आखिर कितनी मंजिल तक बना सकते हैं मकान ? सड़क की चौड़ाई से कैसे तय होगी निर्माण सीमा

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आखिर कितनी मंजिल तक बना सकते हैं मकान ? सड़क की चौड़ाई से कैसे तय होगी निर्माण सीमा 

Udaipur Times, Building Bye Laws : अपना घर बनाते समय अक्सर लोगों के मन में सवाल रहता है कि आवासीय प्लॉट पर आखिर कितनी मंजिल तक मकान बनाया जा सकता है। क्या हर प्लॉट पर मनमुताबिक मंजिलें बनाई जा सकती हैं ? इसका जवाब है- नहीं। किसी भी आवासीय प्लॉट पर निर्माण की ऊंचाई और मंजिलों की संख्या कई नियमों पर निर्भर करती है। इसमें प्लॉट का आकार, सड़क की चौड़ाई, फ्लोर एरिया रेशियो (FAR), सेटबैक और स्थानीय बिल्डिंग बायलॉज अहम भूमिका निभाते हैं।

हाल ही में दिल्ली के सत्य निकेतन इलाके में एक पांच मंजिला अवैध हॉस्टल के ढहने की घटना ने अनधिकृत निर्माण और भवन सुरक्षा को लेकर सवाल खड़े किए हैं। ऐसे में यह समझना जरूरी है कि घर बनाते समय किन सरकारी नियमों का पालन करना होता है और बिना मंजूरी के अतिरिक्त मंजिल बनाने पर क्या परेशानी हो सकती है।

आवासीय प्लॉट पर कितनी मंजिल बना सकते हैं?

किसी भी प्लॉट पर कितनी मंजिल बनाई जा सकती है, इसका कोई एक नियम पूरे देश में लागू नहीं होता। अलग-अलग शहरों और राज्यों में स्थानीय विकास प्राधिकरण या नगर निकाय अपने बिल्डिंग बायलॉज के आधार पर निर्माण की सीमा तय करते हैं।कई शहरी इलाकों में आवासीय प्लॉट पर ग्राउंड फ्लोर के अलावा अतिरिक्त मंजिलों की अनुमति दी जाती है, लेकिन यह अनुमति प्लॉट और सड़क की स्थिति के साथ-साथ उस इलाके के लागू नियमों पर निर्भर करती है।यानी सिर्फ यह देखकर कि पड़ोसी के मकान में चार या पांच मंजिल बनी हैं, अपने प्लॉट पर भी उतनी ही मंजिल बनाना कानूनी नहीं हो जाता।

सड़क की चौड़ाई से तय होती है मकान निर्माण की सीमा

मकान की मंजिलों और ऊंचाई के नियम तय करने में सड़क की चौड़ाई महत्वपूर्ण होती है। जिस प्लॉट के सामने सड़क जितनी चौड़ी होगी, वहां लागू नियमों के अनुसार निर्माण की ऊंचाई और अन्य पैरामीटर अलग हो सकते हैं।इसीलिए घर का नक्शा बनवाते समय सिर्फ प्लॉट का क्षेत्रफल बताना पर्याप्त नहीं होता। आर्किटेक्ट को प्लॉट की लोकेशन, सड़क की चौड़ाई और स्थानीय नियमों को ध्यान में रखकर पूरा डिजाइन तैयार करना होता है।

जाने FAR क्या होता है और इसका मकान पर क्या असर पड़ता है?

FAR यानी Floor Area Ratio वह अनुपात है, जो यह तय करने में मदद करता है कि किसी प्लॉट के कुल क्षेत्रफल के मुकाबले कितने फ्लोर एरिया में निर्माण किया जा सकता है।उदाहरण के तौर पर, यदि किसी इलाके के लिए निर्धारित FAR के अनुसार एक निश्चित कुल निर्माण क्षेत्र की अनुमति है, तो उसे अलग-अलग मंजिलों में बांटकर बनाया जा सकता है। इसलिए सिर्फ मंजिलों की संख्या देखना पर्याप्त नहीं है; यह भी देखना जरूरी है कि कुल कितना निर्माण क्षेत्र स्वीकृत है।यही कारण है कि एक ही आकार के प्लॉट पर अलग-अलग इलाकों में निर्माण के नियम अलग हो सकते हैं।

घर के चारों तरफ खुली जगह छोड़ना भी जरूरी

बिल्डिंग बायलॉज सिर्फ यह नहीं बताते कि कितनी मंजिलें बनाई जा सकती हैं। इनका एक बड़ा उद्देश्य भवन में रहने वाले लोगों की सुरक्षा, रोशनी और वेंटिलेशन सुनिश्चित करना भी है।इसी वजह से प्लॉट के चारों तरफ निर्धारित सेटबैक या खुली जगह छोड़ने के नियम होते हैं। इससे घर में प्राकृतिक रोशनी और हवा का प्रवेश बना रहता है। साथ ही आपात स्थिति में बचाव और अग्निशमन जैसी सेवाओं के लिए भी जरूरी जगह उपलब्ध हो सकती है।

बालकनी या सीढ़ी सड़क तक बढ़ाना पड़ सकता है भारी

कई बार मकान मालिक अतिरिक्त जगह बनाने के लिए बालकनी, रैंप, सीढ़ी या किसी दूसरे हिस्से को सड़क या फुटपाथ की ओर बढ़ा देते हैं। लेकिन ऐसा निर्माण स्थानीय निकाय के नियमों के खिलाफ हो सकता है।किसी निजी भवन का हिस्सा सार्वजनिक रास्ते, फुटपाथ या सरकारी जमीन की सीमा में नहीं आना चाहिए। यदि निर्माण अतिक्रमण की श्रेणी में आता है, तो संबंधित निकाय की ओर से नोटिस, जुर्माना या अवैध हिस्से को हटाने की कार्रवाई की जा सकती है।

नक्शा पास कराए बिना शुरू न करें निर्माण

घर बनाने से पहले सबसे जरूरी कामों में से एक है स्वीकृत बिल्डिंग प्लान तैयार कराना। इसके लिए संबंधित नियमों के अनुसार पंजीकृत आर्किटेक्ट या अधिकृत पेशेवर से नक्शा तैयार कराया जाता है।इसके बाद इसे संबंधित नगर निगम, नगर पालिका या विकास प्राधिकरण के समक्ष स्वीकृति के लिए प्रस्तुत किया जाता है। मंजूर नक्शे के आधार पर ही निर्माण कार्य किया जाना चाहिए। बिना स्वीकृत नक्शे के निर्माण शुरू करना या मंजूर नक्शे से अलग अतिरिक्त निर्माण करना कानूनी कार्रवाई का कारण बन सकता है।

बेसमेंट और अतिरिक्त निर्माण में भी नियम जरूरी

सिर्फ ऊपर की मंजिलों के लिए ही नियम नहीं होते। बेसमेंट, पार्किंग, सीढ़ियां, रैंप, बालकनी और अन्य निर्माण हिस्सों के लिए भी स्थानीय बिल्डिंग बायलॉज लागू होते हैं। इसलिए यह मान लेना गलत है कि जमीन आपकी है तो उस पर किसी भी तरह का निर्माण किया जा सकता है। जमीन का मालिकाना हक होने के बावजूद निर्माण स्थानीय प्राधिकरण के नियमों के अधीन रहता है।

अवैध निर्माण से क्या हो Sanj है नुकसान?

बिना मंजूरी या स्वीकृत नक्शे से अलग निर्माण करने पर सिर्फ कानूनी परेशानी ही नहीं हो सकती, बल्कि भवन की सुरक्षा पर भी असर पड़ सकता है। अतिरिक्त मंजिल, कमजोर स्ट्रक्चर, गलत बेसमेंट निर्माण या निर्धारित मानकों का पालन न करने से इमारत पर अतिरिक्त भार पड़ सकता है।इसीलिए निर्माण शुरू करने से पहले स्ट्रक्चरल डिजाइन, मिट्टी की स्थिति, भवन की क्षमता और स्थानीय निर्माण नियमों की जांच कराना बेहद जरूरी है।

घर बनाने से पहले इन बातों का रखें ध्यान

मकान निर्माण शुरू करने से पहले इन चीजों की जांच जरूर करें;

प्लॉट का क्षेत्रफल और जमीन का उपयोग आवासीय है या नहीं।

सामने वाली सड़क की चौड़ाई कितनी है।

इलाके में लागू FAR कितना है।

कितनी मंजिलों और कितनी ऊंचाई की अनुमति है।

प्लॉट के चारों तरफ कितना सेटबैक जरूरी है।

पार्किंग और बेसमेंट के क्या नियम हैं।

बालकनी, रैंप और सीढ़ियों के लिए क्या प्रावधान हैं।

पंजीकृत आर्किटेक्ट से नक्शा तैयार कराया गया है या नहीं।

संबंधित स्थानीय निकाय से निर्माण की मंजूरी मिली है या नहीं।

हर शहर में नियम अलग हो सकते हैं

5 सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि मंजिलों की संख्या का नियम शहर और स्थानीय प्राधिकरण के अनुसार बदल सकता है। इसलिए घर बनाने से पहले इंटरनेट या पड़ोसी के मकान को देखकर मंजिलों की संख्या तय करना सही तरीका नहीं है।अपने प्लॉट के लिए लागू नियमों की जानकारी संबंधित नगर निगम, विकास प्राधिकरण या स्थानीय निकाय से लेना और स्वीकृत नक्शे के अनुसार ही निर्माण करना सुरक्षित और कानूनी तरीका है।
 

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