संभाग की पहली हृदय व मस्तिष्क की धमनियों की एंजियोप्लास्टी एक साथ गीतांजली में
गीतांजली हॉस्पिटल के कार्डियक विभाग के डॉ हरिश सनाढ्य व डॉ सी पी पुरोहित द्वारा 61 वर्षीय रोगी की गर्दन की धमनी में तकलीफ व हृदय में स्टेन्ट के अंदर आई रूकावट को केरोटिड एंजियोप्लास्टी द्वारा सफल ऑपरेशन कर ठीक किया।

गीतांजली हॉस्पिटल के कार्डियक विभाग के डॉ हरिश सनाढ्य व डॉ सी पी पुरोहित द्वारा 61 वर्षीय रोगी की गर्दन की धमनी में तकलीफ व हृदय में स्टेन्ट के अंदर आई रूकावट को केरोटिड एंजियोप्लास्टी द्वारा सफल ऑपरेशन कर ठीक किया।
डॉ सनाढ्य ने बताया कि रोगी को गीतांजली कार्डियक सेंटर की गहन चिकित्सा इकाई में भर्ती किया गया, जहां प्रारंभिक जाँचों में पाया गया कि उनका हृदय कमजोर था (म्थ्-40प्रति.) व ईसीजी में पुराने हृदयाघात से संबंधित लक्षण थे। बार बार स्ट्रोक को देखते हुए उनके दिमाग को खून प्रवाहित करने वाली गर्दन की धमनियों की एंजियोग्राफी जाँच करने पर यह पाया गया कि उनकी बायीं तरफ की गर्दन की धमनी (स्प्ब्।) 100प्रति अवरूद्व थी तथा दायीं तरफ की गर्दन की धमनी में भी 90प्रति की रूकावट थी।
साथ ही उनके हृदय की धमनी में 2 वर्ष पूर्व लगे स्टेन्ट में भी 90प्रति की रूकावट पाई गई। इसके बाद डॉ सनाढ्य व डॉ पुरोहित की टीम ने रोगी के दिमाग में जाने वाली गर्दन की धमनी (त्प्ब्।) का स्टेन्ट लगाकर एन्जियोप्लास्टी करने का निर्णय लिया।
उन्होंने बताया कि हाई रिस्क केरोटिड एन्जियोप्लास्टी उनके साथ उनकी टीम ने सफलतापूर्वक संपन्न की व रोगी की दायीं तरफ की हृदय की धमनी में स्टेन्ट के अंदर आई रूकावट की भी सफलतापूर्वक एंजियोप्लास्टी की तथा स्वस्थ होने के बाद उन्हें छुट्टी दे दी गई। यह उदयपुर का पहला व अनूठा केस है जिसमें हृदय व मस्तिष्क की अवरूद्व धमनियों को एक साथ एंजियोप्लास्टी कर ठीक किया गया।
क्या होती है ’’हाई रिस्क केरोटिड एंजियोप्लास्टी’’?
केरोटिड आर्टरीज़ दो बड़ी धमनियां होती है जो मस्तिष्क में रक्त का संचार करती है। इनमें से एक यदि पूरी बंद हो एवं दुसरी में 90प्रति ब्लॉकेज हो, तो इसकी एंजियोप्लास्टी काफी हाई रिस्क मानी जाती है क्योंकि ऑपरेशन के दौरान मस्तिष्क का खून का संचार पूरी तरह के लिए रूक जाता है। इसी के साथ यदि हृदय की नसों में भी ब्लॉकेज हो, तो जटिलता ओर बढ़ जाती है।
रोगी कन्हैयालाल सेन ने बताया कि वे धुम्रपान की लत व मधुमेह रोग से पीडित थे जिसके चलते 2 वर्ष पूर्व उन्हें एक अस्पताल में दिखाया गया, तो पता चला कि उन्हें हृदयाघात की तकलीफ है और साथ ही उनकी दायीं तरफ की धमनी में भी रूकावट थी जिसे स्टेन्ट लगाकर ठीक किया गया। उन्हें पिछले 8-9 महीने में दोबारा दो-तीन बार स्ट्रोक की तकलीफ हुई जिसके लिए उन्हें गीतांजली हॉस्पिटल के न्यूरोसर्जन डॉ उदय भौमिक को दिखाया गया लेकिन जांचो के बाद जब यह पता चला कि उन्हें हृदयरोग की तकलीफ भी थी जिसके चलते उन्हे डॉ हरिश सनाढ्य व डॉ सी पी पुरोहित को रेफर किया।
