यहां तैयार होगा 7 KM लंबा एलिवेटेड कॉरिडोर ! जाम की होगी छुट्टी, सफर करना होगा बिल्कुल आसान ​​​​​​​

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यहां तैयार होगा 7 KM लंबा एलिवेटेड कॉरिडोर ! जाम की होगी छुट्टी, सफर करना होगा बिल्कुल आसान 

Udaipur Times, Delhi Elevated Corridor : दिल्ली में रोजाना सड़क पर सफर करने वाले लाखों लोगों के लिए राहत भरी खबर है। मध्य दिल्ली और नई दिल्ली को बाहरी दिल्ली और पश्चिमी दिल्ली से जोड़ने वाले महत्वपूर्ण न्यू रोहतक रोड कॉरिडोर को एलिवेटेड बनाने की दिशा में सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। रानी झांसी रोड टी-प्वाइंट से आनंद पर्वत और जखीरा होते हुए पंजाबी बाग वेस्ट मेट्रो स्टेशन तक करीब 7 किलोमीटर लंबे एलिवेटेड कॉरिडोर की संभावना तलाशने के लिए विस्तृत व्यवहार्यता अध्ययन कराया जाएगा।

इस परियोजना के लिए दिल्ली सरकार ने प्रशासनिक स्वीकृति के साथ व्यय की मंजूरी भी दे दी है। लोक निर्माण विभाग यानी PWD इस परियोजना के विस्तृत व्यवहार्यता अध्ययन के लिए परामर्श सेवा लेगा, जिस पर करीब 3 करोड़ 50 लाख 81 हजार 500 रुपये खर्च किए जाएंगे। अध्ययन के बाद यह तय होगा कि पूरे मार्ग को किस तरीके से एलिवेटेड बनाया जाए, इसका एलाइनमेंट क्या हो और किन डिजाइन विकल्पों के जरिए यातायात की समस्या का सबसे प्रभावी समाधान निकाला जा सकता है।

अगर यह परियोजना आगे बढ़ती है तो न्यू रोहतक रोड, आनंद पर्वत, जखीरा और पंजाबी बाग की ओर रोजाना सफर करने वाले लोगों को मौजूदा जाम से बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है। खासतौर पर उन यात्रियों को फायदा होगा जिन्हें इस मार्ग पर कई ट्रैफिक सिग्नलों और व्यस्त चौराहों से होकर गुजरना पड़ता है।

7 किलोमीटर के पूरे रास्ते को एलिवेटेड करने की तैयारी

प्रस्तावित एलिवेटेड कॉरिडोर की शुरुआत रानी झांसी रोड टी-प्वाइंट से होगी। यहां से यह मार्ग आनंद पर्वत और जखीरा होते हुए आगे पंजाबी बाग वेस्ट मेट्रो स्टेशन तक जाएगा। यानी सरकार सिर्फ किसी एक जंक्शन या छोटे हिस्से का समाधान करने के बजाय पूरे करीब सात किलोमीटर लंबे कॉरिडोर को एलिवेटेड बनाने की व्यवहार्यता की जांच कर रही है।

इस परियोजना का एक महत्वपूर्ण पहलू यह है कि इसे मौजूदा सड़क नेटवर्क के साथ किस तरह जोड़ा जाए, इसका अध्ययन भी किया जाएगा। एलिवेटेड सड़क के ऊपर से लंबी दूरी का यातायात निकाला जा सकता है, जबकि नीचे की सड़क का इस्तेमाल स्थानीय यातायात के लिए किया जा सकेगा। इससे कई जगहों पर आमने-सामने आने वाले ट्रैफिक को अलग करने में मदद मिल सकती है।

हालांकि, अभी परियोजना निर्माण के स्तर पर नहीं पहुंची है। फिलहाल सरकार ने व्यवहार्यता अध्ययन को मंजूरी दी है। अध्ययन की रिपोर्ट के आधार पर ही आगे निर्माण को लेकर अंतिम निर्णय लिया जाएगा।

प्रस्तवित अध्यन पर होंगे रु3.50 करोड़ चर्च 

लोक निर्माण विभाग की ओर से प्रस्तावित अध्ययन पर 3,50,81,500 रुपये खर्च किए जाएंगे। इस अध्ययन का मकसद केवल सड़क की लंबाई तय करना नहीं होगा, बल्कि पूरे कॉरिडोर की यातायात और इंजीनियरिंग जरूरतों को समझना होगा।

इसके लिए अलग-अलग स्तर पर जानकारी जुटाई जाएगी। 24 घंटे और पूरे सप्ताह का ट्रैफिक सर्वे कराया जाएगा, ताकि यह पता चल सके कि दिन के अलग-अलग समय में सड़क पर वाहनों का दबाव कितना रहता है। इसके साथ ही संभावित एलाइनमेंट, प्रारंभिक इंजीनियरिंग डिजाइन, अलग-अलग निर्माण विकल्प और अनुमानित लागत का भी आकलन किया जाएगा।

अध्ययन में यह भी देखा जाएगा कि एलिवेटेड कॉरिडोर बनने के बाद आसपास के सड़कों और चौराहों पर यातायात का क्या प्रभाव पड़ेगा। इसके आधार पर ट्रैफिक सुधार के विकल्प तैयार किए जाएंगे और अंत में विस्तृत परियोजना रिपोर्ट यानी DPR तैयार की जाएगी।

छह लाल बत्तियां बनती हैं जाम की बड़ी वजह

रानी झांसी रोड टी-प्वाइंट से पंजाबी बाग वेस्ट मेट्रो स्टेशन तक का यह रास्ता दूरी के लिहाज से ज्यादा लंबा नहीं है, लेकिन कई प्रमुख चौराहों और ट्रैफिक सिग्नलों के कारण यहां यात्रा का समय काफी बढ़ जाता है।

इस पूरे कॉरिडोर में प्रमुख रूप से करीब छह लाल बत्तियां आती हैं। इनमें कमल टी-प्वाइंट/लिबर्टी सिनेमा, आनंद पर्वत, दया बस्ती/सराय रोहिला कट, इंद्रलोक मेट्रो स्टेशन मोड़, अशोक पार्क मेन और पंजाबी बाग चौक/रिंग रोड क्रॉसिंग शामिल हैं।

सामान्य परिस्थितियों में जिस दूरी को तय करने में करीब 10 मिनट लगने चाहिए, ट्रैफिक सिग्नलों और वाहनों के दबाव के कारण इसमें 25 से 30 मिनट तक लग जाते हैं। पीक आवर या ज्यादा जाम की स्थिति में यही सफर और लंबा हो जाता है और कई बार करीब 45 मिनट तक भी पहुंच जाता है।

यही वजह है कि इस पूरे मार्ग को एलिवेटेड करने की संभावना पर विचार किया जा रहा है।

पहले सिर्फ जखीरा से करमपुरा तक था सड़क बनने का प्रस्ताव

न्यू रोहतक रोड पर एलिवेटेड कॉरिडोर की योजना पूरी तरह नई नहीं है। इससे पहले भी इस क्षेत्र में ट्रैफिक समस्या को देखते हुए एलिवेटेड सड़क का प्रस्ताव सामने आ चुका है।

2024 के एक पुराने प्रस्ताव में जखीरा और करमपुरा फ्लाईओवर को आपस में जोड़ने वाले करीब 2.2 किलोमीटर लंबे फ्लाईओवर की जरूरत बताई गई थी। उस समय योजना का फोकस मुख्य रूप से जखीरा और करमपुरा के बीच यातायात को सुगम बनाने पर था।

अब सरकार का दायरा इससे काफी बड़ा नजर आ रहा है। मौजूदा स्वीकृति के तहत सिर्फ जखीरा-करमपुरा के छोटे हिस्से के बजाय रानी झांसी रोड टी-प्वाइंट से पंजाबी बाग वेस्ट मेट्रो स्टेशन तक करीब सात किलोमीटर के पूरे मार्ग को एलिवेटेड करने की व्यवहार्यता जांची जाएगी।

यानी पहले जहां एक छोटे हिस्से के फ्लाईओवर की बात थी, वहीं अब पूरे कॉरिडोर को एक व्यापक एलिवेटेड कनेक्टिविटी के रूप में देखने की तैयारी है।

आनंद पर्वत और जखीरा के जाम पर रहेगा  खास फोकस

दिल्ली में आनंद पर्वत और जखीरा क्षेत्र लंबे समय से भारी यातायात दबाव वाले इलाकों में शामिल रहे हैं। यहां अलग-अलग दिशाओं से आने वाला स्थानीय और लंबी दूरी का यातायात एक-दूसरे से मिलता है। इसके अलावा आसपास के औद्योगिक और रिहायशी इलाकों से आने-जाने वाले वाहनों का दबाव भी सड़क पर रहता है। 

एलिवेटेड कॉरिडोर बनने की स्थिति में मुख्य यातायात को ऊपर से निकालने का विकल्प मिल सकता है। इससे नीचे की सड़क पर स्थानीय वाहनों के लिए ज्यादा जगह उपलब्ध होने की संभावना है। हालांकि, यह तभी संभव होगा जब व्यवहार्यता अध्ययन में प्रस्तावित डिजाइन, एलाइनमेंट और कनेक्टिविटी को व्यावहारिक पाया जाए। इसी वजह से सरकार ने पहले विस्तृत अध्ययन कराने का फैसला किया है।

जाने किन- किन इलाकों को मिल सकती है राहत?

प्रस्तावित कॉरिडोर का असर सिर्फ रानी झांसी रोड या पंजाबी बाग तक सीमित नहीं रहेगा। इसके आसपास के कई महत्वपूर्ण इलाकों में यातायात व्यवस्था पर इसका प्रभाव पड़ सकता है। आनंद पर्वत, जखीरा, करमपुरा, मोती नगर, पंजाबी बाग, न्यू मोती नगर, नारंग कॉलोनी और चंदर नगर जैसे इलाकों को सीधे या अप्रत्यक्ष रूप से लाभ मिलने की उम्मीद है। इसके अलावा पश्चिमी दिल्ली की ओर जाने वाले यातायात के लिए भी यह कॉरिडोर महत्वपूर्ण हो सकता है। रानी झांसी रोड और नई दिल्ली की ओर से आने वाले वाहन इस मार्ग के जरिए पश्चिमी और बाहरी दिल्ली की ओर आगे बढ़ते हैं। ऐसे में यहां ट्रैफिक फ्लो बेहतर होने का असर आसपास के लिंक रोड और चौराहों पर भी पड़ सकता है।

मेट्रो कनेक्टिविटी के साथ सड़क यातायात को भी इसका फायदा

प्रस्तावित कॉरिडोर का अंतिम हिस्सा पंजाबी बाग वेस्ट मेट्रो स्टेशन के पास है। ऐसे में भविष्य में एलिवेटेड रोड और मौजूदा मेट्रो नेटवर्क के बीच बेहतर इंटरचेंज और कनेक्टिविटी की संभावनाओं का भी अध्ययन किया जा सकता है।
दिल्ली जैसे महानगर में सड़क और सार्वजनिक परिवहन के बीच बेहतर तालमेल महत्वपूर्ण है। यदि एलिवेटेड मार्ग के कारण सड़क पर रुकावटें कम होती हैं और प्रमुख जंक्शनों पर यातायात का दबाव घटता है, तो इससे निजी वाहनों के साथ बस और अन्य सार्वजनिक परिवहन को भी फायदा मिल सकता है।

अध्ययन में तय होगा एलिवेटेड रोड का असली डिजाइन

फिलहाल यह कहना जल्दबाजी होगी कि सात किलोमीटर का पूरा मार्ग एक ही एलिवेटेड स्ट्रक्चर के रूप में बनेगा या अलग-अलग हिस्सों में इसका निर्माण होगा। यह फैसला व्यवहार्यता अध्ययन और DPR के आधार पर लिया जाएगा।

अध्ययन में अलाइनमेंट, इंजीनियरिंग डिजाइन, यातायात क्षमता, निर्माण लागत, भूमि और मौजूदा इंफ्रास्ट्रक्चर पर प्रभाव जैसे पहलुओं की जांच की जाएगी। इसके बाद अलग-अलग विकल्पों की तुलना करके सबसे उपयुक्त मॉडल चुना जाएगा।

यानी अभी सरकार ने निर्माण की अंतिम मंजूरी नहीं दी है, बल्कि उस दिशा में आगे बढ़ने के लिए जरूरी पहला बड़ा प्रशासनिक कदम उठाया है।

लाखों लोगों के रोजाना सफर पर पड़ सकता है असर

न्यू रोहतक रोड और इससे जुड़े इलाकों से रोजाना बड़ी संख्या में लोग काम, कारोबार, शिक्षा और अन्य जरूरतों के लिए आवागमन करते हैं। मौजूदा मार्ग पर बार-बार लगने वाले जाम के कारण न सिर्फ यात्रियों का समय बर्बाद होता है, बल्कि ईंधन की खपत और सड़क पर वाहनों का दबाव भी बढ़ता है।

ऐसे में अगर अध्ययन के बाद सात किलोमीटर लंबे एलिवेटेड कॉरिडोर को मंजूरी मिलती है और इसका निर्माण पूरा होता है, तो दिल्ली के इस हिस्से में यात्रा समय कम करने और ट्रैफिक फ्लो सुधारने में मदद मिल सकती है। 

फिलहाल निगाहें अब PWD के विस्तृत व्यवहार्यता अध्ययन पर हैं। इसकी रिपोर्ट से यह स्पष्ट होगा कि रानी झांसी रोड टी-प्वाइंट से पंजाबी बाग वेस्ट मेट्रो स्टेशन तक प्रस्तावित एलिवेटेड कॉरिडोर किस डिजाइन में सबसे बेहतर रहेगा, इसकी लागत कितनी होगी और इसे किस चरण में आगे बढ़ाया जा सकता है। यदि परियोजना व्यवहार्य पाई जाती है, तो यह जखीरा-आनंद पर्वत-पंजाबी बाग बेल्ट में ट्रैफिक सुधार के लिए दिल्ली की एक बड़ी सड़क परियोजना बन सकती है।

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