भेड़-बकरियां चराने वाले युवक ने रचा इतिहास, तीसरे प्रयास में बना IPS अफसर
Udaipur Times, IPS Birdev Done : अगर इरादे मजबूत हों और मेहनत के प्रति समर्पण हो, तो कठिन से कठिन परिस्थितियां भी सफलता का रास्ता नहीं रोक सकतीं। महाराष्ट्र के कोल्हापुर जिले की कागल तहसील के एक छोटे से गांव के रहने वाले बीरदेव सिद्धापा डोणे (IPS Birdev Done) ने इस बात को सच साबित कर दिखाया। चरवाहा परिवार से आने वाले बीरदेव ने अभावों को अपनी कमजोरी नहीं बनने दिया और संघर्ष करते हुए UPSC 2024 में ऑल इंडिया रैंक (AIR) 551 हासिल कर IPS बनने का सपना पूरा किया।
बचपन से पढ़ाई में रहे अव्वल
बीरदेव शुरू से ही पढ़ाई में मेधावी थे। उन्होंने 10वीं की परीक्षा में 96 प्रतिशत और 12वीं में 89 प्रतिशत अंक हासिल किए। इसके बाद पुणे के COEP से सिविल इंजीनियरिंग में बीटेक किया। गांव में अच्छी पढ़ाई और कोचिंग की सुविधा नहीं होने के बावजूद उन्होंने सरकारी स्कूल में पढ़ाई जारी रखी और अपने लक्ष्य पर फोकस बनाए रखा।

बीटेक के बाद इंडिया पोस्ट की नौकरी
इंजीनियरिंग पूरी करने के बाद बीरदेव ने इंडिया पोस्ट में नौकरी शुरू की, लेकिन उनका सपना सिविल सेवा में जाने का था। इसलिए उन्होंने 2021 में नौकरी छोड़ दी और पूरी तरह UPSC की तैयारी में जुट गए। इस दौरान उनके भाई वासुदेव डोणे ने हर कदम पर उनका साथ दिया।
दो बार असफल, तीसरी कोशिश में मिली सफलता
बीरदेव की सफलता आसान नहीं थी। 2022 में पहली बार UPSC परीक्षा देने पर वे 30 अंकों से चयन से चूक गए। 2023 में दूसरी कोशिश में भी वे सिर्फ 3 अंकों से पीछे रह गए। लगातार दो असफलताओं के बावजूद उन्होंने हार नहीं मानी और अपनी तैयारी जारी रखी। आखिरकार 2024 की तीसरी कोशिश में उन्होंने AIR 551 हासिल कर IPS बनने का सपना साकार कर लिया।

भेड़-बकरियां चराते समय मिली सफलता की खबर
UPSC 2024 का परिणाम आने के समय बीरदेव खेत में भेड़-बकरियां चरा रहे थे। तभी उनके एक दोस्त का फोन आया, जिसने उन्हें बताया कि उनका चयन हो गया है। यह खबर सुनते ही परिवार और पूरे गांव में खुशी की लहर दौड़ गई।
युवाओं के लिए प्रेरणा
बीरदेव डोणे (IPS Birdev Done) की कहानी बताती है कि सफलता संसाधनों से नहीं, बल्कि मेहनत, धैर्य और आत्मविश्वास से मिलती है। लगातार दो असफलताओं के बाद भी उन्होंने हिम्मत नहीं हारी और तीसरे प्रयास में IPS अधिकारी बनकर उन लाखों युवाओं के लिए मिसाल बन गए, जो सीमित संसाधनों के बावजूद बड़े सपने देखते हैं।
