साँसों के समक्ष सब संपत्ति गौणः नीलांजना श्रीजी

वासुपूज्य स्थित दादावाड़ी में साध्वी नीलांजना श्रीजी ने कहा कि एक सांस के बदले जीवन की सारी संपत्ति रखो तो भी सांस ही मूल्यवान रहेगी। पलड़ा उसका ही भारी रहेगा। साँसों का भार हमें कभी समझ नही आता। इसका मूल्य हमें कभी समझ नही आया। यह अनमोल है।

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साँसों के समक्ष सब संपत्ति गौणः नीलांजना श्रीजी

वासुपूज्य स्थित दादावाड़ी में साध्वी नीलांजना श्रीजी ने कहा कि एक सांस के बदले जीवन की सारी संपत्ति रखो तो भी सांस ही मूल्यवान रहेगी। पलड़ा उसका ही भारी रहेगा। साँसों का भार हमें कभी समझ नही आता। इसका मूल्य हमें कभी समझ नही आया। यह अनमोल है।

उन्होंने कहा कि अंतिम समय में सांस बेचकर संपत्ति इकट्ठी की हुई है लेकिन उस सारी संपत्ति के बदले एक सांस भी नही मिल पाती, इसीलिए सांसे यानी अपना जीवन परमात्मा में लगाओ। जब आये थे तो मुट्ठी में साँसों का खजाना लेकर आये थे। अब उसे सिर्फ भोग रहे हैं। जैसे ही यह रिक्त होगा फिर अगले जन्म के लिए प्रस्थान कर जाएंगे। ऐसी चीजों के लिए सारी सांसे खत्म कर दी जो किसी काम नही आती। सौदा तो बराबरी का होता है। ऐसी चीजों के लिए मूल्यवान सांसे खत्म कर दी जो कहीं भी किसी भी रूप में काम नही आती।

संसार में सभी वस्तुओं का सौदा बराबरी का हो सकता है लेकिन जीवन का या साँसों का कभी सौदा नही हो सकता। सारी चीजें किसी न किसी मूल्य में समाहित है सिर्फ जीवन अनमोल है। इसका खरीद बेचान नही हो सकता। प्रतिपल, प्रतिक्षण खर्च हो रहा है, बस इसमें हम कुछ भी जोड़ नही पा रहे हैं।

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