अपने दूसरे प्रयास में NEET UG 2026 पास कर अब आंचल बनेगी डॉक्टर

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अपने दूसरे प्रयास में NEET UG 2026 पास कर अब आंचल बनेगी डॉक्टर

Aanchal Anurag Neet Success: जब किसी के अंदर कुछ हासिल करने का सच्चा जुनून हो और उसका हौसला बुलंद रहे, तो कोई भी लक्ष्य पाना असंभव नहीं होता। गरीबी, संसाधनों की कमी या शुरुआत में मिलने वाली असफलता जैसी चुनौतियों को भी सच्ची लगन से आसानी से पार किया जा सकता है। बेगूसराय जिले के गाछी टोला (वार्ड नंबर 30) की रहने वाली होनहार युवती, अंचल अनुराग ने इसे सच साबित कर दिखाया है। उन्होंने लगातार पढ़ाई और सही मार्गदर्शन के दम पर यह कामयाबी हासिल की है। अपने दूसरे प्रयास में, अंचल ने देश की सबसे कठिन और प्रतिष्ठित मेडिकल प्रवेश परीक्षा 'नीट यूजी' (NEET UG) में शानदार सफलता प्राप्त की। इस उपलब्धि से न केवल उनके परिवार को बहुत गर्व हुआ है, बल्कि पूरे जिले में खुशी की लहर दौड़ गई है।

मुजफ्फरपुर के SKMCH में दाखिला
राज्य कोटे के तहत, अंचल को मुजफ्फरपुर के प्रतिष्ठित श्री कृष्ण मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल (SKMCH) में दाखिला मिल गया है। इसके साथ ही, डॉक्टर बनने और समाज की सेवा करने का उनका सपना अब साकार होने की दिशा में आगे बढ़ गया है। अंचल के पिता, संजय कुमार, एक शिक्षक हैं, जबकि उनकी माँ एक समर्पित गृहिणी हैं। अंचल चार भाई-बहनों (दो भाई और दो बहनें) में सबसे बड़ी हैं। सबसे बड़ी होने के नाते, उन पर न केवल अपनी पढ़ाई का दबाव था, बल्कि अपने छोटे भाई-बहनों के लिए एक मिसाल कायम करने और परिवार की उम्मीदों को पूरा करने की बड़ी जिम्मेदारी भी थी एक ऐसी भूमिका जिसे उन्होंने बखूबी निभाया है।

शुरुआत से ही होनहार
अंचल अनुराग बचपन से ही पढ़ाई-लिखाई में बहुत होनहार रही हैं। उन्होंने मैट्रिक (10वीं कक्षा) की परीक्षा में 79% अंक लाकर अपनी काबिलियत साबित की थी। इसके बाद, उन्होंने इंटरमीडिएट (12वीं कक्षा) की परीक्षा में भी शानदार प्रदर्शन करते हुए 86% अंक हासिल किए। इंटरमीडिएट की पढ़ाई पूरी करने के बाद से ही, अंचल का सपना था कि वह डॉक्टर बनें और सफेद कोट पहनें। अपने इस सपने को हकीकत में बदलने के लिए उन्होंने दिन-रात कड़ी मेहनत की और पूरी लगन के साथ अपनी तैयारी में जुट गईं। 

सेवा भाव से प्रेरित
अपनी सफलता का श्रेय अपने शिक्षकों और माता-पिता को देते हुए, अंचल बताती हैं कि दूसरों में सेवा भाव और डॉक्टरों का अपने मरीजों के प्रति समर्पण देखकर ही उन्हें मेडिकल क्षेत्र में आने की प्रेरणा मिली। हालांकि उन्हें NEET की अपनी पहली कोशिश में मनचाही सफलता नहीं मिली, लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी; बल्कि अपनी कमियों को पहचाना। शुरुआती असफलता से निराश होने के बजाय, उन्होंने और भी अधिक दृढ़ संकल्प के साथ तैयारी करने का फैसला किया। वह बिहार की राजधानी पटना चली गईं और एक निजी कोचिंग संस्थान में NEET के लिए व्यवस्थित और अनुशासित तरीके से तैयारी शुरू की।

कड़ी मेहनत और सही मार्गदर्शन
पटना में अंचल ने दिन-रात मेहनत की। अपने शिक्षकों के सही मार्गदर्शन, एक सटीक रणनीति और अपनी लगातार कड़ी मेहनत के दम पर, उन्होंने दूसरी कोशिश में ही NEET-UG जैसी कठिन परीक्षा पास कर ली। इस बड़ी कामयाबी से उनके पूरे परिवार और बेगूसराय के गाछी टोला इलाके में खुशी का माहौल है। अपनी लाडली बेटी की इस ऐतिहासिक सफलता से उनके माता-पिता बेहद खुश हैं।

भाई-बहनों के सपने पूरे करने का लक्ष्य
अब डॉक्टर बनने की राह पर चल रहीं अंचल का लक्ष्य सिर्फ एक सफल मेडिकल प्रोफेशनल बनना ही नहीं है, बल्कि वह अपने छोटे भाई-बहनों के लिए एक मार्गदर्शक भी बनना चाहती हैं। अंचल मुजफ्फरपुर में पूरी लगन के साथ अपनी पढ़ाई जारी रखेंगी। डॉक्टर बनने के बाद, वह समाज की सेवा करने के साथ-साथ अपने छोटे भाई-बहनों को भी उनके सपने पूरे करने में पूरा सहयोग देंगी। अंचल की कहानी बिहार के ग्रामीण इलाकों की उन हजारों लड़कियों के लिए एक प्रेरणा है, जो सीमित संसाधनों के बावजूद बड़े सपने देखने का साहस रखती हैं।

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