अधिवक्ताओं ने किया न्यायिक कार्य का बहिष्कार और ज्ञापन दिया
सर्वोच्च न्यायालय द्वारा किसी प्रकरण की सुनवाई करते हुए पारित निर्णय जिसमें अधिवक्ताओ को हड़ताल या कार्य बहिष्कार से रोकने एडवोकेट एक्ट में संशोधन कर बार कॉउन्सिल ऑफ इंडिया के अधिकारों में कटौती करने एडवोकेट के खिलाफ जांच का अधिकार सेवा निवृत्त जजो को देने के प्रस्तावों का विरोध करने और वेलफेयर एक्ट एवं एडवोकेट प्रोटेक्शन एक्ट को लागू करने की मांग को लेकर आज उदयपुर बार एसोसिएशन के सदस्यों ने न्यायिक कार्य का पूर्ण बहिष्कार कर जिला कलेक्टर कार्यालय पर प्रदर्शन किया।
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सर्वोच्च न्यायालय द्वारा किसी प्रकरण की सुनवाई करते हुए पारित निर्णय जिसमें अधिवक्ताओ को हड़ताल या कार्य बहिष्कार से रोकने एडवोकेट एक्ट में संशोधन कर बार कॉउन्सिल ऑफ इंडिया के अधिकारों में कटौती करने एडवोकेट के खिलाफ जांच का अधिकार सेवा निवृत्त जजो को देने के प्रस्तावों का विरोध करने और वेलफेयर एक्ट एवं एडवोकेट प्रोटेक्शन एक्ट को लागू करने की मांग को लेकर आज उदयपुर बार एसोसिएशन के सदस्यों ने न्यायिक कार्य का पूर्ण बहिष्कार कर जिला कलेक्टर कार्यालय पर प्रदर्शन किया।
उदयपुर बार एसोसिएशन ने जिला कलेक्टर को राष्ट्रपति के नाम ज्ञापन दिया और उक्त काले कानून को वापस लेने की मांग की। उक्त प्रदशर्न में बार के अध्यक्ष रामकृपा शर्मा, बार कॉउन्सिल के मेम्बर रतन सिंह राव, पूर्व अध्यक्ष शांति लाल चपलोत, रमेश नंदवाना, शम्भू सिंह राठौड़, महेन्द्र नागदा, सचिव ओमप्रकाश प्रजापत, वित्त सचिव हरीश शर्मा, लाइब्रेरी सचिव हेमंत पालीवाल, हाइकोर्ट संघर्ष समिति के सत्येंद्र पाल सिंह छाबड़ा, पूर्व महासचिव जितेंद्र जैन, मनीष शर्मा, राकेश मोगरा, भरत वैष्णव, राजेश सिंघवी, अरुण व्यास, गिरिजाशंकर मेहता, हुकुम राज सिंह राणावत, मनन शर्मा, ललित मेनारिया आदि उपस्थित थे।