एक साल का काम 3 महीने में होगा पूरा ! 3D प्रिंटिंग के साथ ऐसे बनाए अपने नए घर का डिजाइन, जाने पूरा प्लान ?

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एक साल का काम 3 महीने में होगा पूरा ! 3D प्रिंटिंग के साथ ऐसे बनाए अपने नए घर का डिजाइन, जाने पूरा प्लान ?

Udaipur Times, 3D Printed House : घर बनवाना आमतौर पर लंबी प्रक्रिया होती है। जमीन तैयार करने से लेकर नींव, दीवार, छत, प्लास्टर और फिनिशिंग तक कई चरणों से गुजरना पड़ता है। इसमें महीनों से लेकर कई बार एक साल या उससे भी ज्यादा समय लग सकता है। लेकिन अब 3D प्रिंटिंग टेक्नोलॉजी कंस्ट्रक्शन सेक्टर में इस प्रक्रिया को बदलने की दिशा में काम कर रही है। इस तकनीक की मदद से घर के कई हिस्सों को पारंपरिक तरीके से ईंट-दर-ईंट बनाने के बजाय मशीन की मदद से परत-दर-परत तैयार किया जा सकता है। 

3D प्रिंटिंग से घर बनाने का सबसे बड़ा आकर्षण इसका संभावित कम निर्माण समय है। कुछ परियोजनाओं में मुख्य स्ट्रक्चर को पारंपरिक निर्माण की तुलना में काफी तेजी से तैयार किया गया है। हालांकि, पूरे घर को केवल कुछ दिनों में तैयार कर देना हर प्रोजेक्ट में संभव नहीं होता, क्योंकि नींव, इलेक्ट्रिकल वायरिंग, प्लंबिंग, दरवाजे-खिड़कियां, छत, फर्श और फिनिशिंग जैसे काम अलग-अलग समय ले सकते हैं।

ईंट-दर-ईंट दीवार बनाने के बजाय मशीन करेगी काम

पारंपरिक निर्माण में दीवारें बनाने के लिए ईंट, सीमेंट और दूसरे मटीरियल का इस्तेमाल किया जाता है। मजदूर ईंटों को एक के ऊपर एक लगाकर दीवार तैयार करते हैं और इसके बाद प्लास्टर तथा फिनिशिंग का काम किया जाता है। 3D प्रिंटिंग कंस्ट्रक्शन में इस प्रक्रिया का एक हिस्सा ऑटोमेटेड हो जाता है। इसमें एक बड़ी 3D प्रिंटर मशीन को तय डिजाइन और डिजिटल मॉडल के अनुसार चलाया जाता है। मशीन विशेष कंस्ट्रक्शन मटीरियल को निर्धारित जगह पर एक के ऊपर एक परत के रूप में डालती जाती है। धीरे-धीरे ये परतें दीवार का आकार लेने लगती हैं। इस तरह डिजिटल डिजाइन के आधार पर घर का स्ट्रक्चरल हिस्सा तैयार किया जा सकता है।

पहले कंप्यूटर पर तैयार होता है घर का डिजाइन

3D प्रिंटेड घर बनाने की प्रक्रिया की शुरुआत डिजिटल डिजाइन से होती है। इंजीनियर और आर्किटेक्ट कंप्यूटर पर घर का मॉडल तैयार करते हैं। इसमें कमरे, दीवारों की मोटाई, दरवाजों और खिड़कियों की जगह तथा दूसरी डिजाइन संबंधी जरूरतों को शामिल किया जाता है। इसके बाद इसी डिजिटल मॉडल को 3D प्रिंटर के लिए उपयोग किया जाता है। मशीन को निर्देश दिए जाते हैं कि उसे किस रास्ते पर और कितनी मात्रा में कंस्ट्रक्शन मटीरियल डालना है। इससे निर्माण प्रक्रिया में डिजाइन के अनुसार सटीकता बनाए रखने में मदद मिल सकती है।

कंस्ट्रक्शन साइट पर पहुंचती है बड़ी 3D प्रिंटर मशीन

घर बनाने के लिए इस्तेमाल होने वाली 3D प्रिंटिंग मशीन सामान्य घरेलू प्रिंटर जैसी नहीं होती। यह काफी बड़ी मशीन होती है, जिसे निर्माण स्थल पर स्थापित किया जाता है। मशीन में कंस्ट्रक्शन मटीरियल पहुंचाने के लिए पंप और पाइप सिस्टम का इस्तेमाल किया जाता है। 

प्रिंटर के नोजल से मटीरियल बाहर निकलता है और निर्धारित स्थान पर एक समान परत में जमा होता जाता है। कंप्यूटर से मिले निर्देशों के आधार पर मशीन दीवार की लंबाई, ऊंचाई और डिजाइन के अनुसार आगे बढ़ती है। इससे बड़ी संख्या में ईंटें लगाने और कुछ मैनुअल काम की जरूरत कम हो सकती है।

एक साल का काम कुछ महीनों में पूरा होने का दावा क्यों?

3D प्रिंटिंग कंस्ट्रक्शन में तेजी का मुख्य कारण ऑटोमेशन है। पारंपरिक निर्माण में दीवारों को तैयार करने में बड़ी संख्या में मजदूरों और कई चरणों की जरूरत पड़ती है। वहीं 3D प्रिंटर लगातार निर्धारित डिजाइन के अनुसार प्रिंटिंग कर सकता है। इसी वजह से कुछ प्रोजेक्ट्स में निर्माण के मुख्य स्ट्रक्चर को काफी कम समय में पूरा करने के दावे किए गए हैं। 

हालांकि, 'एक साल का पूरा घर सिर्फ कुछ दिनों में' जैसी बात को हर प्रोजेक्ट पर लागू नहीं किया जा सकता। घर की डिजाइन, आकार, मंजिलों की संख्या, मौसम, साइट की स्थिति और बाकी निर्माण कार्यों के आधार पर वास्तविक समय अलग हो सकता है।

क्या नई डिजाइन के घर बनाना हो सकता है आसान?

3D प्रिंटिंग की एक खासियत यह है कि इससे केवल सीधी दीवारों तक सीमित डिजाइन ही जरूरी नहीं है। डिजिटल डिजाइन के आधार पर अलग-अलग आकार और कर्व वाले स्ट्रक्चर तैयार किए जा सकते हैं। इससे आर्किटेक्ट को कुछ ऐसे डिजाइन तैयार करने की सुविधा मिल सकती है जिन्हें पारंपरिक निर्माण में बनाना अधिक जटिल या समय लेने वाला हो। 

हालांकि, हर तरह का डिजाइन प्रिंट करना व्यावहारिक या संरचनात्मक रूप से सुरक्षित हो, यह जरूरी नहीं है। घर की डिजाइन तैयार करते समय इंजीनियरिंग मानकों, स्थानीय बिल्डिंग नियमों और स्ट्रक्चरल सुरक्षा का ध्यान रखना जरूरी होता है।

कम मजदूरों में हो सकता है निर्माण कार्य पूरा

3D प्रिंटिंग से निर्माण प्रक्रिया में ऑटोमेशन बढ़ने की वजह से कुछ कामों के लिए मैनुअल श्रम की जरूरत कम हो सकती है। मशीन खुद निर्धारित रास्ते पर मटीरियल की परतें बिछाती है। इससे निर्माण स्थल पर काम करने वाले लोगों की भूमिका मुख्य रूप से मशीन की निगरानी, मटीरियल मैनेजमेंट और दूसरे जरूरी निर्माण कार्यों तक सीमित हो सकती है।

इसका मतलब यह नहीं है कि 3D प्रिंटिंग से घर बनाने में मजदूरों की जरूरत पूरी तरह खत्म हो जाएगी। नींव, वायरिंग, प्लंबिंग, दरवाजे-खिड़कियां, छत, फर्श और फिनिशिंग जैसे कई कामों में अब भी विशेषज्ञ श्रमिकों की आवश्यकता पड़ सकती है।

जाने निर्माण लागत पर क्या होगा असर?

3D प्रिंटिंग को लेकर यह भी उम्मीद जताई जाती है कि इससे निर्माण लागत को कम करने में मदद मिल सकती है। मटीरियल को डिजिटल डिजाइन के अनुसार नियंत्रित तरीके से इस्तेमाल करने से कुछ मामलों में वेस्टेज कम किया जा सकता है। इसके अलावा, निर्माण समय और कुछ मैनुअल श्रम में कमी आने पर कुल लागत पर भी असर पड़ सकता है। 

लेकिन मशीन की शुरुआती लागत, साइट पर मशीन पहुंचाने और स्थापित करने का खर्च, विशेष कंस्ट्रक्शन मटीरियल तथा तकनीकी विशेषज्ञों की जरूरत को भी ध्यान में रखना पड़ता है। इसलिए हर जगह 3D प्रिंटिंग पारंपरिक निर्माण से सस्ती होगी, ऐसा निश्चित रूप से नहीं कहा जा सकता।

भारत में भी बढ़ रही है 3D प्रिंटिंग से निर्माण की चर्चा

भारत में भी 3D प्रिंटिंग तकनीक का इस्तेमाल करके घर और दूसरी संरचनाएं बनाने के प्रयोग किए गए हैं। इस तकनीक को किफायती और तेजी से निर्माण की संभावनाओं से जोड़कर देखा जा रहा है। खास तौर पर बड़े पैमाने पर आवास निर्माण और ऐसे प्रोजेक्ट्स में इसकी संभावनाओं पर चर्चा होती रही है, जहां कम समय में बड़ी संख्या में संरचनाएं तैयार करनी हों। 

भारत जैसे देश में जहां तेजी से शहरीकरण हो रहा है और किफायती आवास की मांग बनी हुई है, वहां अगर यह तकनीक बड़े स्तर पर व्यावहारिक और लागत प्रभावी साबित होती है तो निर्माण क्षेत्र में इसका इस्तेमाल बढ़ सकता है।

क्या 3D प्रिंटेड घर हो सकते हैं मजबूत ?

3D प्रिंटेड घर की मजबूती केवल इस बात पर निर्भर नहीं करती कि उसे 3D प्रिंटर से बनाया गया है। इसमें इस्तेमाल होने वाले मटीरियल, डिजाइन, दीवारों की संरचना, नींव, रीइन्फोर्समेंट और निर्माण की गुणवत्ता महत्वपूर्ण होती है। घर को रहने के लिए सुरक्षित बनाने के लिए स्थानीय बिल्डिंग कोड और स्ट्रक्चरल मानकों का पालन जरूरी है। इसलिए किसी भी 3D प्रिंटेड घर को केवल तकनीक के आधार पर मजबूत या कमजोर मानना सही नहीं होगा।

क्या ये पारम्परिक निर्माण कार्य को कर देगा खत्म?

3D प्रिंटिंग तेजी से विकसित हो रही तकनीक है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि ईंट, सीमेंट और पारंपरिक निर्माण पद्धति तुरंत खत्म हो जाएगी। मौजूदा समय में दोनों तकनीकों के अपने-अपने फायदे और सीमाएं हैं। 3D प्रिंटिंग खास तौर पर उन हिस्सों में उपयोगी साबित हो सकती है जहां दोहराए जाने वाले डिजाइन, तेज निर्माण और ऑटोमेशन की जरूरत हो। वहीं जटिल साइट कंडीशन, मौजूदा इमारतों में बदलाव और कई तरह के फिनिशिंग कार्यों में पारंपरिक तकनीक की जरूरत बनी रह सकती है। कुल मिलाकर, 3D प्रिंटिंग कंस्ट्रक्शन घर बनाने के तरीके में बदलाव की संभावना रखने वाली तकनीक है। 

डिजिटल डिजाइन से लेकर मशीन द्वारा परत-दर-परत दीवार तैयार करने तक पूरी प्रक्रिया में ऑटोमेशन का इस्तेमाल होता है। इससे कुछ प्रोजेक्ट्स में निर्माण समय और मटीरियल वेस्टेज को कम करने में मदद मिल सकती है। हालांकि, पूरे घर को कितने समय और कितनी लागत में तैयार किया जाएगा, यह डिजाइन, साइट, मटीरियल और बाकी निर्माण कार्यों पर निर्भर करता है। इसलिए 'एक साल का काम तीन महीने में' जैसी अवधि को हर 3D प्रिंटेड घर के लिए तय समय नहीं माना जा सकता।

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