शादी के 18 साल बाद 3 बच्चों की मां बनीं PCS अधिकारी, UPPSC में 166वीं रैंक लाकर रचा इतिहास
Udaipur Times, New Delhi : अगर मन में कुछ कर गुजरने का जुनून हो तो उम्र और जिम्मेदारियां भी सफलता की राह नहीं रोक सकतीं। उत्तर प्रदेश के गौतमबुद्ध नगर की रहने वाली दीपा भाटी ने अपनी मेहनत और हौसले से इस बात को साबित कर दिया। शादी के 18 साल बाद, तीन बच्चों की जिम्मेदारी के साथ उन्होंने PCS अधिकारी बनने का सपना पूरा किया।
दीपा की कहानी उन महिलाओं के लिए प्रेरणा है, जो परिवार और जिम्मेदारियों के बीच अपने सपनों को कहीं पीछे छोड़ देती हैं। लोगों के ताने, घर की जिम्मेदारियां और पढ़ाई के लिए समय की कमी के बावजूद उन्होंने हार नहीं मानी और लगातार मेहनत करती रहीं।

छोटे से गांव से शुरू हुआ सफर
दीपा भाटी उत्तर प्रदेश के गौतमबुद्ध नगर जिले के कोंडली बांगर गांव की रहने वाली हैं। उनका पालन-पोषण एक साधारण परिवार में हुआ। परिवार में संसाधन सीमित थे, लेकिन पढ़ाई को लेकर उनका रुझान शुरू से ही अच्छा था।
उनकी शुरुआती पढ़ाई केंद्रीय विद्यालय से हुई। इसके बाद उन्होंने केमिस्ट्री में ग्रेजुएशन किया और फिर इतिहास में पोस्ट ग्रेजुएशन की पढ़ाई पूरी की।
बचपन से ही दीपा के मन में कुछ अलग करने और अपने पैरों पर खड़े होने की इच्छा थी। हालांकि, जिंदगी आगे बढ़ने के साथ उनकी प्राथमिकताएं बदलती चली गईं।
कम उम्र में हुई शादी, तीन बच्चों की जिम्मेदारी
दीपा की शादी कम उम्र में ही हो गई थी। शादी के बाद घर-परिवार की जिम्मेदारियां उनकी जिंदगी का अहम हिस्सा बन गईं। इसके बाद तीन बच्चों की परवरिश और परिवार की दूसरी जिम्मेदारियों के बीच अपने लिए समय निकालना उनके लिए काफी मुश्किल हो गया।
कई बार ऐसा भी लगा कि पढ़ाई और करियर का सपना अब शायद पूरा नहीं हो पाएगा। लेकिन उन्होंने अपने सपने को पूरी तरह खत्म नहीं होने दिया। मन में आगे बढ़ने की चाह हमेशा बनी रही।
परिवार की जिम्मेदारियों के साथ शुरू किया काम
दीपा ने अपनी परिस्थितियों के बीच एक स्कूल में पढ़ाना भी शुरू किया। इसका मकसद खुद को व्यस्त रखने के साथ-साथ आगे बढ़ने का रास्ता तलाशना था। हालांकि, कुछ समय बाद निजी कारणों से उन्हें यह नौकरी छोड़नी पड़ी।
इसी दौरान उनके भाई ने उन्हें सिविल सर्विस परीक्षा की तैयारी करने की सलाह दी। भाई की यह बात दीपा के मन में बैठ गई। उन्होंने UPPSC परीक्षा देने का फैसला किया और यहीं से उनके जीवन में एक नया अध्याय शुरू हुआ।
लोगों ने कहा- 'इस उम्र में तैयारी करके क्या करोगी?'
तीन बच्चों की मां होने के साथ प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी करना दीपा के लिए आसान नहीं था। दिन का काफी समय घर और परिवार की जिम्मेदारियों में बीत जाता था। ऐसे में उन्हें पढ़ाई के लिए रात का समय निकालना पड़ता था।
इस दौरान उन्हें आसपास के लोगों की बातों और तानों का भी सामना करना पड़ा। कई लोग उनकी उम्र को लेकर सवाल उठाते थे। उन्हें सुनना पड़ता था कि इस उम्र में परीक्षा की तैयारी करने का क्या फायदा होगा और अब वह क्या हासिल कर लेंगी।
लेकिन दीपा ने इन बातों को अपनी कमजोरी नहीं बनने दिया। उन्होंने लोगों की बातों पर ध्यान देने के बजाय अपना पूरा फोकस लक्ष्य पर रखा।
दिन में घर संभाला, रात में की पढ़ाई
दीपा की तैयारी का सबसे मुश्किल हिस्सा समय का प्रबंधन था। घर की जिम्मेदारियां पूरी करने के बाद उन्हें पढ़ाई के लिए समय निकालना पड़ता था। उन्होंने अपनी दिनचर्या में पढ़ाई को शामिल किया और धीरे-धीरे तैयारी को मजबूत करती चली गईं।
तीन बच्चों की मां होने के बावजूद उन्होंने पढ़ाई को लेकर अनुशासन बनाए रखा। परिवार की जिम्मेदारियों के साथ परीक्षा की तैयारी जारी रखना उनके लिए आसान नहीं था, लेकिन यही संघर्ष उनकी सफलता की सबसे बड़ी वजह बना।
NCERT से शुरू की तैयारी
दीपा ने UPPSC की तैयारी के दौरान सबसे पहले NCERT की किताबों पर फोकस किया। उन्होंने बेसिक कॉन्सेप्ट को मजबूत करने के बाद स्टैंडर्ड किताबों का सहारा लिया।
पहले के प्रयासों में असफलता मिलने के बाद भी उन्होंने तैयारी नहीं छोड़ी। हर प्रयास से उन्होंने अपनी कमियों को समझा और आगे की रणनीति को बेहतर बनाया।
UPPSC 2021 में हासिल की 166वीं रैंक
लगातार मेहनत और कई चुनौतियों का सामना करने के बाद आखिरकार दीपा भाटी ने UPPSC 2021 परीक्षा में 166वीं रैंक हासिल की।
उन्होंने करीब 40 साल की उम्र में PCS अधिकारी बनने का सपना पूरा किया। यह सफलता इसलिए भी खास थी क्योंकि उस समय तक उनकी शादी को 18 साल हो चुके थे और वह तीन बच्चों की मां थीं।
जिस उम्र में कई लोग प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी छोड़ने के बारे में सोचने लगते हैं, उस उम्र में दीपा ने अपनी मेहनत से नई मिसाल कायम की।
बेटी 12वीं में पढ़ रही थी, मां बन रही थीं PCS अफसर
दीपा की सफलता की कहानी का एक और प्रेरणादायक पहलू यह है कि जब उन्होंने PCS परीक्षा पास की, उस समय उनकी बड़ी बेटी 12वीं कक्षा में पढ़ रही थी।
यानी एक तरफ बेटी अपनी पढ़ाई और बोर्ड परीक्षा की तैयारी कर रही थी, वहीं दूसरी तरफ उसकी मां अपने करियर के सबसे बड़े पड़ाव को हासिल कर रही थीं।
महिलाओं के लिए बनीं प्रेरणा
दीपा भाटी की कहानी सिर्फ एक प्रतियोगी परीक्षा पास करने की कहानी नहीं है। यह उन तमाम महिलाओं के लिए प्रेरणा है, जो शादी, बच्चों और परिवार की जिम्मेदारियों के कारण अपने सपनों को अधूरा छोड़ देती हैं।
दपा ने साबित किया कि सपनों को पूरा करने की कोई तय उम्र नहीं होती।
अगर लक्ष्य स्पष्ट हो, मेहनत लगातार हो और परिस्थितियों के सामने हार न मानी जाए, तो जिंदगी के किसी भी पड़ाव पर नई शुरुआत की जा सकती है। शादी के 18 साल बाद, तीन बच्चों की जिम्मेदारी निभाते हुए PCS अधिकारी बनने वाली दीपा भाटी की कहानी यही संदेश देती है कि लोग क्या कहते हैं, यह मायने नहीं रखता। मायने यह रखता है कि आप अपने लक्ष्य के लिए कितनी मजबूती से खड़े रहते हैं।