प्रॉपर्टी की रजिस्ट्री के बाद जरूर कराएं ये काम, वरना भविष्य में हो सकता हैं कानूनी विवाद

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प्रॉपर्टी की रजिस्ट्री के बाद जरूर कराएं ये काम, वरना भविष्य में हो सकता हैं कानूनी विवाद 

Udaipur Times, Documents for Property : घर या फ्लैट खरीदने के बाद ज्यादातर लोग मान लेते हैं कि रजिस्ट्री होते ही वे संपत्ति के कानूनी मालिक बन गए। हालांकि कानूनी तौर पर केवल रजिस्टर्ड सेल डीड ही मालिकाना हक का अंतिम प्रमाण नहीं होती। अगर पुराने रिकॉर्ड में गड़बड़ी, फर्जी दस्तावेज या मालिकाना हक को लेकर विवाद हो, तो भविष्य में कानूनी परेशानी का सामना करना पड़ सकता है। इसलिए रजिस्ट्री के बाद कुछ जरूरी दस्तावेज और प्रक्रियाएं पूरी करना भी बेहद जरूरी है।

मालिकाना हक मजबूत करने के लिए जरूरी दस्तावेज

रजिस्टर्ड सेल डीड – मालिकाना हक ट्रांसफर का मुख्य कानूनी दस्तावेज।

म्यूटेशन (नामांतरण) सर्टिफिकेट – सरकारी रिकॉर्ड में नए मालिक का नाम दर्ज करता है।

पैरेंट डीड (Parent Deeds) - संपत्ति के पुराने मालिकाना रिकॉर्ड।

एनकम्ब्रेंस सर्टिफिकेट (Encumbrance Certificate) - संपत्ति पर किसी कानूनी या वित्तीय बोझ की जानकारी।

प्रॉपर्टी टैक्स की रसीद - टैक्स भुगतान का प्रमाण।

पजेशन लेटर - बिल्डर द्वारा कब्जा सौंपने का प्रमाण।

ऑक्यूपेंसी सर्टिफिकेट (OC) - भवन के रहने योग्य होने का प्रमाण।

कंप्लीशन सर्टिफिकेट (CC) - निर्माण पूरा होने का सरकारी प्रमाण।

स्वीकृत बिल्डिंग प्लान - मंजूर नक्शे का रिकॉर्ड।

वसीयत या प्रोबेट (यदि लागू हो) - विरासत में मिली संपत्ति का कानूनी प्रमाण।

क्यों पर्याप्त नहीं होती सिर्फ रजिस्ट्री?

कानूनी विशेषज्ञों के अनुसार, संपत्ति हस्तांतरण अधिनियम, 1882 और पंजीकरण अधिनियम, 1908 के तहत रजिस्टर्ड सेल डीड मालिकाना हक हस्तांतरित करने का सबसे महत्वपूर्ण दस्तावेज है। लेकिन यदि संपत्ति के पुराने रिकॉर्ड में गड़बड़ी हो, दस्तावेज फर्जी हों या विक्रेता के पास संपत्ति बेचने का अधिकार ही न हो, तो अदालत में रजिस्टर्ड सेल डीड को भी चुनौती दी जा सकती है।

कोर्ट क्यों देखती है पूरी 'चेन ऑफ टाइटल'?

किसी भी संपत्ति विवाद में अदालत सिर्फ रजिस्ट्री नहीं देखती, बल्कि यह भी जांचती है कि संपत्ति का मालिकाना हक पहले किसके पास था और समय-समय पर उसका हस्तांतरण कानूनी तरीके से हुआ या नहीं। इसे चेन ऑफ टाइटल (Chain of Title) कहा जाता है। यदि इस चेन में कोई कमी मिलती है, तो नए खरीदार को भी कानूनी परेशानी हो सकती है।

रजिस्ट्री के बाद नामांतरण कराना भी जरूरी

घर खरीदने के बाद म्यूटेशन (Mutation) कराना जरूरी होता है। इससे नगर निगम या राजस्व विभाग के रिकॉर्ड में नए मालिक का नाम दर्ज हो जाता है और प्रॉपर्टी टैक्स, बिजली-पानी समेत अन्य रिकॉर्ड अपडेट हो जाते हैं।

हालांकि सुप्रीम कोर्ट कई फैसलों में स्पष्ट कर चुका है कि म्यूटेशन से मालिकाना हक तय नहीं होता। यह केवल सरकारी रिकॉर्ड अपडेट करने की प्रक्रिया है। फिर भी भविष्य में प्रॉपर्टी बेचने, होम लोन लेने या अन्य सरकारी कार्यों में यह बेहद उपयोगी साबित होता है।

सभी दस्तावेज सुरक्षित रखना क्यों जरूरी?

रजिस्टर्ड सेल डीड के साथ-साथ पैरेंट डीड, एनकम्ब्रेंस सर्टिफिकेट, म्यूटेशन ऑर्डर, टैक्स रसीदें, पजेशन लेटर, OC, CC और स्वीकृत बिल्डिंग प्लान जैसे दस्तावेज हमेशा सुरक्षित रखने चाहिए। यदि संपत्ति विरासत में मिली है, तो वसीयत या उत्तराधिकार से जुड़े दस्तावेज भी संभालकर रखना जरूरी है।

केवल कब्जा होना भी नहीं है मालिकाना हक का प्रमाण

कई लोग मानते हैं कि लंबे समय तक किसी संपत्ति पर कब्जा रहने से मालिकाना हक साबित हो जाता है। लेकिन कानून के अनुसार संपत्ति का स्वामित्व वैध दस्तावेजों और स्पष्ट मालिकाना रिकॉर्ड के आधार पर तय किया जाता है। इसलिए केवल कब्जा होना पर्याप्त नहीं माना जाता।

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