ा लाभ मिलेगा।
डीपीआर की समीक्षा जारी
दिल्ली-वाराणसी हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर की विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (DPR) फिलहाल समीक्षा के चरण में है। वहीं वाराणसी-सिलीगुड़ी कॉरिडोर के लिए डीपीआर तैयार करने की प्रक्रिया जल्द शुरू होने की संभावना है। ये परियोजनाएं मुंबई-अहमदाबाद बुलेट ट्रेन कॉरिडोर का विस्तार मानी जा रही हैं, जो भारत की पहली हाई-स्पीड रेल परियोजना है और वर्तमान में निर्माणाधीन है।
बीईएमएल बना रहा स्वदेशी हाई-स्पीड ट्रेन
सरकार की "मेक इन इंडिया" नीति के तहत स्वदेशी तकनीक और स्थानीय विनिर्माण पर विशेष जोर दिया जा रहा है। इसी दिशा में बीईएमएल भारत की पहली स्वदेशी हाई-स्पीड ट्रेनसेट विकसित कर रहा है, जिसकी अधिकतम गति 280 किलोमीटर प्रति घंटा होगी।
जानकारी के अनुसार, इस ट्रेनसेट का परीक्षण 2027 में मुंबई-अहमदाबाद हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर के एक हिस्से पर शुरू किया जा सकता है। भविष्य में विकसित होने वाली नई पीढ़ी की स्वदेशी बुलेट ट्रेनें 350 किलोमीटर प्रति घंटा तक की रफ्तार से दौड़ सकती हैं।
रेलवे कंपनियों को मिलेगा बड़ा कारोबार
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह हाई-स्पीड रेल विस्तार योजना मंजूरी प्राप्त करती है, तो रेलवे इंफ्रास्ट्रक्चर, सिग्नलिंग, कोच निर्माण, ट्रैक बिछाने, वित्तपोषण और परियोजना क्रियान्वयन से जुड़ी कंपनियों को बड़े पैमाने पर काम मिलेगा। इससे घरेलू रेलवे विनिर्माण उद्योग को भी नई मजबूती मिलेगी।
सरकार का उद्देश्य देश के प्रमुख आर्थिक केंद्रों को तेज, सुरक्षित और आधुनिक परिवहन सुविधा से जोड़ना है। साथ ही रेलवे निर्माण और इंजीनियरिंग क्षेत्र में भारत को वैश्विक स्तर पर मजबूत बनाने की दिशा में भी यह परियोजना महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकती है।
