2077 करोड़ में यहां बनेगा नया फोर-लेन हाईवे, जाने कहां-कहां से होकर गुजरेगा ?
Udaipur Times, New Delhi : भारत सरकार ने रणनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण सिलीगुड़ी कॉरिडोर यानी ‘चिकन नेक’ क्षेत्र में सड़क कनेक्टिविटी को मजबूत करने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। केंद्र ने पश्चिम बंगाल के दार्जिलिंग जिले में बागडोगरा-पानीटंकी-खारीबारी-गलगलिया सेक्शन को चार लेन में विकसित करने के लिए 2,077.18 करोड़ रुपये की मंजूरी दी है।
प्रस्तावित हाईवे की लंबाई करीब 31.02 किलोमीटर होगी। यह सड़क नेशनल हाईवे-327 (NH-327) का हिस्सा होगी और मौजूदा NH-27 के समानांतर विकसित की जाएगी। परियोजना का उद्देश्य सिलीगुड़ी कॉरिडोर में वैकल्पिक सड़क संपर्क तैयार करने के साथ-साथ पूर्वोत्तर राज्यों को देश के बाकी हिस्सों से जोड़ने वाली कनेक्टिविटी को मजबूत करना है।
बागडोगरा से गलगलिया तक बनेगा चार लेन हाईवे
केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए इस परियोजना के लिए फंड मंजूर किए जाने की जानकारी दी। प्रस्तावित चार लेन सड़क बागडोगरा से शुरू होकर पानीटंकी और खारीबारी होते हुए बिहार के गलगलिया तक जाएगी। इस नए मार्ग को मौजूदा NH-27 से करीब 20 से 30 किलोमीटर की दूरी पर विकसित किया जाएगा। इससे सिलीगुड़ी क्षेत्र में सड़क नेटवर्क को एक वैकल्पिक मार्ग मिलने की उम्मीद है।
तीन बड़े पुल और पांच एलिफेंट अंडरपास
परियोजना में सिर्फ सड़क निर्माण ही नहीं, बल्कि कई महत्वपूर्ण ढांचागत सुविधाएं भी शामिल हैं। प्रस्तावित हाईवे पर तीन बड़े पुल और एक ओवरब्रिज बनाया जाएगा। इसके अलावा हाथियों और अन्य वन्यजीवों की सुरक्षित आवाजाही के लिए पांच अंडरपास बनाए जाने की योजना है। हाईवे के दोनों ओर सर्विस लेन भी विकसित की जाएंगी। इससे स्थानीय यातायात को मुख्य फोर-लेन मार्ग से अलग रखने और सड़क सुरक्षा बेहतर करने में मदद मिल सकती है।
क्यों अहम है सिलीगुड़ी कॉरिडोर?
सिलीगुड़ी कॉरिडोर भारत के मुख्य भूभाग को पूर्वोत्तर राज्यों से जोड़ने वाला बेहद महत्वपूर्ण भू-भाग है। इसे आम तौर पर ‘चिकन नेक’ कहा जाता है। इसके जरिए देश के बाकी हिस्सों से सिक्किम और पूर्वोत्तर के अन्य राज्यों तक सड़क और रेल संपर्क जुड़ता है। कॉरिडोर का सबसे संकरा हिस्सा करीब 20-22 किलोमीटर चौड़ा बताया जाता है। इसकी भौगोलिक स्थिति को देखते हुए यहां सड़क, रेल और अन्य बुनियादी ढांचे का विस्तार रणनीतिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण माना जाता है।
गलगलिया और पानीटंकी का क्या महत्व है?
गलगलिया बिहार के किशनगंज जिले में स्थित है, जबकि पानीटंकी पश्चिम बंगाल के दार्जिलिंग जिले में नेपाल सीमा के पास है। पानीटंकी-खारीबारी क्षेत्र नेपाल के साथ सड़क संपर्क के लिहाज से भी महत्वपूर्ण है। ऐसे में बागडोगरा से गलगलिया तक फोर-लेन सड़क बनने से इस क्षेत्र में यातायात और माल ढुलाई की क्षमता बढ़ने की उम्मीद है।
रेल कनेक्टिविटी को भी मजबूत करने की तैयारी
सिलीगुड़ी कॉरिडोर के आसपास सड़क के साथ-साथ रेल इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करने की दिशा में भी योजनाएं सामने आई हैं। पिछले कुछ समय में इस क्षेत्र में रेलवे कनेक्टिविटी और रणनीतिक बुनियादी ढांचे को बढ़ाने पर जोर दिया गया है। रिपोर्टों के मुताबिक, सिलीगुड़ी के आसपास करीब 35 किलोमीटर लंबी अंडरग्राउंड रेलवे लाइन की योजना पर भी काम प्रस्तावित है।
इसके अलावा मालदा से न्यू जलपाईगुड़ी (NJP) तक रेल कनेक्टिविटी को मजबूत करने और वाराणसी-न्यू जलपाईगुड़ी हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर की योजना भी चर्चा में रही है। सड़क और रेल दोनों स्तरों पर इन परियोजनाओं का विस्तार सिलीगुड़ी कॉरिडोर में कनेक्टिविटी को मजबूत करने के साथ-साथ पूर्वोत्तर के लिए परिवहन नेटवर्क को अधिक सक्षम बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।