अर्ह च्चक्र विधान सम्पन्न, विश्वशांति महायज्ञ एवं भव्यशोभा यात्रा निकली
जब प्रभु की शरण मिलती है तो लगता है कि अपूर्व सम्पदा मिल गर्इ है। हमारा जीव पंचेनिद्रयों के विषय कषायों मे निरन्तरत है। हमें विषय कषायों को भूलने के लिए प्रभु भकित करनी होगी। इससे बढ़कर शिवमार्ग और कोर्इ नहीं है। यह प्रवचन आर्यिका रत्न 105 श्री पूर्णमति माताजी ने नवभारत स्कूल प्रांगण में […]

जब प्रभु की शरण मिलती है तो लगता है कि अपूर्व सम्पदा मिल गर्इ है। हमारा जीव पंचेनिद्रयों के विषय कषायों मे निरन्तरत है। हमें विषय कषायों को भूलने के लिए प्रभु भकित करनी होगी। इससे बढ़कर शिवमार्ग और कोर्इ नहीं है। यह प्रवचन आर्यिका रत्न 105 श्री पूर्णमति माताजी ने नवभारत स्कूल प्रांगण में अर्ह च्चक्र विधान मण्डल में आयोजित धर्मसभा में दिये।
प्रभु की विमान (पालकी) यात्रा के बारे में बताते हुए माताजी ने कहा कि विमान का अर्थ मान से रहित हो जाना है, यह भावना आए तो ही भगवान की विमान यात्रा सार्थक है। अपने मान भावों को समाप्त करने के लिए भगवान की विमान यात्रा में भाग लेना चाहिए। माताजी ने कहा की सभी अपने-अपने पुण्य भावों के कर्ता हैं। माताजी ने आग्रह किया कि पिछले 8 दिनों में 24 समवशरण की जो पूजा की है तो नित्य कम से कम दो मिनिट के लिए समवशवरण का ध्यान अवश्य करिये जिससे परिणामों में निर्मलता आती है।
विश्वशांति महायज्ञ
यह जानकारी देते हुए प्रचार सहसंयोजक विकास गदिया ने बताया कि रविवार को विधान पूजन में देव-शास्त्र-गुरु एवं सरस्वती पूजन की गर्इ। इसके पश्चात 101 कुण्डीय विश्वशानित महायज्ञ पूर्ण विधि-विधान से मंत्रोच्चारण करते हुए किया गया।
महायज्ञ में लगभग 1000 पूजकों ने भाग लिया। इसके पश्चात समवशरण विघटित किये गये। सोमवार प्रात: 8.30 बजे से आर्यिका श्री के नियमित प्रवचन उदासीन आश्रम में होगे। विधान के सफल एवं भव्य आयोजन के लिए धर्मप्रभावना समिति के अध्यक्ष कुन्थुकुमार जैन, महामंत्री अशोक गोधा, कार्याध्क्ष झमकलाल टाया, कोषाध्यक्ष प्रकाश अखावत, चातुर्मास प्रमुख प्रमोद बाकलीवाल, प्रचार मंत्री शशिकान्त शाह, पारस सिंघवी, संतोष बैनाड़ा, राजेश वैद, सुशीला पाण्डया एवं समस्त कार्यकारिणी ने सभी कार्यकर्ताओं, समज बन्धुओं, मिडिया एवं चैनल का आभार व्यक्त किया।
विधान समापन पर भव्य शोभायात्रा
जुलूस संयोजक राजेश वैद के अनुसार रविवार को प्रात: 8.30 बजे विधान समापन पर 24 भगवान की 24 पालकियों में भव्य शोभायात्रा निकली। आर्यिका पूर्णमति माताजी एवं संघस्थ अन्य आर्यिका माताजी शोभायात्रा में साथ थे। जुलूस में सम्पूण दिगम्बर जैन समाज शामिल हुआ। शहर के विभिन्न स्थलों पर श्रीजी पालकियों में गोला एवं न्यौछावर राशी श्रावकों द्वारा अर्पित की गर्इ । इन्द्र-इन्द्राणिया भकित नृत्य करते हुए चल रहे थे। सारा वातावरण अत्यन्त ही भकितमय बन गया। जुलूस में हाथी, घोड़ा एवं 20 बग्गिओं एवं चार बैण्ड थे।
हुमड़ भवन में आर्यिका श्री आचार्य अभिनन्दन सागर जी महाराज के दर्शन किये। आचार्य श्री ससंघ 24 भगवान की अगवानी कि एवं शोभायात्रा में थोडी दुरी तक साथ चले। भरत चक्रवर्ती विमल पाटनी द्वारा गरीबों को पुरे मार्ग में कम्बलें वितरित की गर्इ। जुलूस नवभारत स्कूल से शहर के प्रमुख मार्गो से होते हुए उदासीन आश्रम पहुची। उदासीन आश्रम पर पहुँच कर इन 24 तीर्थंकर प्रतिमाओं का अभिषेक किया गया। शोभयात्रा के पश्चात सांवरिया गार्डन में दिगम्बर जैैन समाज का स्वामी वात्सल्य हुआ।
