सर्दी ने बढ़ायी खादी मेले की रौनक
लोगों का खादी के प्रति आकर्षण तेजी से बढ़ा
उदयपुर। नगर निगम प्रांगण में चल रहे खादी एवं ग्रामोद्योग मेले में लगातार बढ़ती खरीदारों की भीड़ से लग रही है कि इस बार बिक्री में पिछले सालों के मुकाबले अधिक सफलता मिल सकती है। सर्दी के चलते खादी मेले की रौनक बढ़ गयी है।
जिला संयोजक गुलाब सिंह गरासिया ने बताया कि इन दिनों शीतलहर के प्रकोप एवं ठंड के जमने से लोगों का खादी के प्रति आकर्षण तेजी से बढ़ा है। यही कारण है कि पिछले 1 सप्ताह से मेले में अपने उत्पाद बेचने आए खादी एवं ग्रामोद्योग के व्यापारियों को फुर्सत नहीं मिल रही है। दूसरा कारण यह भी है कि लगातार सर्दी बढ़ने की संभावनाओं के मद्देनजर लोग ज्यादा से ज्यादा अपने घरों में बड़े बुजुर्गों और बच्चों को सुरक्षित करने के लिए खादी एवं ऊनी वस्त्रो की खरीदारी कर रहे हैं। मेले में हमेशा की तरह इस बार भी आकर्षण का केंद्र बनी कामदार दरिया एवं खादी की शाले लोगों को इतनी पसंद आ रही है कि इनका स्टॉक दो बार तो खत्म हो चुका है।
समग्र विकास परिषद धरियावद से आए राजेंद्र गोठवाल मुकेश कुमार गोठवाल एवं कन्हैया लाल मीणा ने बताया कि वह हर साल मेले में आते हैं और कम से कम 3 बार उन्हें माल मंगवाना पड़ता है। उनकी स्टाल पर खरीदारी करने आए बुजुर्ग दंपति बसन्ती लाल सोनी एवं मंजू बाई सोनी ने बताया कि उनके घर में खादी एवं ग्रामोद्योग के उत्पाद ही काम में लिए जाते हैं। उन्होंने एक साथ 3 शाल और दो कामदार दरिया खरीदते हुए बताया कि यह हम फिलहाल हमारे लिए नहीं खरीद रहे हैं इन्हें यहां से खरीद कर हम चेन्नई भेज रहे हैं। कारण पूछने पर बताया कि उदयपुर के खादी मेले में जो क्वालिटी के उत्पाद मिलते हैं वैसे उत्पाद बाहर किसी शहर में नहीं मिलते हैं। उनके रिश्तेदार चेन्नई में रहते हैं हर साल उनके मांग रहती है कि उदयपुर में खादी मेला जब भी लगे हमारे लिए शाल कंबल दरिया रजाइया आप खरीद कर यहां भिजवाए। उन्होंने कहा कि हम जब भी सर्दी के दिनों में चेन्नई जाते हैं या वहां से रिश्तेदार उदयपुर आते हैं तो ट्रेन में सफर के दौरान यह शाले ओढ़ने से उन्हें सर्दी का एहसास नहीं होता। सबसे बड़ी बात यह है कि यह शाले और दहिया वजन में हल्की होती है। इन्हें लाने ले जाने और ओढ़ने में बहुत ही आसानी और सुविधा का आभास होता है।
