8वें वेतन आयोग में केंद्रीय कर्मचारियों और पेंशनर्स की फिटमेंट फैक्टर पर नजर, जाने कितनी बढ़ेगी सैलरी ?
Udaipur Times, 8th Pay Commission : 8वें वेतन आयोग को लेकर केंद्रीय कर्मचारियों और पेंशनर्स के बीच फिटमेंट फैक्टर को लेकर चर्चा तेज हो गई है। कर्मचारी संगठनों की ओर से 3.61 से 4.00 तक फिटमेंट फैक्टर की मांग रखी गई है। अगर 4.00 फिटमेंट फैक्टर को मंजूरी मिलती है, तो न्यूनतम बेसिक सैलरी मौजूदा रु18,000 से बढ़कर रु72,000 हो सकती है।
हालांकि, यह अभी मांग और संभावित गणना है। 8वें वेतन आयोग में अंतिम फिटमेंट फैक्टर और नई वेतन संरचना तय होने के बाद ही वास्तविक सैलरी का पता चलेगा।
7वें वेतन आयोग में क्या हुआ था?
7वें वेतन आयोग में 2.57 का फिटमेंट फैक्टर लागू किया गया था। इसके आधार पर केंद्रीय कर्मचारियों की न्यूनतम बेसिक सैलरी रु7,000 से बढ़ाकर रु18,000 प्रति माह कर दी गई थी।
अब 8वें वेतन आयोग में कर्मचारी संगठन इससे अधिक फिटमेंट फैक्टर की मांग कर रहे हैं।
4.00 फिटमेंट फैक्टर पर रु72,000 बेसिक पे?
अगर 4.00 का फिटमेंट फैक्टर लागू होता है और मौजूदा रु18,000 न्यूनतम बेसिक पे पर सीधी गणना की जाए, तो:
रु18,000 × 4 = रु72,000
यानी न्यूनतम बेसिक सैलरी रु72,000 तक पहुंच सकती है। हालांकि वास्तविक वेतन निर्धारण सिर्फ इस गुणा से तय नहीं होगा। नए वेतन आयोग में फिटमेंट फॉर्मूला, महंगाई भत्ता और अन्य वेतन संबंधी घटकों को ध्यान में रखा जाएगा।
पेंशन पर भी पड़ेगा असर
फिटमेंट फैक्टर बढ़ने का असर पेंशन पर भी पड़ सकता है। उदाहरण के लिए, यदि किसी पेंशनर की बेसिक पेंशन रु15,000 है और उस पर 4.00 का गुणक लागू किया जाए, तो गणना के हिसाब से यह रु60,000 हो सकती है।
हालांकि, यह केवल उदाहरणात्मक गणना है। वास्तविक पेंशन में बदलाव 8वें वेतन आयोग की अंतिम सिफारिशों और सरकार के फैसले पर निर्भर करेगा।
4.00 फिटमेंट फैक्टर की मांग किसने की?
भारतीय प्रतिरक्षा मजदूर संघ (BPMS) की ओर से 8वें वेतन आयोग में 4.00 फिटमेंट फैक्टर की मांग रखी गई है। संगठन के प्रस्ताव के मुताबिक न्यूनतम बेसिक पे को रु72,000 तक किए जाने की मांग है।
BPMS के अनुसार, प्रस्तावित फिटमेंट फैक्टर में एक हिस्सा महंगाई भत्ते के प्रभाव को समायोजित करने और बाकी हिस्सा वास्तविक वेतन वृद्धि के लिए रखा गया है।
अभी अंतिम फैसला बाकी
8वें वेतन आयोग में फिटमेंट फैक्टर कितना होगा, इस पर अभी अंतिम फैसला नहीं हुआ है। इसलिए रु72,000 की बेसिक सैलरी को फिलहाल संभावित आंकड़ा ही माना जाना चाहिए। अंतिम सैलरी और पेंशन का निर्धारण आयोग की सिफारिशों और केंद्र सरकार की मंजूरी के बाद ही स्पष्ट होगा।