ऑनलाइन शिक्षा ऑफलाइन शिक्षा का कभी विकल्प नहीं हो सकती
वर्तमान परिस्थिति में ऑनलाइन शिक्षा एक वैकल्पिक शिक्षा का स्वरूप है
ग्रामीण एवं निम्न प्रवासी मजदूर के लिए डिजिटल एक गंभीर समस्या के रूप में उत्पन्न हुई हैं
जनार्दन राय नागर राजस्थान विद्यापीठ डीम्ड विश्वविद्यालय के संगठक माणिक्य लाल वर्मा श्रमजीवी महाविद्यालय के समाजशास्त्र विभाग की ओर से मंगलवार को ऑनलाइन शिक्षा की चुनौतियां एवं संभावनाएं पर आयोजित व्याख्यानमाला के मुख्य वक्ता डॉ आशुतोष व्यास ने बताया ऑनलाइन शिक्षा क्या है इसके प्रकार भारत में ऑनलाइन शिक्षा कोविड-19 के संदर्भ में ऑनलाइन शिक्षा की क्या स्थिति है इस पर विस्तार पूर्वक व्याख्यान दिया।
उन्होंने बताया कि किस प्रकार भारत सरकार व राज्य सरकार एवं केंद्र स्तर पर इसे बढ़ावा देने के लिए प्रयास किए जा रहे हैं राष्ट्रीय ज्ञान नेटवर्क भारत नेटवर्क राजस्थान डिजिटल लाइब्रेरी एमएचआरडी मानव संसाधन मंत्रालय द्वारा इसके अंतर्गत शिक्षा एवं प्रदाता का उल्लेख किया गया राजस्थान के संदर्भ में स्माइल कार्यक्रम और बिहार में उन्नयन पहलू आसाम में विश्वा विद्या केरल में फाइट विक्टर तीन राज्य सरकारों द्वारा प्रयास किए गए ऑनलाइन शिक्षा के लाभ व हानि क्या है उसके बारे में भी बताया गया साथ ही डिजिटल विभाजन की बात कही गई विशेषकर ग्रामीण एवं निम्न प्रवासी मजदूर के लिए डिजिटल एक गंभीर समस्या के रूप में उत्पन्न हुई है।
समाजशास्त्र विभागाध्यक्ष डॉ रानी प्रभात सोलंकी ने ऑनलाइन शिक्षा के संदर्भ में बताया उन्होंने कहा कि ऑनलाइन शिक्षा की स्थिति सेक63/33 है जबकि ग्रामीण क्षेत्रों में यह स्थिति 95 प्रतिशत है वर्तमान परिस्थिति में ऑनलाइन शिक्षा एक वैकल्पिक शिक्षा का स्वरूप है क्योंकि इसने नीट इंजीनियरिंग मेडिकल परीक्षाओं को ऑनलाइन करवा कर विद्यार्थियों के 2 साल खराब होने से बचे
अध्यक्षता करते हुए प्रोफेसर सुमन पामेचा ने कहां की ऑनलाइन शिक्षा ऑफलाइन शिक्षा का कभी विकल्प नहीं हो सकती डॉ धर्मेंद्र राजौरा डॉ धीरज प्रकाश जोशी ने भी विचार व्यक्त किए इस अवसर पर डॉ पंकज रावल प्रोफेसर मलय पानेरी डॉक्टर ममता पानेरी डॉ राजेश शर्मा डॉक्टर सी एल भगोरा डॉक्टर नारायण सिंह डॉक्टर कुसुम लता टेलर डॉक्टर एकता हुसैन डॉक्टर शिवांगी डॉक्टर ममता पुरबिया डॉ रमेश मीणा डॉ प्रीति राजपूत भी मौजूद थे