संवत्सरी पर्व पर प्रतिक्रमण के दौरान की क्षमायाचना
बारसा सूत्र वांचन एवं चतुर्विद संघ के साथ मंदिर दर्शन कर संवत्सरी पर्व धूमधाम से मनाया। शुक्रवार को अधिकांश श्रावक-श्राविकाओं ने उपवास किये। शाम को बड़े प्रतिक्रमण के बाद एक-दूसरे से मिच्छामीदुखड़म किया। शनिवार को तपस्या करने वालों के सामूहिक पारणे अराधना भवन में होंगे।
बारसा सूत्र वांचन एवं चतुर्विद संघ के साथ मंदिर दर्शन कर संवत्सरी पर्व धूमधाम से मनाया। शुक्रवार को अधिकांश श्रावक-श्राविकाओं ने उपवास किये। शाम को बड़े प्रतिक्रमण के बाद एक-दूसरे से मिच्छामीदुखड़म किया। शनिवार को तपस्या करने वालों के सामूहिक पारणे अराधना भवन में होंगे।
श्री जैन श्वेताम्बर मूर्तिपूजक श्रीसंघ के पर्यूषण महापर्व अराधन भवन में मुनि पुनित रत्नसागरजी, साध्वी चंद्रकलाश्रीजी आदि ठाणा के सानिध्य में हो रहे है। प्रतिदिन तपस्याओं की धूम मची हुई है।
शुक्रवार को मुनिश्री ने बारसा सूत्र का वांचन किया इसके पश्चात चतुर्विद संघ के साथ चैत्य परिपाटी की। इस दौरान चौगान मंदिर, दादाबाड़ी, केसरियाजी मंदिर नगर में स्थित जैन मंदिरों के दर्शन किये। सुबह धर्मसभा के दौरान मुनिश्री द्वारा संवत्सवरी के महत्व पर विस्तार से प्रकाश डाला। इस दौरान संघ के अध्यक्ष डॉ शैलेन्द्र हिरण, मंत्री कुलदीप नाहर, चातुर्मास संयोजक गजेन्द्र नाहटा, सहसंयोजक अरूण बडाला ने वर्षभर के दौरान जाने-अनजाने में हुई गलती के लिए क्षमायाचना की।
शाम को साढ़े तीन बजे से संवत्सरी का बड़ा प्रतिक्रमण प्रारंभ हुआ। प्रतिक्रमण के दौरान सालभर में जाने-अनजाने में हुई गलती की सभी ने सामूहिक रूप से क्षमायाचना की। शाम को आयड़ व चौगान मंदिर में भव्य भक्ति संध्या का आयोजन हुआ। मंत्री कुलदीप नाहर ने बताया कि पर्यूषण महापर्व के दौरान अठ्ठम तप, छह उपवास, पांच उपवास, चार उपवास, तीन उपवास, दो उपवास व एक उपवास करने वाले तपस्वियों का सामूहिक पारणा शनिवार को प्रात: 8 बजे मालदास स्ट्रीट अराधना भवन में होगा। तीन से अधिक तपस्या करने वाले तपस्वियों का श्रीसंघ की ओर से बहुमान किया जायेगा।
