यहां बनेगा रक्षा-एयरोस्पेस विनिर्माण का हब ! निवेश और स्वदेशीकरण से MSMI को मिलेगा बढ़ावा
Udaipur Times, Defence and aerospace manufacturing : स्वदेशीकरण, नवाचार और निर्यात के माध्यम से रक्षा और एयरोस्पेस क्षेत्र में MSMEs को सशक्त बनाया जा रहा है। डिफेंस इंडस्ट्रियल कॉरिडोर के अलीगढ़ नोड में, तीन कंपनियां रक्षा और एयरोस्पेस उत्पादों के निर्माण में शामिल होंगी, जबकि दो अन्य कंपनियां पहले से ही इस क्षेत्र के लिए पुर्जों का निर्माण कर रही हैं। अलीगढ़ रक्षा और एयरोस्पेस का एक प्रमुख केंद्र बनने जा रहा है।
चार प्रमुख इकाइयों में उत्पादन पहले ही शुरू
रक्षा सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों (PSUs), उद्योग प्रतिनिधियों और निजी क्षेत्र की कंपनियों ने 40 मिलियन (4 करोड़) के निवेश का वादा किया है। चार प्रमुख इकाइयों में उत्पादन पहले ही शुरू हो चुका है। इनमें से तीन कंपनियां वर्तमान में सैन्य लड़ाकू विमानों में इस्तेमाल होने वाले रडार सिस्टम के लिए हार्डवेयर और पुर्जों का निर्माण कर रही हैं। इसके अलावा, सशस्त्र बलों के लिए ड्रोन भी विकसित किए जा रहे हैं। ये कंपनियां अंतरराष्ट्रीय बाजार में निर्यातक के रूप में अपनी मजबूत उपस्थिति दर्ज कराने के लिए भी उत्सुक हैं।
दुनिया के कुछ सबसे उन्नत ड्रोन बनाने की योजना
सोसाइटी ऑफ इंडियन डिफेंस मैन्युफैक्चरर्स (SIDM) से जुड़ा काम अपने अंतिम चरण में है। उत्तर प्रदेश एक्सप्रेसवे औद्योगिक विकास प्राधिकरण (UPEIDA) के अंतर्गत विकसित 'उत्तर प्रदेश डिफेंस इंडस्ट्रियल कॉरिडोर' (UPDIC) ने खैर रोड पर अंडला में एक नोड स्थापित किया है। सोसाइटी ऑफ इंडियन डिफेंस मैन्युफैक्चरर्स (SIDM) के सहयोग से निवेशकों के साथ समन्वय करने के प्रयास पूरे होने वाले हैं।
बेंगलुरु स्थित फर्म, 'न्यूस्पेस रिसर्च एंड टेक्नोलॉजीज' के लिए एक फैक्ट्री का निर्माण चल रहा है। 'एंकर रिसर्च लैब्स' भी अपनी सुविधा का निर्माण कर रही है, जिसका प्रबंधन अगले साल तक उत्पादन शुरू करने का लक्ष्य लेकर चल रहा है; कंपनी दुनिया के कुछ सबसे उन्नत ड्रोन बनाने की योजना बना रही है।
'रक्षा उत्पादन विभाग' ने इन कंपनियों को लाइसेंस जारी किए
रक्षा मंत्रालय के अंतर्गत आने वाले 'रक्षा उत्पादन विभाग' (Department of Defence Production) ने इन कंपनियों को लाइसेंस जारी किए हैं। 'नृत्य क्रिएशन प्राइवेट लिमिटेड' ने लड़ाकू विमानों के लिए पुर्जों का निर्माण शुरू कर दिया है, जबकि 'इंडियन डाईकास्टिंग' के अंशुमान लड़ाकू विमानों के लिए डाई-कास्ट पुर्जों का निर्माण कर रहे हैं।
भूमि आवंटन की प्रक्रिया जारी
डिफेंस कॉरिडोर परियोजना का दूसरा चरण कोल तहसील में GT रोड पर स्थित जसराथपुर सिहोर में विकसित किया जा रहा है। प्रशासन ने इस उद्देश्य के लिए 87 हेक्टेयर भूमि निर्धारित की है। भूमि आवंटन की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है।