दिल्ली मे दंगे के खिलाफ शांति और अमन चैन का संदेश देने के लिए बनायी मानवश्रृंखला
उदयपुर 27 फरवरी 2020। दिल्ली मे हो रही दंगो के खिलाफ जिसमे 32 मासूम लोगो की जाने जा चुकी है। उदयपुर के न्यायप्रिय, लोकतंत्रपसंद, धर्म-निरपेक्षता संविधान मे विश्वास रखने वाले नागरिकों ने सद्भावना और अमन चैन के संदेश के लिए कोर्ट चौराहा स्थित अम्बेडकर मूर्ति पर मानव श्रृंखला बनायी।
प्रदर्शन कर रहे लोगों के दंगों मे मारे गए लोगो को दो मिनट का मौन रख कर श्रदांजलि दी। इससे पहले चौराहे पर मार्च निकाल कर दंगे रोकने, भड़काऊ भाषण देने के दोषी नेताओं कपिल मिश्रा, अनुराग ठाकुर, परवेश वर्मा पर एफआईदर्ज दर्ज करने, और गृहमंत्री अमित शाह के इस्तीफे की मांग से संबंधित नारे लगाते हुए मार्च निकाला।
इस मौके पर बोलते हुए भाकपा-माले के शंकरलाल चौधरी ने कहा कि झारखंड और दिल्ली मे चुनाव मे हार से बौखलाई पार्टी नफरत उन्माद फैलाने की नीयत से खुले आम दंगे कराने पर उतर आयी है। दिल्ली पुलिस का दंगाईयो और भड़काऊ भाषण देने वाले नेताओं पर नरमी के रुख के खिलाफ सख्ती से पेश आ रहे दिल्ली हाई कोर्ट के जज मुरलीधर का जिस तरह से रातोंरात ट्रांसफर किया गया उससे साफ है दंगाईयो को बचाने के लिए दिल्ली पुलिस को ऊपर से राजनीतिक संरक्षण मिल रहा है।
माकपा के राजेश सिंघवी ने कहा कि आर्थिक मोर्चे पर पूरी तरह से विफल केंद्र सरकार अंग्रेज़ो का बाटो और राज करो का खेल खेल रही है। दिल्ली मे सीएए-एनआरसी के विरोध मे महीनों से चल रहे शान्तिपूर्ण प्रदर्शनों को रोकने की नीयत से दंगे भड़काए जा रहे है जिसमे साफतौर पर दिल्ली पुलिस ने अपनी संविधानिक जिम्मेदारी का पालना नहीं करते हुए लोगों को दंगाई भीड़ द्वारा हिंसा का शिकार होने दिया। गृहमंत्री भी अपनी संविधानिक जिम्मेदारी नहीं निभा रहे है और अभी तक भड़काऊ भाषण देने वाले नेताओं कपिल मिश्रा, परवेश वर्मा और अनुराग ठाकुर पर एफआईआर तक दर्ज नहीं कि गयी है।
सरवत खान ने सभा को संबोधित करते हुए कहा कि आज जरूरत है कि नफरत उन्माद के खिलाफ उदयपुर शहर के अमनपसंद, लोकतंत्रपसंद, न्यायपसंद, संविधान मे और बिस्मिल अशफाकुल्लाह की साझी विरासत और साझी शहादत मे विश्वास रखने वाले लोग सद्भावना और धर्म निरपेक्षता के के संदेश को लेकर आम लोगो के बीच जाए।
इस मौके पर अख्तर हुसैन, अधिवक्ता पी. आर. साल्वी, बी. एल. छानवाल, हरीश कुमार, पवन बेनीवाल, प्रोफेसर सुधा चौधरी, प्रोफेसर हेमेंद्र चंडालिया, बादल, प्रोफेसर लालूराम पटेल आदि मौजूद थे ।