पिता के निधन के बाद मां ने संभाली सारी जिम्मेदारी, बेटी ने गोल्ड मेडल के बाद BPSC में सफलता हासिल कर रचा इतिहास
Udaipur Times, BPSC Officer Stuti Sinha : कम उम्र में ही उन्होंने अपने पिता को खो दिया। परिवार को कई आर्थिक और सामाजिक चुनौतियों का सामना करना पड़ा, लेकिन उनकी मां ने हार नहीं मानी। उन्होंने अपनी बेटी के सपनों को पूरा करने के लिए खुद बहुत संघर्ष किया; वे घर भी संभालती थीं, स्कूल में नौकरी भी करती थीं और यह भी पक्का करती थीं कि उनकी बेटी की पढ़ाई जारी रहे। मां की कड़ी मेहनत और उनकी अपनी लगन ने एक ऐसी कहानी बनाई जो प्रेरणा देती है न सिर्फ़ बेटियों के लिए, बल्कि हर उस परिवार के लिए जो मुश्किल हालात में भी अपने बच्चों के सपने पूरे करने की कोशिश कर रहा है। यह कहानी है डुमरांव नगर परिषद की सिटी मैनेजर, स्तुति सिन्हा की।
पिता के गुज़रने के बाद मां ने संभाली ज़िम्मेदारी
पिता की मौत के बाद, स्तुति की परवरिश और पढ़ाई की पूरी ज़िम्मेदारी उनकी माँ पर आ गई। आर्थिक तंगी के बावजूद, उनकी मां ने बेटी की पढ़ाई में कोई कमी नहीं आने दी। उन्होंने स्कूल में नौकरी करके परिवार का खर्च चलाया और स्तुति को हमेशा पढ़ाई के लिए प्रोत्साहित किया। मां का संघर्ष करीब से देखने के बाद, स्तुति ने मुश्किल हालात को अपनी कमज़ोरी नहीं बनने दिया; बल्कि, उन्होंने पढ़ाई को अपना हथियार बनाया और अपने लक्ष्य की ओर लगातार बढ़ती रहीं।
पढ़ाई में अपनी पहचान बनाई
मूल रूप से भोजपुर की रहने वाली स्तुति ने यूनिवर्सिटी लेवल पर पब्लिक एडमिनिस्ट्रेशन की पढ़ाई के दौरान अपनी काबिलियत साबित की। वे अपनी यूनिवर्सिटी क्लास में टॉपर रहीं और उन्हें गोल्ड मेडल मिला। उन्हें यह सम्मान बिहार के तत्कालीन गवर्नर लालजी टंडन से मिला। इस कामयाबी ने उनकी माँ के चेहरे पर गर्व की चमक ला दी, जिन्होंने सालों तक संघर्ष किया था।
इसके बाद, स्तुति ने एडमिनिस्ट्रेटिव सर्विस में करियर बनाने का लक्ष्य रखा और BPSC (बिहार लोक सेवा आयोग) परीक्षा की तैयारी शुरू कर दी। सफलता पाने के लिए लगातार कोशिश की ज़रूरत थी।
हालांकि वे अपने पहले दो प्रयासों में सफल नहीं हो पाईं, लेकिन उन्होंने हिम्मत नहीं हारी। तीसरे प्रयास में उन्होंने BPSC परीक्षा पास की और ऑफिसर बनने का अपना सपना पूरा किया। फिलहाल, वे डुमरांव नगर परिषद में सिटी मैनेजर के तौर पर काम कर रही हैं।
मेरी सफलता के पीछे मेरी मां का संघर्ष है
अपने सफ़र को याद करते हुए स्तुति सिन्हा कहती हैं, "मेरी सफलता के पीछे मेरी मां का संघर्ष है।" "पिता के गुज़रने के बाद, मेरी माँ ने मेरी पढ़ाई पूरी करवाने के लिए बहुत मुश्किलों का सामना किया। उन्होंने कभी भी हालात को मेरे सपनों के आड़े नहीं आने दिया।" वह कहती हैं कि तीसरे प्रयास में BPSC परीक्षा में सफल होना उनके लिए बहुत खास था। यह सिर्फ़ उनकी अपनी कामयाबी नहीं थी, बल्कि उनकी मां के सालों के त्याग और संघर्ष का नतीजा थी। आज भी, जब वह अपनी ज़िम्मेदारियां निभाती हैं, तो उन्हें सबसे पहले अपनी मां की मेहनत याद आती है।
बेटियों के लिए स्तुति का संदेश
स्तुति छात्रों को यह संदेश देती हैं कि असफलता को मंज़िल की राह में रुकावट नहीं, बल्कि कुछ सीखने के मौके के तौर पर देखना चाहिए। अगर लक्ष्य साफ़ हो और मेहनत लगातार की जाए, तो मुश्किल हालात भी सफलता की राह नहीं रोक सकते। स्तुति की कहानी दिखाती है कि हालात चाहे कितने भी मुश्किल क्यों न हों, जब मां का संकल्प और बेटी की मेहनत एक साथ मिल जाते हैं, तो सपनों को हकीकत में बदला जा सकता है।