क्या आपके भी प्रॉपर्टी के पक्के हो गए गुम ? अब बिना घबराएं ऐसे हासिल करें दोबारा सभी दस्तावेज

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क्या आपके भी प्रॉपर्टी के पक्के हो गए गुम ? अब बिना घबराएं ऐसे हासिल करें दोबारा सभी दस्तावेज

Udaipur Times, Property Papers Lost : अगर आपकी प्रॉपर्टी के ओरिजिनल दस्तावेज (Original Property Documents) या सेल डीड (Sale Deed) खो गई है, तो घबराने की जरूरत नहीं है। सिर्फ दस्तावेज खो जाने से आपका मालिकाना हक (Ownership) खत्म नहीं होता। हालांकि, भविष्य में प्रॉपर्टी बेचने, होम लोन लेने या किसी कानूनी प्रक्रिया में परेशानी से बचने के लिए जल्द से जल्द डुप्लीकेट या सर्टिफाइड कॉपी (Certified Copy) प्राप्त करना जरूरी है।

कानूनी विशेषज्ञों के अनुसार, प्रॉपर्टी के दस्तावेज खोने पर सबसे पहले पुलिस में शिकायत या एफआईआर (FIR) दर्ज करानी चाहिए। इसके बाद जरूरत पड़ने पर अखबार में गुमशुदगी की सूचना प्रकाशित करानी होती है और फिर संबंधित सब-रजिस्ट्रार कार्यालय (Sub-Registrar Office) से दस्तावेजों की सर्टिफाइड कॉपी के लिए आवेदन करना होता है।

प्रॉपर्टी बेचने के लिए कौन-कौन से दस्तावेज जरूरी?

किसी भी प्रॉपर्टी की खरीद-बिक्री के दौरान कई अहम दस्तावेजों की जरूरत होती है। इनमें सबसे महत्वपूर्ण सेल डीड और टाइटल डीड हैं, जो मालिकाना हक का प्रमाण होती हैं। इसके अलावा एन्कम्ब्रेंस सर्टिफिकेट (Encumbrance Certificate), प्रॉपर्टी टैक्स की रसीदें, ऑक्यूपेंसी सर्टिफिकेट (Occupancy Certificate), स्टांप ड्यूटी और रजिस्ट्रेशन की रसीद, जरूरत पड़ने पर पावर ऑफ अटॉर्नी (Power of Attorney), नो ऑब्जेक्शन सर्टिफिकेट (NOC), खाता सर्टिफिकेट और हाउसिंग सोसायटी का शेयर सर्टिफिकेट भी जरूरी हो सकता है। खरीदार और विक्रेता दोनों के आधार कार्ड, पैन कार्ड और अन्य पहचान पत्र भी अनिवार्य होते हैं।

सेल डीड क्यों होती है सबसे अहम?

सेल डीड प्रॉपर्टी का सबसे महत्वपूर्ण कानूनी दस्तावेज होता है। यही साबित करता है कि प्रॉपर्टी का वास्तविक मालिक कौन है। इसकी जरूरत प्रॉपर्टी खरीदने-बेचने, मालिकाना हक ट्रांसफर करने, होम लोन लेने, संपत्ति गिरवी रखने और किसी कानूनी विवाद की स्थिति में पड़ती है।

अगर दस्तावेज खो जाएं तो क्या करें?

विशेषज्ञों के मुताबिक सबसे पहले नजदीकी पुलिस स्टेशन में एफआईआर या शिकायत दर्ज कराएं, ताकि रिकॉर्ड में यह दर्ज हो जाए कि दस्तावेज गुम हो गए हैं। इसके बाद किसी अखबार में दस्तावेज खोने की सूचना प्रकाशित कराना बेहतर माना जाता है, जिससे उनके गलत इस्तेमाल की आशंका कम हो जाती है।

इसके बाद एक शपथ पत्र (Affidavit) तैयार करना होता है, जिसमें यह उल्लेख किया जाता है कि दस्तावेज खो गए हैं और उन्हें खोजने की पूरी कोशिश की गई है। जरूरत पड़ने पर इसे नोटरी से सत्यापित भी कराया जा सकता है।

इसके बाद जिस सब-रजिस्ट्रार कार्यालय में प्रॉपर्टी का रजिस्ट्रेशन हुआ था, वहां सर्टिफाइड कॉपी के लिए आवेदन करना होता है। आवेदन के साथ पहचान पत्र, पता प्रमाण, प्रॉपर्टी का रजिस्ट्रेशन नंबर, एफआईआर की कॉपी, एफिडेविट, अखबार में प्रकाशित सूचना और अन्य जरूरी दस्तावेज जमा करने पड़ सकते हैं। दस्तावेजों के सत्यापन के बाद सर्टिफाइड कॉपी जारी की जाती है।

क्या डुप्लीकेट दस्तावेज कोर्ट में मान्य होते हैं?

कानूनी विशेषज्ञों के अनुसार, सब-रजिस्ट्रार कार्यालय से जारी की गई सर्टिफाइड कॉपी कानूनी रूप से मान्य होती है। हालांकि, यदि किसी विवाद की स्थिति बनती है तो उसकी वैधता को अदालत में चुनौती दी जा सकती है। ऐसे मामलों में एफिडेविट, सब-रजिस्ट्रार द्वारा जारी प्रमाणित कॉपी, नोटरी सत्यापन और जरूरत पड़ने पर गवाहों की गवाही दस्तावेजों की वैधता साबित करने में मदद करती है।

क्या डुप्लीकेट सेल डीड पर होम लोन मिलेगा?

कुछ मामलों में बैंक सर्टिफाइड कॉपी के आधार पर होम लोन मंजूर कर सकते हैं, लेकिन यह पूरी तरह बैंक की आंतरिक नीति और दस्तावेजों की जांच पर निर्भर करता है। बैंक एन्कम्ब्रेंस सर्टिफिकेट समेत अन्य कानूनी दस्तावेज भी मांग सकता है। इसलिए अंतिम फैसला संबंधित बैंक ही लेता है।

अगर बैंक ही आपके दस्तावेज खो दे?

यदि होम लोन के दौरान बैंक की कस्टडी में रखे गए प्रॉपर्टी दस्तावेज खो जाते हैं, तो भी डुप्लीकेट दस्तावेज प्राप्त करने की प्रक्रिया वही रहेगी। हालांकि, यदि दस्तावेज बैंक की लापरवाही से खोए हैं तो नियमों के तहत डुप्लीकेट दस्तावेज बनवाने का खर्च बैंक से वहन करने की मांग की जा सकती है।

सिर्फ फोटोकॉपी से नहीं चलेगा काम

विशेषज्ञों का कहना है कि केवल फोटोकॉपी के भरोसे नहीं रहना चाहिए। भविष्य में प्रॉपर्टी की बिक्री, होम लोन या किसी कानूनी प्रक्रिया के दौरान केवल प्रमाणित (Certified) दस्तावेज ही स्वीकार किए जाते हैं। इसलिए सब-रजिस्ट्रार कार्यालय से सर्टिफाइड कॉपी प्राप्त करना ही सबसे सुरक्षित विकल्प है।

भविष्य में ऐसी परेशानी से कैसे बचें?

विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि प्रॉपर्टी के सभी मूल दस्तावेज सुरक्षित लॉकर या वाटरप्रूफ फाइल में रखें। साथ ही उनकी स्कैन कॉपी और डिजिटल बैकअप भी तैयार करके सुरक्षित रखें। प्रॉपर्टी के रजिस्ट्रेशन नंबर और अन्य जरूरी रिकॉर्ड अलग से नोट कर लें तथा दस्तावेजों की जानकारी अनावश्यक लोगों के साथ साझा करने से बचें। इससे किसी भी आपात स्थिति में दस्तावेज दोबारा प्राप्त करने की प्रक्रिया काफी आसान हो जाती है।

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