यहां बनेगा सेमीकंडक्टर उद्योग का बड़ा हब ! 3706 करोड़ रुपये HCL करेगा निवेश, जाने क्या होगा फायदा ?

 | 
यहां बनेगा सेमीकंडक्टर उद्योग का बड़ा हब ! 3706 करोड़ रुपये HCL करेगा निवेश, जाने क्या होगा फायदा ?

Udaipur Times, Greater Noida Semiconductor Hub : ग्रेटर नोएडा और यमुना एक्सप्रेसवे औद्योगिक विकास प्राधिकरण यानी YEIDA क्षेत्र में सेमीकंडक्टर उद्योग को बड़ा बढ़ावा मिलने जा रहा है। HCL ने क्षेत्र में पहला विशेष आर्थिक क्षेत्र यानी SEZ विकसित करने का प्रस्ताव यीडा को दिया है। कंपनी की योजना सेक्टर-28 में सेमीकंडक्टर चिप निर्माण के लिए आवंटित 48 एकड़ जमीन में से 24 एकड़ पर SEZ विकसित करने की है। 

यह जमीन एचसीएल फॉक्सकॉन की संयुक्त इकाई इंडिया चिप प्राइवेट लिमिटेड को सेमीकंडक्टर चिप निर्माण के लिए आवंटित की गई है। प्रस्तावित SEZ का उद्देश्य केवल चिप निर्माण तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि इसके आसपास सेमीकंडक्टर उद्योग से जुड़ी सहयोगी इकाइयों और सप्लाई चेन का इकोसिस्टम तैयार करने की दिशा में भी काम किया जाएगा।

3706 करोड़ रुपये से ज्यादा का निवेश हुआ प्रस्तावित

इंडिया चिप प्राइवेट लिमिटेड की ओर से प्रदेश की पहली सेमीकंडक्टर इकाई में करीब 3,706.15 करोड़ रुपये के निवेश का प्रस्ताव है। इस यूनिट में मुख्य रूप से स्मॉल पैनल ड्राइवर IC और डिस्प्ले इंटीग्रेटेड सर्किट का निर्माण किया जाना है। ये सेमीकंडक्टर चिप्स मोबाइल फोन, टीवी, कंप्यूटर और अन्य इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस की स्क्रीन से जुड़ी तकनीक में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। ऐसे में इस परियोजना के शुरू होने से उत्तर प्रदेश में इलेक्ट्रॉनिक्स और सेमीकंडक्टर मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।

DDIC और OSAT सुविधा से लैस होगी नई यूनिट

प्रस्तावित सेमीकंडक्टर यूनिट में DDIC यानी Display Driver Integrated Circuit और OSAT यानी Outsourced Semiconductor Assembly and Test जैसी सुविधाएं शामिल होंगी। DDIC का इस्तेमाल इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस के डिस्प्ले को नियंत्रित करने के लिए किया जाता है। वहीं OSAT सुविधा से सेमीकंडक्टर चिप की असेंबली, पैकेजिंग और टेस्टिंग से जुड़ी गतिविधियां की जा सकती हैं। इस तरह परियोजना में चिप निर्माण से जुड़ी अहम प्रक्रियाओं को एक ही औद्योगिक इकोसिस्टम में विकसित करने की दिशा में काम किया जा रहा है।

HCL ने 24 एकड़ में SEZ बनाने का दिया प्रस्ताव

HCL की ओर से यीडा को दिए गए प्रस्ताव के मुताबिक, आवंटित 48 एकड़ जमीन में से 24 एकड़ क्षेत्र को विशेष आर्थिक क्षेत्र के रूप में विकसित करने की योजना है। SEZ बनने के बाद इस क्षेत्र में सेमीकंडक्टर उद्योग से जुड़ी अन्य सहयोगी और सपोर्टिंग कंपनियों को भी जगह मिल सकती है। इससे चिप निर्माण के लिए जरूरी कंपोनेंट, उपकरण, पैकेजिंग, टेस्टिंग और अन्य सेवाओं से जुड़ी कंपनियों को एक ही क्षेत्र में विकसित करने का रास्ता खुल सकता है। इसका उद्देश्य सेमीकंडक्टर उद्योग के लिए स्थानीय स्तर पर एक मजबूत इकोसिस्टम और सप्लाई चेन तैयार करना है।

सप्लाई चेन मजबूत होने से कम हो सकती है लॉजिस्टिक की लागत

सेमीकंडक्टर उद्योग में कई तरह के कंपोनेंट और तकनीकी सेवाओं की जरूरत होती है। अगर इनसे जुड़ी सहयोगी इकाइयां मुख्य चिप निर्माण यूनिट के आसपास स्थापित होती हैं तो कंपनियों के बीच सप्लाई और सामान की आवाजाही आसान हो सकती है। इससे सप्लाई चेन को सुगम बनाने और लॉजिस्टिक लागत कम करने में मदद मिल सकती है। साथ ही कंपनियों को जरूरी सामग्री और सेवाएं अपेक्षाकृत कम दूरी पर उपलब्ध होने का फायदा मिल सकता है। SEZ के रूप में विकसित होने पर क्षेत्र में सेमीकंडक्टर उद्योग से जुड़ी नई कंपनियों के निवेश को आकर्षित करने की संभावना भी बढ़ सकती है।

SEZ प्रस्ताव पर यीडा बोर्ड लेगा अहम फैसला

HCL के SEZ प्रस्ताव पर अंतिम फैसला यीडा बोर्ड की ओर से किया जाएगा। प्राधिकरण की ओर से प्रस्ताव की निर्धारित नीति और नियमों के अनुसार समीक्षा की जाएगी।यीडा के सीईओ राकेश कुमार सिंह के मुताबिक, कंपनी की ओर से दिए गए SEZ प्रस्ताव पर निर्धारित नीति के अनुरूप फैसला किया जाएगा। इस संबंध में जल्द ही बैठक होने की संभावना है।यानी फिलहाल 24 एकड़ में SEZ विकसित करने का प्रस्ताव यीडा के सामने है और इसकी स्वीकृति के बाद आगे की प्रक्रिया शुरू होगी।

सेमीकंडक्टर उद्योग के लिए क्यों अहम है यह कदम?

सेमीकंडक्टर आज मोबाइल, कंप्यूटर, टीवी, ऑटोमोबाइल, इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों और कई आधुनिक तकनीकों का अहम हिस्सा है। भारत में इलेक्ट्रॉनिक्स और चिप निर्माण को बढ़ावा देने के लिए मैन्युफैक्चरिंग क्षमता विकसित करने पर जोर दिया जा रहा है। ग्रेटर नोएडा और यीडा क्षेत्र में सेमीकंडक्टर से जुड़ी बड़ी परियोजनाओं के आने से यहां इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग, सप्लाई चेन और सहायक उद्योगों के लिए नए अवसर पैदा हो सकते हैं। HCL की ओर से SEZ का प्रस्ताव इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

SEZ मिलने पर कंपनियों को क्या होंगे फायदे?

विशेष आर्थिक क्षेत्र के तहत निर्धारित नियमों के अनुसार कंपनियों को कई तरह की सुविधाएं और प्रोत्साहन मिल सकते हैं। इनमें कर संबंधी लाभ, आयात शुल्क में छूट और कुछ घरेलू खरीद पर शुल्क से जुड़ी सुविधाएं शामिल हो सकती हैं। प्रस्तावित व्यवस्था के तहत निर्यात आय पर शुरुआती वर्षों में निर्धारित नियमों के अनुसार टैक्स लाभ का प्रावधान भी बताया गया है। इसके अलावा SEZ डेवलपर को निर्माण और विकास के लिए जरूरी कुछ वस्तुओं के आयात पर शुल्क संबंधी छूट का लाभ मिल सकता है। हालांकि, वास्तविक लाभ लागू कानूनों, SEZ की मंजूरी, संबंधित यूनिट की पात्रता और उस समय लागू सरकारी नियमों पर निर्भर करेंगे।

निर्यात और निवेश को भी मिल सकता है बढ़ावा

SEZ का एक प्रमुख उद्देश्य निर्यात आधारित गतिविधियों को बढ़ावा देना है। ऐसे में अगर सेमीकंडक्टर निर्माण से जुड़ी कंपनियां इस क्षेत्र में स्थापित होती हैं तो यहां से इलेक्ट्रॉनिक कंपोनेंट और सेमीकंडक्टर उत्पादों के निर्यात की संभावनाएं भी बढ़ सकती हैं। इसके साथ ही सपोर्टिंग कंपनियों के आने से क्षेत्र में निजी निवेश और औद्योगिक गतिविधियों को बढ़ावा मिल सकता है। इससे स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर पैदा होने की संभावना भी है।

पीएम मोदी ने किया था परियोजना का शिलान्यास

इंडिया चिप प्राइवेट लिमिटेड की सेमीकंडक्टर परियोजना का 21 फरवरी को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शिलान्यास किया था। अब इसी परियोजना के तहत HCL की ओर से 24 एकड़ में SEZ विकसित करने का प्रस्ताव दिया गया है। अगर प्रस्ताव को मंजूरी मिलती है तो सेमीकंडक्टर चिप निर्माण यूनिट के आसपास सहयोगी कंपनियों को विकसित करने के लिए एक अलग औद्योगिक क्षेत्र तैयार किया जा सकेगा। इससे यीडा क्षेत्र में सेमीकंडक्टर उद्योग का दायरा बढ़ाने में मदद मिल सकती है।

ग्रेटर नोएडा में तैयार होगा सेमीकंडक्टर इकोसिस्टम

कुल मिलाकर HCL का 24 एकड़ में SEZ विकसित करने का प्रस्ताव ग्रेटर नोएडा और यीडा क्षेत्र में सेमीकंडक्टर उद्योग के विस्तार के लिहाज से महत्वपूर्ण है। करीब 3,706 करोड़ रुपये के प्रस्तावित निवेश वाली इंडिया चिप परियोजना के साथ अगर सहयोगी इकाइयां भी विकसित होती हैं, तो यहां चिप निर्माण से लेकर असेंबली, टेस्टिंग और सप्लाई चेन तक का इकोसिस्टम तैयार हो सकता है। फिलहाल SEZ प्रस्ताव पर यीडा बोर्ड के फैसले का इंतजार है। मंजूरी मिलने के बाद इस दिशा में आगे की औद्योगिक और निवेश गतिविधियों को गति मिलने की उम्मीद है।

Follow UdaipurTimes on Facebook , Instagram , and Google News