अरावली के फैसले पर उबाल
उदयपुर 19 दिसंबर 2025। अरावली पर्वतमाला को लेकर सुप्रीम कोर्ट के हालिया फैसले के बाद उदयपुर में विरोध तेज हो गया है। बड़ी संख्या में लोगों ने सड़कों पर उतरकर प्रदर्शन किया और फैसले पर सवाल खड़े किए। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि अरावली पर्वतमाला को केवल 100 मीटर से कम ऊंचाई की सामान्य पहाड़ी मानना तथ्यात्मक रूप से गलत और भ्रामक है।
प्रदर्शनकारियों ने कहा कि अरावली एक विस्तृत और प्राचीन पर्वत श्रृंखला है, जो पर्यावरण संरक्षण, जल स्रोतों की सुरक्षा और जैव विविधता के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। वक्ताओं ने चेतावनी दी कि यदि अरावली के अस्तित्व के साथ इस तरह की छेड़छाड़ जारी रही, तो इसका गंभीर खामियाजा आने वाली पीढ़ियों को भुगतना पड़ेगा। उन्होंने सरकार से अरावली पर्वतमाला को लेकर स्पष्ट और ठोस नीति बनाने की मांग की।

इस प्रदर्शन में मेवाड़ महामंडलेश्वर रास बिहारी शास्त्री, भाजपा के पूर्व शहर जिलाध्यक्ष रविंद्र श्रीमाली सहित कई सामाजिक, राजनीतिक और पर्यावरण प्रेमी मौजूद रहे। सभी ने एक स्वर में अरावली के संरक्षण की आवश्यकता पर जोर दिया।
इधर, कांग्रेस की ओर से भी विरोध प्रदर्शन किया गया। उदयपुर शहर जिला कांग्रेस कमेटी और कांग्रेस पर्यावरण प्रकोष्ठ के नेतृत्व में हुए प्रदर्शन में युवाओं और महिलाओं ने बड़ी संख्या में भाग लिया। प्रदर्शनकारियों ने सेव अरावली के पोस्टर-बैनर हाथों में लेकर सरकार और सुप्रीम कोर्ट के फैसले के खिलाफ नारे लगाए।
प्रदर्शनकारियों ने चेतावनी दी कि यदि सुप्रीम कोर्ट अपने फैसले पर पुनर्विचार नहीं करता है, तो आंदोलन को और उग्र किया जाएगा। उन्होंने अरावली को केवल 100 मीटर की पहाड़ी मानने को पर्यावरण और मेवाड़ की अस्मिता के साथ अन्याय बताया।
प्रदर्शन में कांग्रेस शहर जिलाध्यक्ष फतेह सिंह राठौड़, दिनेश श्रीमाली, वरिष्ठ नेता धर्मेंद्र राजोरा, सत्यानारायण टांक, ब्लॉक अध्यक्ष अजय सिंह सहित बड़ी संख्या में कांग्रेस कार्यकर्ता और आमजन मौजूद रहे।
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