अधिक़ सक्रीय उप राज्यपाल और संवैधानिक रूप से कमजोर मुख्य मंत्री
दिल्ली के वर्त्तमान संकट का मुख्य कारण राजनैतिक रूप से अधिक सक्रीय उप राज्यपाल और संवैधानिक रूप से कमजोर मुख्य मंत्री के पद रहे है।

दिल्ली के वर्त्तमान संकट का मुख्य कारण राजनैतिक रूप से अधिक सक्रीय उप राज्यपाल और संवैधानिक रूप से कमजोर मुख्य मंत्री के पद रहे है। उक्त विचार राजनैतिक विज्ञानी प्रोफ अरुण चतुर्वेदी ने डॉ मोहन सिंह मेहता मेमोरियल ट्रस्ट द्वारा आयोजित दिल्ली की राजनीति व उप राज्यपाल विषयक संवाद को सम्बोधित करते हुए व्यक्त किये।
प्रोफ . चतुर्वेदी ने कहा कि वर्त्तमान सन्दर्भ में यह भूलना गलत रहेगा कि दिल्ली के मुख्य मंत्री प्रचंड बहुमत का प्रतिनिधित्व करते है व बदलाव की राजनीति के प्रतिक है। ऐसी स्थिति में तनाव उत्पन्न होना सामान्य नहीं है। केंद्र सरकार की दोहरी भूमिका में पीछे से उप राज्यपाल को निर्देशित करना व सार्वजनिक रूप से हस्तक्षेप न करने की बात ने संकट को बढ़ाया है। दिल्ली में फिर ऐसी स्थिति ना उत्पन्न हो इसके लिए व्यापक संवैधानिक सुधारो की जरुरत है जिसमे मुख्या मंत्री कागजी मुख्यमंत्री ना हो।
शिक्षाशास्त्री प्रोफ एस.बी.लाल ने इस संकट को प्रशासनिक , राजनैतिक और वैधानिक बतलाया। दिल्ली बहुत बदल गयी है। इसकी आवश्यकताएं बिजली पानी और महिला सुरक्षा की है।
प्रोफ, अरुण ज़कारिया ने कहा कि मुख्यमंत्री को ताकतवर बनाया जाना चाहिए अन्यथा ये राज्य की जनता के साथ मज़ाक होगा।
पूर्व प्रशासनिक अधिकारी मुनीश गोयल ने कहा कि यह संकट राजनैतिक ज्यादा है जिसे संवेधानिक बताया जा रहा है। इससे पूर्व की सरकारों ने इस प्रकार का संकट खड़ा नहीं किया। कार्य सहमति से होना चाहिए।
संवाद की अध्यक्षता करते हुए वास्तुकार बी एल मंत्री ने राजपाल के हस्तक्षेप को अवांछित बताते हुए चुनी हुई सरकार को स्वतंत्रता पूर्वक कार्य करने का अवसर देने की बात की। बी एल कुकड़ा ने कहा कि दिल्ली को पूर्ण राज्य का दर्जा दिया जाना चाहिए। मत्स्य निदेशक इस्माइल अली दुर्गा ने मुख्यमंत्री को ज्यादा ताकतवर बनाने की जरुरत पर बल दिया। पूर्व अभियंता शांति लाल गोदावत ने कहा कि राजनैतिक हस्तक्षेप से यह संकट खड़ा हुआ है। चुनी हुई सरकार को काम की स्वतंत्रता होनी चाहिए।
सामाजिक कार्यकर्ता शांति लाल भंडारी , तेज शंकर पालीवाल ,सुशील दशोरा,प्रकाश तिवारी, सोहन तम्बोली , हाजी सरदार मोहम्मद हिमालय तहसीन ने भी विचार व्यक्त किये। स्वागत करते हुए ट्रस्ट सचिव नन्द किशोर शर्मा ने दिल्ली संकट पर प्रकाश डाला।
