पाठ्यपुस्तक में इतिहास से छेड़छाड़ करने पर अखिल भारतीय क्षत्रिय महासभा का विरोध

पाठ्यपुस्तक में इतिहास से छेड़छाड़ करने पर अखिल भारतीय क्षत्रिय महासभा का विरोध 

पाठ्यपुस्तक में इतिहास से छेड़छाड़ करने पर अखिल भारतीय क्षत्रिय महासभा ने इतिहासकारों से वार्ता करी एवं ऐतिहासिक दस्तावेजो का अध्यन कर, तथ्यहीन इतिहास को जोड़ने पर विरोध किया
 
 
पाठ्यपुस्तक में इतिहास से छेड़छाड़ करने पर अखिल भारतीय क्षत्रिय महासभा का विरोध
सरकार मनमाने तरीके से कर रही पाठ्यपुस्तक में बदलाव पाठ्यक्रम कमेटी संयोजक ने एतराज जताते हुए दर्ज कराया रोष ।
 

उदयपुर 22 जून 2020। मेवाड़ के आदर्श महाराणा प्रताप की वीर गाथाओं को पाठ्यक्रम से हटाने पर उपजा आक्रोश शांत होने का नाम नहीं ले रहा। अखिल भारतीय क्षत्रिय महासभा मेवाड़ के जिला अध्यक्ष यादवेंद्र सिंह रलावता ने बताया कि मेवाड़ के इतिहास से छेड़छाड़ किए जाने पर अखिल भारतीय क्षत्रिय महासभा एवं इतिहासकारों के मध्य वार्ता प्रताप शोध संस्थान में हुई। 

वार्ता में पाठ्यक्रम निर्माण समिति के संयोजक डॉक्टर देव कोठारी ने आज अखिल भारतीय क्षत्रिय महासभा की पहल पर आयोजित बैठक में कहा कि, पुस्तक में मेरा नाम का उपयोग किया गया है। लेकिन मनमाने ढंग से इतिहास के आदर्श पन्नों को हटाते हुए गलत चीज जोड़ी गई है। यह एक वर्ग विशेष को संतुष्ट करने की मानसिकता है। उन्होंने इस पर विरोध करते हुए कहा कि मेरी जानकारी के बगैर इस तरह का प्रयास एवं हल्दीघाटी पर लिखी गई कपोल कल्पनाओं को आधार बना पाठ्यक्रम पर जोड़ा जाना बहुत ही घातक है। 

अखिल भारतीय साहित्य परिषद चित्तौड़ प्रांत के सह सचिव डॉ एस एस राणावत ने अपने उद्बोधन में कहा कि यह सभी सरकारों का दायित्व है कि, हम अपने आदर्श पुरुषों के जीवन से उज्जवल पक्ष को समाज के समक्ष रखें, जिससे आने वाली पीढ़ी प्रेरणा ले सकें। लेकिन दबाव और संतुष्ट करने की नीति ने यह परिदृश्य बदल दिया है। आज भी हमारा दायित्व है हम एक समिति के माध्यम से पूरे देश के आदर्श पुरुषों को बच्चों के पाठ्यक्रम में जोड़ते हुए नए आधार तैयार कर सकें। 

बैठक में इतिहासविद् डॉक्टर के गुप्ता ने अपने मत देते हुए बताया कि मेवाड़ के इतिहास को कभी भी नजरअंदाज नहीं किया जा सकता है। पूरे विश्व में स्वतंत्रता की अलख जगाने वाले वीर शिरोमणि प्रताप के गौरवमयी पृष्ठ को हटाना बहुत दुखद है। आज भी इस सदी में हमारे आदर्श से प्रेरणा लेने की जरूरत है।

बीएन विश्वविद्यालय के प्रॉक्टर शक्तिसिंह कारोही ने रोष व्यक्त करते हुए कहा कि हमारा इतिहास लिखने वाले हम से ही नहीं पूछ रहे हैं और ना ही मेवाड़ के विद्वानों से पूछा जा रहा है। उसी वंश परंपरा के होते हुए हमारे पुरखों का गलत इतिहास हम आने वाली पीढ़ी के सामने जाने देवें यह हमारा धर्म नहीं है। उन्होंने अखिल भारतीय क्षत्रिय महासभा की इस पहल का स्वागत किया। नगर निगम उदयपुर के पूर्व उपमहापौर महेंद्र सिंह शेखावत ने कहा कि इतिहास पर काम करने वाले सभी संस्थानों, सत्तारूढ़ दल एवं प्रतिपक्ष सभी की जिम्मेदारी है कि हम शिक्षा विभाग को प्रयोगशाला नहीं बनावे। 

प्रताप शोध संस्थान के निदेशक मोहब्बत सिंह राठौड़ ने कहा कि हल्दीघाटी युद्ध में हल्दी लगा महिलाएं लड़ी और इसलिए उसका नाम हल्दीघाटी पड़ा एवं बनवीर की हत्या महाराणा उदय सिंह ने करवाई हो, यह दोनों तथ्य इतिहास में कहीं भी अंकित नहीं है। भाजपा नेत्री संगीता कोठारिया ने तथ्यों और इतिहास से छेड़छाड़ करने पर जन आंदोलन की बात कही। उन्होंने कहा कि मेवाड़ 36 कौम से सौहार्दपूर्ण रिश्ते रखने वाला रक्त है।

वार्ता का संयोजन एवं संचालन अखिल भारतीय क्षत्रिय महासभा के प्रवक्ता रणवीर सिंह जोलावास ने किया। बैठक में संगठन के दिलीप सिह दुदोड़ ने इतिहास में बदलाव को अनुचित बताया। जिलाध्यक्ष यादवेंद्र सिंह रलावता ने संपूर्ण प्रकरण पर प्रगति से सभी को अवगत कराते हुए सभी संगठनों को साथ लेने की बात करी एवं इसके लिए समुचित सभी तरह की कार्यवाही के लिए तैयार रहने को कहा। सत्यपाल सिंह डोडिया, अजय सिंह पहल, भानु कपिल आदि ने अपने-अपने विचार रखें। संस्था महामंत्री हेमेंद्र सिंह दवाणा ने सभी के प्रति आभार ज्ञापित करते हुए, आगामी कार्य योजना का प्रतिवेदन प्रस्तुत किया ।

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