NIT से इंजीनियरिंग के बाद BPSC में 121वीं रैंक हासिल कर प्रशासनिक सेवा के लिए हुआ चयन, जानिए मनीषा पटेल की सफलता की कहानी
Success Story of Manisha Patel: बड़े सपने देखने के लिए किसी बड़े शहर में पैदा होना जरूरी नहीं है। अगर किसी के पास मजबूत इरादा और कड़ी मेहनत करने का जुनून हो, तो एक छोटे से गांव की लड़की भी बड़ी सफलता हासिल कर सकती है। भोजपुर ज़िले के जगदीशपुर ब्लॉक के दवान गांव की रहने वाली मनीषा पटेल ने इसे सच कर दिखाया है।
अपने गाँव के साधारण माहौल में पढ़ाई शुरू करने के बाद, मनीषा ने NIT अगरतला से इंजीनियरिंग की डिग्री हासिल की। इसके बाद, उन्होंने 70वीं BPSC परीक्षा में 121वीं रैंक पाकर बिहार प्रशासनिक सेवा (Bihar Administrative Service) में जगह बनाई।
गाँव के स्कूल से शुरू हुआ सफलता का सफ़र
मनीषा पटेल का जन्म 8 सितंबर 2000 को भोजपुर के दवान गांव में हुआ था। उनके माता-पिता रामजी चौधरी और उजाला देवी हैं। उन्होंने अपनी शुरुआती पढ़ाई गांव के विवेकानंद पब्लिक स्कूल से की। सीमित संसाधन होने के बावजूद, वह कम उम्र से ही अपने आगे बढ़ने के लक्ष्य पर पूरी तरह केंद्रित रहीं।
दसवीं कक्षा पूरी करने के बाद, उन्होंने कैमूर के चौरासिया स्थित जवाहर नवोदय विद्यालय से साइंस स्ट्रीम में इंटरमीडिएट की पढ़ाई की, जहाँ उन्होंने 92 प्रतिशत अंक हासिल किए। इस उपलब्धि ने उनकी उच्च शिक्षा का रास्ता आसान कर दिया।

NIT अगरतला पहुंचना और इंजीनियरिंग की डिग्री पूरी करना
मनीषा के सफ़र का अगला पड़ाव जो उनकी कड़ी मेहनत और प्रतिभा का सबूत है नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ़ टेक्नोलॉजी (NIT) अगरतला था। उन्होंने त्रिपुरा के इस प्रतिष्ठित संस्थान से अपनी इंजीनियरिंग की डिग्री पूरी की। जहाँ ज़्यादातर इंजीनियरिंग ग्रेजुएट प्राइवेट कंपनियों या तकनीकी क्षेत्र में अपना करियर बनाते हैं, वहीं मनीषा ने एक अलग रास्ता चुना; उन्होंने प्रशासनिक सेवा में जाने का फ़ैसला किया और BPSC परीक्षा की तैयारी शुरू कर दी।
70वीं BPSC में 121वीं रैंक; बिहार प्रशासनिक सेवा के लिए चुनी गईं
प्रशासनिक सेवा में जाने का उनका सपना आख़िरकार सच हो गया। मनीषा ने 70वीं BPSC परीक्षा में 121वीं रैंक हासिल की और उनका चयन बिहार प्रशासनिक सेवा के लिए हुआ।
यह कामयाबी सालों की कड़ी मेहनत और अपने लक्ष्य के प्रति अटूट समर्पण का नतीजा है। इंजीनियरिंग की पढ़ाई से लेकर प्रशासनिक सेवा में जाने तक का उनका सफर यह दिखाता है कि अपना करियर पथ बदलकर नए लक्ष्य हासिल किए जा सकते हैं।

गया में प्रशिक्षण जारी; प्रशासनिक जिम्मेदारियों के लिए तैयारी
BPSC (बिहार लोक सेवा आयोग) द्वारा चुने जाने के बाद, मनीषा अभी गया में प्रशिक्षण ले रही हैं। यह प्रशिक्षण पूरा होने के बाद, वह प्रशासनिक जिम्मेदारियां संभालेंगी।
उनकी सफलता से न केवल दवान गांव, बल्कि पूरे भोजपुर जिले में खुशी की लहर है। स्थानीय लोगों के लिए यह बड़े गर्व की बात है कि उनके गांव की एक बेटी ने NIT (नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी) से लेकर बिहार प्रशासनिक सेवा तक का सफर तय किया है।
मनीषा की सफलता अन्य युवतियों के लिए प्रेरणा है
मनीषा पटेल की कहानी सिर्फ एक परीक्षा पास करने की उपलब्धि से कहीं बढ़कर है। यह उन ग्रामीण परिवारों के लिए एक संदेश है, जो सीमित संसाधनों के कारण अक्सर अपनी बेटियों की शिक्षा और करियर को लेकर चिंतित रहते हैं।
गांव के स्कूल से लेकर राष्ट्रीय स्तर के इंजीनियरिंग संस्थान और फिर प्रशासनिक सेवा तक का सफर तय करके, मनीषा ने साबित कर दिया है कि प्रतिभा किसी जगह की मोहताज नहीं होती चाहे वह शहर हो या गांव। उनकी सफलता अब ग्रामीण इलाकों की अन्य युवतियों के लिए एक प्रेरणा है, जो उन्हें बड़े सपने देखने और उन सपनों को सच करने की दिशा में आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करती है।