मजदूर पिता की बेटी अर्चना ने रचा इतिहास ! 192.5 किलो उठाकर बनाया वर्ल्ड रिकॉर्ड

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मजदूर पिता की बेटी अर्चना ने रचा इतिहास ! 192.5 किलो उठाकर बनाया वर्ल्ड रिकॉर्ड

Udaipur Times, Sikar Success Story : सीकर जिले के रायपुरा गांव की रहने वाली अर्चना बिलोनिया ने सीमित संसाधनों और आर्थिक चुनौतियों के बीच अपने खेल करियर की शुरुआत की और आज अंतरराष्ट्रीय स्ट्रेंथ लिफ्टिंग में भारत का प्रतिनिधित्व कर चुकी हैं। कभी अभ्यास के लिए कई किलोमीटर पैदल चलकर जिला खेल स्टेडियम पहुंचने वाली अर्चना ने अपनी मेहनत और दृढ़ संकल्प के दम पर 192.5 किलोग्राम वजन उठाकर विश्व रिकॉर्ड कायम किया है। मजदूर परिवार से आने वाली अर्चना के लिए यह सफर आसान नहीं रहा, लेकिन परिवार, कोच और सहयोगियों के साथ ने उन्हें लगातार आगे बढ़ने का हौसला दिया।

मजदूर पिता की बेटी अर्चना ने रचा इतिहास !

192.5 किलो वजन उठाकर बनाया विश्व रिकॉर्ड

अर्चना की खेल उपलब्धियों में सबसे खास उनका विश्व रिकॉर्ड है। थाईलैंड के पटाया में आयोजित 12वीं वर्ल्ड स्ट्रेंथ लिफ्टिंग एंड बेंच प्रेस चैंपियनशिप में उन्होंने स्ट्रेंथ लिफ्टिंग में 192.5 किलोग्राम वजन उठाकर नया विश्व रिकॉर्ड कायम किया। इस अंतरराष्ट्रीय चैंपियनशिप में अर्चना ने शानदार प्रदर्शन करते हुए दो गोल्ड मेडल अपने नाम किए। इससे पहले वर्ष 2024 में कजाकिस्तान में आयोजित 11वीं वर्ल्ड स्ट्रेंथ लिफ्टिंग चैंपियनशिप में भी उन्होंने दमदार प्रदर्शन किया था। इस प्रतियोगिता में अर्चना ने एक गोल्ड मेडल के साथ इनक्लाइन बेंच प्रेस में सिल्वर मेडल जीता था।

पावर और स्ट्रेंथ लिफ्टिंग में जीत चुकी हैं कई पदक

अर्चना ने अब तक पावर लिफ्टिंग और स्ट्रेंथ लिफ्टिंग में कई पदक अपने नाम किए हैं। पावर लिफ्टिंग में उनके नाम एक गोल्ड, चार सिल्वर और पांच ब्रॉन्ज मेडल हैं। वहीं, स्ट्रेंथ लिफ्टिंग में वह अब तक चार गोल्ड मेडल जीत चुकी हैं। राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिताओं में भी अर्चना ने चार ब्रॉन्ज मेडल हासिल किए हैं। उनकी उपलब्धियां बताती हैं कि सीमित संसाधनों के बीच शुरू हुआ उनका खेल सफर अब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बना चुका है।

शॉटपुट से शुरू हुआ था खेल का सफर

अर्चना का खेल सफर सीधे स्ट्रेंथ लिफ्टिंग से शुरू नहीं हुआ था। श्री कल्याण कन्या महाविद्यालय, सीकर में पढ़ाई के दौरान उन्होंने एथलेटिक्स में शॉटपुट की तैयारी शुरू की थी। इसी दौरान कोच कैप्टन दुर्जन सिंह शेखावत की नजर उनकी प्रतिभा पर पड़ी। कोच ने अर्चना की ताकत और क्षमता को पहचाना और उन्हें पावर लिफ्टिंग में आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया। इसके बाद अर्चना ने वजन उठाने वाले खेल को अपना लक्ष्य बना लिया और लगातार प्रशिक्षण के साथ अपनी क्षमता को निखारना शुरू किया।

मजदूर पिता की बेटी अर्चना ने रचा इतिहास !

कई किलोमीटर पैदल चलकर जाती थीं अभ्यास करने

अर्चना के शुरुआती दिनों में सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक संसाधनों की कमी थी। अभ्यास के लिए उन्हें कई किलोमीटर पैदल चलकर जिला खेल स्टेडियम पहुंचना पड़ता था। परिवार की आर्थिक स्थिति भी ऐसी नहीं थी कि खेल से जुड़े सभी खर्च आसानी से उठाए जा सकें। इसके बावजूद अर्चना ने परिस्थितियों को अपने लक्ष्य के आड़े नहीं आने दिया। लगातार अभ्यास, अनुशासन और मेहनत के साथ उन्होंने धीरे-धीरे अपनी पहचान बनानी शुरू की और राष्ट्रीय स्तर से होते हुए अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं तक पहुंचीं।

मजदूर पिता ने बेटी के सपने को दिया पूरा साथ

अर्चना के पिता बंशीलाल बिलोनिया श्रमिक हैं, जबकि उनकी मां मोहनी देवी गृहिणी हैं। परिवार की सीमित आमदनी के बावजूद माता-पिता ने बेटी के खेल करियर और उसके सपनों को कमजोर नहीं पड़ने दिया। अर्चना को आगे बढ़ाने में भामाशाहों और अन्य सहयोगियों की मदद भी मिली। उन्हें खेल उपकरण, जूते और जरूरी किट उपलब्ध कराने में सहयोग किया गया। परिवार और समाज से मिले इस समर्थन ने अर्चना को मुश्किल परिस्थितियों में भी अपना प्रशिक्षण जारी रखने में मदद की।

अब खुद उठा रही हैं ट्रेनिंग और डाइट का खर्च

अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान बनाने के बाद भी अर्चना का संघर्ष खत्म नहीं हुआ है। फिलहाल वह अपने प्रैक्टिस और डाइट का खर्च खुद उठा रही हैं। वह जयपुर के विद्याधर नगर में कोच उदयभान रावत के निर्देशन में प्रशिक्षण ले रही हैं। अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं की तैयारी के लिए नियमित ट्रेनिंग के साथ बेहतर डाइट और फिटनेस पर भी खर्च होता है। आर्थिक चुनौतियों के बावजूद अर्चना अपने लक्ष्य से पीछे हटने के बजाय लगातार मेहनत कर रही हैं। उनका लक्ष्य आने वाले समय में अंतरराष्ट्रीय मंच पर देश के लिए और बेहतर प्रदर्शन करना है।

अब किर्गिजस्तान में भारत के लिए पदक जीतने की तैयारी

विश्व रिकॉर्ड कायम करने के बाद अब अर्चना की नजर अगली अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिता पर है। 8 से 12 सितंबर 2026 तक किर्गिजस्तान में 13वीं इंटरनेशनल स्ट्रेंथ लिफ्टिंग एंड इनक्लाइन बेंच प्रेस 2026 चैंपियनशिप आयोजित होगी।अर्चना इस प्रतियोगिता में भारत का प्रतिनिधित्व करने और देश के लिए एक और पदक जीतने की तैयारी में जुटी हैं। इसके लिए वह नियमित ट्रेनिंग और फिटनेस पर ध्यान दे रही हैं। 

अर्चना बिलोनिया की कहानी सिर्फ पदक और रिकॉर्ड की कहानी नहीं है, बल्कि यह संघर्ष, अनुशासन और लगातार मेहनत की मिसाल भी है। जिस खिलाड़ी को कभी अभ्यास के लिए कई किलोमीटर पैदल चलकर स्टेडियम जाना पड़ता था, उसी ने आगे चलकर 192.5 किलोग्राम वजन उठाकर विश्व रिकॉर्ड बनाया।अब अर्चना का अगला लक्ष्य अंतरराष्ट्रीय मंच पर एक बार फिर शानदार प्रदर्शन करते हुए भारत के लिए पदक जीतना और अपने खेल करियर को नई ऊंचाई देना है।

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